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ट्रामा सेंटर के निर्माण में देरी से हर साल दम तोड़ रहीं सैकड़ों जिंदगियां
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ट्रामा सेंटर के निर्माण में देरी से हर साल दम तोड़ रहीं सैकड़ों जिंदगियां
गढ़मुक्तेश्वर। ट्रामा सेंटर के निर्माण में देरी से सैकड़ों जिंदगियां बेहतर चिकित्सा के अभाव में हर साल दम तोड़ रही हैं। सपा शासनकाल में इस ट्रामा सेंटर का प्रस्ताव पास हो गया था। सिखैड़ा में जमीन का भी चयन हो गया। लेकिन सरकारी उदासीनता के कारण हर बार कोई न कोई अड़चन सामने आ जाती। हालांकि गत दो माह पहले कार्यदायी संस्था ने काम शुरू किया लेकिन अभी तक केवल ट्रामा सेंटर की नींव ही डाली जा सकी है जबकि फरवरी 2021 तक यह कार्य पूरा करने का लक्ष्य दिया गया है। ऐसे में समय पर काम पूरा होना मुश्किल दिखाई दे रहा है।
एनएच 09 को सबसे व्यस्तम हाईवे में गिना जाता है। जिसके चलते आए दिन सड़क हादसों के मामले सामने आते हैं।
बहुत से लोगों की मौत सिर्फ इसलिए हो जाती है, क्योंकि उन्हें समय से उपचार ही नहीं मिल पाता, जो मरीज प्राइवेट अस्पतालों में समय से पहुंच जाते हैं, उनकी जान बचा ली जाती है।
जिले के सरकारी अस्पतालों में ऐसे गंभीर मरीजों को बचाने की सुविधाएं नगण्य है। वर्ष 2016 में सपा के शासन काल में तत्कालीन विधायक व पूर्व मंत्री मदन चौहान के प्रयास से गढ़ क्षेत्र के गांव अल्लाबख्शपुर में हाईवे किनारे भूमि का चयन कर ट्रामा सेंटर का निर्माण शुरू कराया गया था, लेकिन हाईवे चौड़ीकरण के चलते ट्रामा सेंटर का काम रोकना पड़ा।
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इसके बाद वर्ष 2019 में सिंभावली ब्लॉक के गांव सिखैड़ा मुरादाबाद में 2150 मीटर भूमि का चयन कर प्रधान रिजवाना ने स्वास्थ्य विभाग के नाम आवंटित कर दी थी। लेकिन एनएचएआई से धनराशि न मिलने के चलते काम शुरू नहीं हो सका।
हाईवे चौड़ीकरण के लिए एनएचएआई और राज्य निगम के ठेकेदार द्वारा अल्लाबख्शपुर की भूमि अधिग्रहित करने के बाद 85 लाख रुपये की राशि जमा करा दी गई। धनराशि मिलने के बाद एक सितंबर 2020 को सिखैड़ा में ट्रामा सेंटर का निर्माण कार्य आरंभ करा दिया गया।
शासन से ट्रामा सेंटर के निर्माण के लिए 261.41 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत हो चुकी है। निर्माण शुरू हुए दो महीने बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक यहां सिर्फ नीव ही भरी जा सकी है। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि आखिर किस तरह फरवरी 2021 तक ट्रामा सेंटर का निर्माण हो सकेगा।
ट्रामा सेंटर बनने इन विशेषज्ञों की होगी आवश्यकता
फीजिशियन, एनेस्थेटिस्ट, सामान्य सर्जन, आर्थोपेडिक सर्जन, प्लास्टिक सर्जन, न्यूरो सर्जन, स्त्री रोग, बाल रोग, नेत्र रोग, हृदय रोड, दंत रोग, नाक-कान रोग, चर्म रोग विशेषज्ञ, कॉर्डियोलोजिस्ट, रेडियोलोजिस्ट, कास्ट टेक्नीशियन, एक्सरे व लैब टेक्नीशियन, वार्ड ब्वाय, स्वीपर, फार्मासिस्ट, नर्स स्टाफ, एबुंलेंस चालक सहित करीब पचास से अधिक विशेषज्ञों की आवश्यकता होगी।
घायलों को मिलेगा तुरंत उपचार
सड़क दुर्घटना में घायल मरीजों को ट्रामा सेंटर में जल्द इलाज मिलेगा। अभी तक जो भी घायल होता है उसे मेरठ मेडिकल में रेफर कर दिया जाता है। लेकिन ट्रामा सेंटर बनने के बाद यहां डॉक्टर, नर्स सहित कई कर्मचारी इस सेंटर में मौैजूद रहेगे। हाईवे पर इसके बिनने से घायलों को बेहतर चिकित्सा मुहैया कराई जाएगी। सेंटर के जरिये समय पर मरीजों को इलाज मिलेगा। इसके अलावा यहां पर सर्जन, एक्स-रे, सीटी स्कैन, एमआरआई आदि जांच की भी सुविधा मिलेगी।
कोट -
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. रेखा शर्मा ने बताया कि ट्रामा सेंटर निर्माण की जिम्मेदारी उप्र राजकीय निर्माण निगम मेरठ इकाई को है। यह संस्था निर्माण कार्य पूरा कर, ट्रामा सेंटर स्वास्थ्य विभाग को सौंपेगी।
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गढ़मुक्तेश्वर। ट्रामा सेंटर के निर्माण में देरी से सैकड़ों जिंदगियां बेहतर चिकित्सा के अभाव में हर साल दम तोड़ रही हैं। सपा शासनकाल में इस ट्रामा सेंटर का प्रस्ताव पास हो गया था। सिखैड़ा में जमीन का भी चयन हो गया। लेकिन सरकारी उदासीनता के कारण हर बार कोई न कोई अड़चन सामने आ जाती। हालांकि गत दो माह पहले कार्यदायी संस्था ने काम शुरू किया लेकिन अभी तक केवल ट्रामा सेंटर की नींव ही डाली जा सकी है जबकि फरवरी 2021 तक यह कार्य पूरा करने का लक्ष्य दिया गया है। ऐसे में समय पर काम पूरा होना मुश्किल दिखाई दे रहा है।
एनएच 09 को सबसे व्यस्तम हाईवे में गिना जाता है। जिसके चलते आए दिन सड़क हादसों के मामले सामने आते हैं।
बहुत से लोगों की मौत सिर्फ इसलिए हो जाती है, क्योंकि उन्हें समय से उपचार ही नहीं मिल पाता, जो मरीज प्राइवेट अस्पतालों में समय से पहुंच जाते हैं, उनकी जान बचा ली जाती है।
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जिले के सरकारी अस्पतालों में ऐसे गंभीर मरीजों को बचाने की सुविधाएं नगण्य है। वर्ष 2016 में सपा के शासन काल में तत्कालीन विधायक व पूर्व मंत्री मदन चौहान के प्रयास से गढ़ क्षेत्र के गांव अल्लाबख्शपुर में हाईवे किनारे भूमि का चयन कर ट्रामा सेंटर का निर्माण शुरू कराया गया था, लेकिन हाईवे चौड़ीकरण के चलते ट्रामा सेंटर का काम रोकना पड़ा।
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इसके बाद वर्ष 2019 में सिंभावली ब्लॉक के गांव सिखैड़ा मुरादाबाद में 2150 मीटर भूमि का चयन कर प्रधान रिजवाना ने स्वास्थ्य विभाग के नाम आवंटित कर दी थी। लेकिन एनएचएआई से धनराशि न मिलने के चलते काम शुरू नहीं हो सका।
हाईवे चौड़ीकरण के लिए एनएचएआई और राज्य निगम के ठेकेदार द्वारा अल्लाबख्शपुर की भूमि अधिग्रहित करने के बाद 85 लाख रुपये की राशि जमा करा दी गई। धनराशि मिलने के बाद एक सितंबर 2020 को सिखैड़ा में ट्रामा सेंटर का निर्माण कार्य आरंभ करा दिया गया।
शासन से ट्रामा सेंटर के निर्माण के लिए 261.41 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत हो चुकी है। निर्माण शुरू हुए दो महीने बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक यहां सिर्फ नीव ही भरी जा सकी है। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि आखिर किस तरह फरवरी 2021 तक ट्रामा सेंटर का निर्माण हो सकेगा।
ट्रामा सेंटर बनने इन विशेषज्ञों की होगी आवश्यकता
फीजिशियन, एनेस्थेटिस्ट, सामान्य सर्जन, आर्थोपेडिक सर्जन, प्लास्टिक सर्जन, न्यूरो सर्जन, स्त्री रोग, बाल रोग, नेत्र रोग, हृदय रोड, दंत रोग, नाक-कान रोग, चर्म रोग विशेषज्ञ, कॉर्डियोलोजिस्ट, रेडियोलोजिस्ट, कास्ट टेक्नीशियन, एक्सरे व लैब टेक्नीशियन, वार्ड ब्वाय, स्वीपर, फार्मासिस्ट, नर्स स्टाफ, एबुंलेंस चालक सहित करीब पचास से अधिक विशेषज्ञों की आवश्यकता होगी।
घायलों को मिलेगा तुरंत उपचार
सड़क दुर्घटना में घायल मरीजों को ट्रामा सेंटर में जल्द इलाज मिलेगा। अभी तक जो भी घायल होता है उसे मेरठ मेडिकल में रेफर कर दिया जाता है। लेकिन ट्रामा सेंटर बनने के बाद यहां डॉक्टर, नर्स सहित कई कर्मचारी इस सेंटर में मौैजूद रहेगे। हाईवे पर इसके बिनने से घायलों को बेहतर चिकित्सा मुहैया कराई जाएगी। सेंटर के जरिये समय पर मरीजों को इलाज मिलेगा। इसके अलावा यहां पर सर्जन, एक्स-रे, सीटी स्कैन, एमआरआई आदि जांच की भी सुविधा मिलेगी।
कोट -
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. रेखा शर्मा ने बताया कि ट्रामा सेंटर निर्माण की जिम्मेदारी उप्र राजकीय निर्माण निगम मेरठ इकाई को है। यह संस्था निर्माण कार्य पूरा कर, ट्रामा सेंटर स्वास्थ्य विभाग को सौंपेगी।