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हापुड़ मंडी में कच्ची पर्चियों पर धान उत्पादक किसानों से लाखों की लूट
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कच्ची पर्चियों पर धान उत्पादक किसानों से हो रही अवैध वसूली
हापुड़। मंडी में धान उत्पादक किसानों से कच्ची पर्चियों पर गलत तरीके से दो फीसदी आढ़त वसूली जा रही है। पक्के बिल उन्हें नहीं दिए जा रहे, दामों में भी हेराफेरी हो रही है। मंडी समिति के अधिकारियों की नाक के नीचे यह घपलेबाजी चल रही है, लेकिन उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। क्योंकि उन्हीं के संरक्षण से यह सब हो रहा है। इस मामले में अब भाकियू ने आगामी पंचायत मंडी में करने तथा अधिकारियों के घेराव का एलान किया है।
जिले में बड़े पैमाने पर धान की खेती की जाती है। इस बार कोरोना महामारी के चलते पहले ही धान के रेट अच्छे नहीं है। ऐसे में कुछ आढ़ती प्रतिदिन खुलने वाले दामों में भी हेराफेरी कर, किसानों से बहुत कम दाम पर धान खरीद रहे हैं।
बड़ी बात यह है कि किसानों को आढ़ती कच्ची पर्चियां दे रहे हैं, पक्के बिल नहीं दे रहे। कच्ची पर्चियों पर दो फीसदी आढ़त भी काटी जा रही है। जबकि प्रावधान यह है कि मंडी में माल बिक्री को पहुंचने वाले किसानों से कोई आढ़त नहीं ली जाती। बल्कि मंडी से जो माल की खरीद करते हैं, उन्हें आढ़त देनी पड़ती है।
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बहरहाल, मंडी समिति के अधिकारियों की नाक के नीचे यह खेल हो रहा है और अधिकारी अपने कार्यालयों से बाहर निकलना भी मुनासिब नहीं समझते। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि अधिकारियों के संरक्षण के बिना इस तरह का कार्य संभव नहीं है। कुल मिलाकर कच्ची पर्चियों पर यह खेल चल रहा है। पक्के बिल किसानों को इसलिए नहीं दिए जाते, क्योंकि इसमें उन्हें आढ़त नहीं मिलेगी।
भाकियू के पूर्व जिलाध्यक्ष धनवीर शास्त्री ने बताया कि प्रत्येक वर्ष मंडी में यही खेल चलता है और अधिकारी मूकदर्शक बन जाते हैं। आगामी पंचायत मंडी में ही होगी और अधिकारियों का घेराव होगा।
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हापुड़। मंडी में धान उत्पादक किसानों से कच्ची पर्चियों पर गलत तरीके से दो फीसदी आढ़त वसूली जा रही है। पक्के बिल उन्हें नहीं दिए जा रहे, दामों में भी हेराफेरी हो रही है। मंडी समिति के अधिकारियों की नाक के नीचे यह घपलेबाजी चल रही है, लेकिन उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। क्योंकि उन्हीं के संरक्षण से यह सब हो रहा है। इस मामले में अब भाकियू ने आगामी पंचायत मंडी में करने तथा अधिकारियों के घेराव का एलान किया है।
जिले में बड़े पैमाने पर धान की खेती की जाती है। इस बार कोरोना महामारी के चलते पहले ही धान के रेट अच्छे नहीं है। ऐसे में कुछ आढ़ती प्रतिदिन खुलने वाले दामों में भी हेराफेरी कर, किसानों से बहुत कम दाम पर धान खरीद रहे हैं।
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बड़ी बात यह है कि किसानों को आढ़ती कच्ची पर्चियां दे रहे हैं, पक्के बिल नहीं दे रहे। कच्ची पर्चियों पर दो फीसदी आढ़त भी काटी जा रही है। जबकि प्रावधान यह है कि मंडी में माल बिक्री को पहुंचने वाले किसानों से कोई आढ़त नहीं ली जाती। बल्कि मंडी से जो माल की खरीद करते हैं, उन्हें आढ़त देनी पड़ती है।
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बहरहाल, मंडी समिति के अधिकारियों की नाक के नीचे यह खेल हो रहा है और अधिकारी अपने कार्यालयों से बाहर निकलना भी मुनासिब नहीं समझते। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि अधिकारियों के संरक्षण के बिना इस तरह का कार्य संभव नहीं है। कुल मिलाकर कच्ची पर्चियों पर यह खेल चल रहा है। पक्के बिल किसानों को इसलिए नहीं दिए जाते, क्योंकि इसमें उन्हें आढ़त नहीं मिलेगी।
भाकियू के पूर्व जिलाध्यक्ष धनवीर शास्त्री ने बताया कि प्रत्येक वर्ष मंडी में यही खेल चलता है और अधिकारी मूकदर्शक बन जाते हैं। आगामी पंचायत मंडी में ही होगी और अधिकारियों का घेराव होगा।