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बार चुनाव: बिना सीओपी वाले अधिवक्ता नहीं कर पाएंगे वोट
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बार चुनाव : बिना सीओपी और फीस जमा कराने वाले अधिवक्ता नहीं कर पाएंगे वोट
हापुड़। हापुड़ बार एसोसिएशन के चुनाव में बिना सर्टिफिकेट ऑफ प्रेक्टिस (सीओपी) वाले अधिवक्ता वोटिंग नहीं कर पाएंगे। अधिवक्ताओं को चार सितंबर तक वार्षिक फीस जमा कराना भी अनिवार्य होगा।
हापुड़ बार एसोसिएशन के 11 सितंबर को होने वाले चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। बार सूत्रों की माने तो एक गुट से अध्यक्ष पद के लिए सुनील अग्रवाल, जबकि दूसरे गुट से सुशील शर्मा और सचिव पद पर एक गुट से अशोक गिरी, जबकि दूसरे गुट से खालिद खान ने सियासी जमीन पर बिसातें बिछानी शुरू कर दी हैं। वोटरों को जातिगत आधार पर भी नापा-तौला जा रहा है। जिससे चुनाव में जातिगत पासे फेंक कर सियासी ताज को हासिल किया जा सके।
उल्लेखनीय है कि पूर्व के चुनावों में करीब दस दिन पूर्व दावतों का दौर शुरू हो जाता था। सब कुछ छोड़ कर चुनावी चर्चाओं से कचहरी का तापमान भी हाई रहता था। हालांकि इस बार कोरोना महामारी के चलते ऐसा हो पाना प्रभावित हो रहा है। जबकि दावतों का दौर शुरू कराने के लिए दबाव बनाने का काम भी शुरू हो गया है।
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चुनाव अधिकारी वरिष्ठ अधिवक्ता चौधरी श्यामवीर सिंह ने बताया कि 11 सितंबर को बार चुनाव होना प्रस्तावित है। एल्डर कमेटी द्वारा चुनाव को लेकर वोट तैयार कराई जा रही है। जल्द ही उनको वोटरों की सूची प्राप्त हो जाएगी।
वहीं हापुड़ बार एसोसिएशन एल्डर कमेटी के पदाधिकारियों की बृहस्पतिवार को बैठक हुई। चेयरमैन एसडी शर्मा ने बताया कि अधिवक्ता वर्ष 2019-20 की वार्षिक फीस चार सितंबर तक कोषाध्यक्ष अधिवक्ता अजय सैनी के चैंबर पर जमा करा सकते हैं। उसके बाद फीस जमा कराने वाले अधिवक्ताओं को वोट डालने से वंचित रहना पड़ेगा। जिन अधिवक्ताओं के सीओपी हाल में प्राप्त हुए हैं। अधिवक्ता सीओपी नंबर सचिव संदीप त्यागी के पास जमा कराकर वोटर लिस्ट में अपना नाम जुड़वा सकते हैं।
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हापुड़। हापुड़ बार एसोसिएशन के चुनाव में बिना सर्टिफिकेट ऑफ प्रेक्टिस (सीओपी) वाले अधिवक्ता वोटिंग नहीं कर पाएंगे। अधिवक्ताओं को चार सितंबर तक वार्षिक फीस जमा कराना भी अनिवार्य होगा।
हापुड़ बार एसोसिएशन के 11 सितंबर को होने वाले चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। बार सूत्रों की माने तो एक गुट से अध्यक्ष पद के लिए सुनील अग्रवाल, जबकि दूसरे गुट से सुशील शर्मा और सचिव पद पर एक गुट से अशोक गिरी, जबकि दूसरे गुट से खालिद खान ने सियासी जमीन पर बिसातें बिछानी शुरू कर दी हैं। वोटरों को जातिगत आधार पर भी नापा-तौला जा रहा है। जिससे चुनाव में जातिगत पासे फेंक कर सियासी ताज को हासिल किया जा सके।
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उल्लेखनीय है कि पूर्व के चुनावों में करीब दस दिन पूर्व दावतों का दौर शुरू हो जाता था। सब कुछ छोड़ कर चुनावी चर्चाओं से कचहरी का तापमान भी हाई रहता था। हालांकि इस बार कोरोना महामारी के चलते ऐसा हो पाना प्रभावित हो रहा है। जबकि दावतों का दौर शुरू कराने के लिए दबाव बनाने का काम भी शुरू हो गया है।
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चुनाव अधिकारी वरिष्ठ अधिवक्ता चौधरी श्यामवीर सिंह ने बताया कि 11 सितंबर को बार चुनाव होना प्रस्तावित है। एल्डर कमेटी द्वारा चुनाव को लेकर वोट तैयार कराई जा रही है। जल्द ही उनको वोटरों की सूची प्राप्त हो जाएगी।
वहीं हापुड़ बार एसोसिएशन एल्डर कमेटी के पदाधिकारियों की बृहस्पतिवार को बैठक हुई। चेयरमैन एसडी शर्मा ने बताया कि अधिवक्ता वर्ष 2019-20 की वार्षिक फीस चार सितंबर तक कोषाध्यक्ष अधिवक्ता अजय सैनी के चैंबर पर जमा करा सकते हैं। उसके बाद फीस जमा कराने वाले अधिवक्ताओं को वोट डालने से वंचित रहना पड़ेगा। जिन अधिवक्ताओं के सीओपी हाल में प्राप्त हुए हैं। अधिवक्ता सीओपी नंबर सचिव संदीप त्यागी के पास जमा कराकर वोटर लिस्ट में अपना नाम जुड़वा सकते हैं।