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पांच करोड़ खर्च करने के बाद भी चालू नहीं हो सकी है एफसीआई रेलवे लाइन
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पांच करोड़ खर्च करने पर भी नहीं शरू हुई एफसीआई रेलवे लाइन
हापुड़। ट्रांसपोर्ट माफियों की साज के चलते भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) हापुड़ डिपो की रेलवे लाइन का ट्रायल फंसा हुआ है। पांच करोड़ खर्च करने के बाद भी एफसीआई डिपो रेलवे लाइन पर अभी तक भी मालगाड़ियां नहीं दौड़ सकी हैं। फिलहाल अभी भी रेलवे लाइन के चालू होने की कोई उम्मीद कम ही है।
वर्ष 1960 में एफसीआई डिपो हापुड़ के अंदर खाद्यान्न से लदी मालगाड़ियों के आवागमन के लिए छह लाइनें डाली गई थी। वर्ष 2010 के आसपास लाइनों की मियाद पूरी होने पर मालगाड़ियों का आवागमन बंद कर दिया गया। लेकिन पिछले कई वर्षों से फिर से रेलवे लाइन के अंदर लाइन डालने की योजना बनाई गई, इसके लिए पांच करोड़ का बजट जारी किया गया। हालांकि बजट जारी होने के बाद भी रेलवे लाइन डालने में कोई न कोई अड़चन आती रहती। लेकिन मई 2018 से डिपो के अंदर फिर से नई लाइनों को बिछाने का कार्य शुरू हो गया। लॉकडाउन से पहले छह लाइन बिछाने के कार्य पूरा हो गया लेकिन इस पर ट्रायल नहीं हो सका। ट्रायल न होने का असल कारण क्या है इस पर कोई अधिकारी बोलने को तैयार नहीं है। हालांकि इसमें ट्रांसपोर्ट माफियों की साज होने का अंदेशा लगाया जा रहा है। क्योंकि अभी तक एफसीआई से खाद्यान्न ट्रांसपोर्ट के माध्यम से ही भेजा जा रहा है। रेलवे लाइन चालू होने के बाद खाद्यान्न मालगाड़ियों से आएगा।
लोडिंग-अनलोडिंग का खर्च प्रभावित--
रेलवे डीपो बंद होने की वजह से मालगाड़ियों से आया खाद्यान्न गोदाम पर उतारा जाता है। इसके बाद खाद्यान्न लोड कर डिपो तक पहुंचाया जाता है। फिर जनपदों को खाद्यान्न की आपूर्ति होती है। इससे एफसीआई पर लोडिंग-अनलोडिंग का खर्च बढ़ जाता है। रेल लाइन शुरू होने से खर्च का ग्राफ नीचे गिरेगा।
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दिसंबर 2019 में होना था ट्रायल
एफसीआई रेलवे लाइन का ट्रायल मार्च 2019 में पूर्ण होना था, लेकिन ठेकेदार द्वारा कार्य छोड़ देने की वजह से कार्य प्रभावित हुआ। उसके बाद कार्य अन्य ठेकेदार को सौंपा गया। कार्य पूर्ण होने की समय सीमा दिसंबर 2019 थी। डीपो तक रेलवे लाइन डलने के कार्य तो पूरा हो गया लेकिन ट्रायल नहीं हो सका। जिसके चलते एफसीआई डिपो तक मालगाड़ी पहुंचने की योजना सफल नहीं हो सकी है।
कोट-
रेलवे के पीडब्ल्यूआई आवेश शर्मा ने बताया कि मार्च माह में लॉकडाउन और गाड़ी नहीं मिल पाने के कारण ट्रायल नहीं हो सका। एफसीआई से डिमांड मिलने और गाड़ी मिलने पर ट्रायल पूरा करा दिया जाएगा।
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हापुड़। ट्रांसपोर्ट माफियों की साज के चलते भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) हापुड़ डिपो की रेलवे लाइन का ट्रायल फंसा हुआ है। पांच करोड़ खर्च करने के बाद भी एफसीआई डिपो रेलवे लाइन पर अभी तक भी मालगाड़ियां नहीं दौड़ सकी हैं। फिलहाल अभी भी रेलवे लाइन के चालू होने की कोई उम्मीद कम ही है।
वर्ष 1960 में एफसीआई डिपो हापुड़ के अंदर खाद्यान्न से लदी मालगाड़ियों के आवागमन के लिए छह लाइनें डाली गई थी। वर्ष 2010 के आसपास लाइनों की मियाद पूरी होने पर मालगाड़ियों का आवागमन बंद कर दिया गया। लेकिन पिछले कई वर्षों से फिर से रेलवे लाइन के अंदर लाइन डालने की योजना बनाई गई, इसके लिए पांच करोड़ का बजट जारी किया गया। हालांकि बजट जारी होने के बाद भी रेलवे लाइन डालने में कोई न कोई अड़चन आती रहती। लेकिन मई 2018 से डिपो के अंदर फिर से नई लाइनों को बिछाने का कार्य शुरू हो गया। लॉकडाउन से पहले छह लाइन बिछाने के कार्य पूरा हो गया लेकिन इस पर ट्रायल नहीं हो सका। ट्रायल न होने का असल कारण क्या है इस पर कोई अधिकारी बोलने को तैयार नहीं है। हालांकि इसमें ट्रांसपोर्ट माफियों की साज होने का अंदेशा लगाया जा रहा है। क्योंकि अभी तक एफसीआई से खाद्यान्न ट्रांसपोर्ट के माध्यम से ही भेजा जा रहा है। रेलवे लाइन चालू होने के बाद खाद्यान्न मालगाड़ियों से आएगा।
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लोडिंग-अनलोडिंग का खर्च प्रभावित--
रेलवे डीपो बंद होने की वजह से मालगाड़ियों से आया खाद्यान्न गोदाम पर उतारा जाता है। इसके बाद खाद्यान्न लोड कर डिपो तक पहुंचाया जाता है। फिर जनपदों को खाद्यान्न की आपूर्ति होती है। इससे एफसीआई पर लोडिंग-अनलोडिंग का खर्च बढ़ जाता है। रेल लाइन शुरू होने से खर्च का ग्राफ नीचे गिरेगा।
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दिसंबर 2019 में होना था ट्रायल
एफसीआई रेलवे लाइन का ट्रायल मार्च 2019 में पूर्ण होना था, लेकिन ठेकेदार द्वारा कार्य छोड़ देने की वजह से कार्य प्रभावित हुआ। उसके बाद कार्य अन्य ठेकेदार को सौंपा गया। कार्य पूर्ण होने की समय सीमा दिसंबर 2019 थी। डीपो तक रेलवे लाइन डलने के कार्य तो पूरा हो गया लेकिन ट्रायल नहीं हो सका। जिसके चलते एफसीआई डिपो तक मालगाड़ी पहुंचने की योजना सफल नहीं हो सकी है।
कोट-
रेलवे के पीडब्ल्यूआई आवेश शर्मा ने बताया कि मार्च माह में लॉकडाउन और गाड़ी नहीं मिल पाने के कारण ट्रायल नहीं हो सका। एफसीआई से डिमांड मिलने और गाड़ी मिलने पर ट्रायल पूरा करा दिया जाएगा।