{"_id":"5e1378a18ebc3e881a476380","slug":"hapur-news-hapur-news-gbd19164512","type":"story","status":"publish","title_hn":"हापुड़ के जिला अस्पताल का आज लखनऊ में उठेगा मुद्दा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हापुड़ के जिला अस्पताल का आज लखनऊ में उठेगा मुद्दा
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जिला अस्पताल के निर्माण में देरी पर स्वास्थ्य राज्यमंत्री ने जताई नाराजगी
हापुड़। जिला अस्पताल के निर्माण की धीमी गति पर स्वास्थ्य राज्यमंत्री ने नाराजगी जताई है। वहीं इसका मुद्दा मंगलवार को लखनऊ में उठाने के अलावा कार्यदायी संस्था को तलब किया जाने की बात कही गई।
उल्लेखनीय है कि दस्तोई रोड पर करीब 35 करोड़ रुपये की लागत से वर्ष 2015 में 100 बैड के जिला अस्पताल का निर्माण शुरू कराया गया था। उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम लिमिटेड को इसके निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अस्पताल का निर्माण 29 फरवरी 2016 तक पूरा किया जाना था।
लेकिन चार साल बाद भी अस्पताल पूरी तरह तैयार नहीं है। जिसके चलते इसे स्वास्थ्य विभाग के हैंडओवर भी नहीं किया जा सका है। आलम यह है कि हापुड़ के जिला बनने के करीब दस साल बाद भी जिले की 13 लाख आबादी बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए तरस रही है। क्योंकि जिला अस्पताल में अभी सिर्फ ओपीडी ही चालू की जा सकी है।
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आश्चर्य की बात यह है कि सीएमओ द्वारा कई बार कार्यदायी संस्था से पत्राचार किया जा चुका है। लेकिन अस्पताल के अभी तक मानक पूरे नहीं किए गए हैं। यह मामला सोमवार को स्वास्थ्य राज्यमंत्री तक पहुंचा तो उन्होंने इसकी निंदा की। साथ ही कहा कि मंगलवार को वह इस मामले को लखनऊ में उठाएंगे। कार्यदायी संस्था को तलब किया जाएगा। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
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हापुड़। जिला अस्पताल के निर्माण की धीमी गति पर स्वास्थ्य राज्यमंत्री ने नाराजगी जताई है। वहीं इसका मुद्दा मंगलवार को लखनऊ में उठाने के अलावा कार्यदायी संस्था को तलब किया जाने की बात कही गई।
उल्लेखनीय है कि दस्तोई रोड पर करीब 35 करोड़ रुपये की लागत से वर्ष 2015 में 100 बैड के जिला अस्पताल का निर्माण शुरू कराया गया था। उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम लिमिटेड को इसके निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अस्पताल का निर्माण 29 फरवरी 2016 तक पूरा किया जाना था।
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लेकिन चार साल बाद भी अस्पताल पूरी तरह तैयार नहीं है। जिसके चलते इसे स्वास्थ्य विभाग के हैंडओवर भी नहीं किया जा सका है। आलम यह है कि हापुड़ के जिला बनने के करीब दस साल बाद भी जिले की 13 लाख आबादी बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए तरस रही है। क्योंकि जिला अस्पताल में अभी सिर्फ ओपीडी ही चालू की जा सकी है।
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आश्चर्य की बात यह है कि सीएमओ द्वारा कई बार कार्यदायी संस्था से पत्राचार किया जा चुका है। लेकिन अस्पताल के अभी तक मानक पूरे नहीं किए गए हैं। यह मामला सोमवार को स्वास्थ्य राज्यमंत्री तक पहुंचा तो उन्होंने इसकी निंदा की। साथ ही कहा कि मंगलवार को वह इस मामले को लखनऊ में उठाएंगे। कार्यदायी संस्था को तलब किया जाएगा। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।