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जिले में चाइल्डहेल्प लाइन सुचारु करने की कवायत शुरू

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 19 Jul 2019 12:15 AM IST
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hapur news
जिले में जल्द शुरू होगी चाइल्ड हेल्प लाइन
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हापुड़। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा देश के 400 जिलों में सुचारु हो चुकी चाइल्ड हेल्प लाइन 1098 अब हापुड़ में भी शुरू होने जा रही है। इसके लिए चाइल्ड लाइन इंडिया फाउंडेशन के अधिकारियों ने हापुड़ पहुंचकर संबंधित अधिकारियों और एनजीओ को प्रशिक्षण दिया। हेल्पलाइन को पूरे जिले में सुचारु करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गयी हैं।
घर से भागे, भटके, स्कूल या परिवार में भी किसी भी रूप से प्रताड़ित बच्चों को त्वरित राहत के लिए भारत सरकार द्वारा संचालित चाल्ड हेल्पलाइन 1098 की सुविधा से अभी तक हापुड़ जिला वंचित था। लेकिन चाइल्ड लाइन इंडिया फाउंडेशन नई दिल्ली द्वारा इसकी जिले में शुरूआत होने जा रही है। जिले में हेल्प लाइन को सुचारु करने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों के तालमेल के बाद दो दिन पहले दिल्ली से आए अधिकारियों ने इससे संबंधित अधिकारियों और एनजीओ को प्रशिक्षण दिया गया। जिले में इसकी शुरूआत के साथ हापुड़ रेलवे स्टेशन पर हेल्पलाइन सेंटर भी खोला जाएगा। जो ट्रेन में बैठकर आए बच्चों या किसी भी प्रकार से गुमशुदा बच्चों को 24 घंटे के अंदर उनके परिजनों से मिलाएगा। डिप्टी कलक्टर व प्रोबेशन अधिकारी विजय वर्धन तोमर ने बताया कि हेल्प लाइन को पूरी तरह से सुचारु होने में करीब दो माह का समय लगेगा।
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ये है चाइल्ड हेल्प लाइन -
लीगल प्रोवेशन अधिकारी डा. निशा रावत ने बताया कि चाइल्ड हेल्प लाइन 24 घंटे, मुफ्त आपातकालीन फोन सेवा है। 18 साल तक की उम्र के बच्चे युवक इस सेवाओं का उपयोग करने के लिए 1098 टोल फ्री नंबर डायल कर सकते हैं। यह केवल बच्चों की आपातकालीन जरूरतों के लिए ही प्रतिक्रिया नहीं बल्कि उन्हें उनके लिए दीर्घावधि देखभाल और पुनर्वास के लिए सेवाएं भी देती है।
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ऐसे काम करती है चाइल्ड हेल्प लाइन-
चाइल्ड हेल्प लाइन शहर में मोहल्ले और समाज के युवाओं, गैर लाभ संगठनों, संस्थाओं, और संबंधित व्यक्तियों के एक नेटवर्क के माध्यम से चलती है। प्रत्येक कॉल सेंटर में प्रशिक्षित युवाओं की एक टीम है, जो टेलीफोन लाइनों में 24 घंटे तैनात रहती है। कॉल प्राप्त करने के 60 मिनट के अंदर यह टीम मदद के लिए बच्चे के पास पहुंचती है। इसमें पुलिस स्टेशन, किशोर कल्याण बोर्ड या एक अस्पताल जाना भी शामिल हो सकता है। जब तक बच्चा संकट से गुजरता है तब तक उसकी नियमित रूप से सहायता की जाती है। इसके बाद बच्चे को लंबी अवधि पुनर्वास के लिए विकल्प प्रदान की जाती है।
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