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50 साल से तीन गांवों के सिजरे गायब

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 14 Oct 2022 10:39 PM IST
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गढ़ खादर क्षेत्र में सरकारी भूमि पर खड़ी फसल। - फोटो : GARH
50 साल से तीन गांवों का सिजरा गायब
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गढ़मुक्तेश्वर। गंगा खादर की हजारों बीघा बेशकीमती सरकारी भूमि में पट्टे की आड़ में कब्जा जमाने का खेल पिछले कई वर्षों से फल फूल रहा है। इसमें सैकड़ों हेक्टेयर भूमि वन विभाग की भी है। तीन गावों के सिजरे भी गायब हैं। इस कारण बाहरी लोगों ने भूमि पर कब्जा किया हुआ है।
गंगा नदी के तटीय क्षेत्र में ग्राम समाज की हजारों बीघा बेशकीमती जमीन है। इस पर कब्जा जमाने वाले लोग अरसे से ग्राम सभा स्तर से पट्टों का आवंटन कराकर रकम कमाने में जुटे हैं। दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा, मेरठ समेत विभिन्न स्थानों पर रहने वाले लोगों को स्थानीय निवासी दर्शाकर पट्टों का आवंटन कर दिया जाता है। जिला प्रशासन पिछले दस साल में सैकड़ों पट्टों को निरस्त कर चुका है, इसके बाद भी पट्टों का खेल बंद नहीं हो पा रहा है। नयागांव, रामपुर न्यामतपुर और लठीरा का भू-रिकॉर्ड (सिजरा) करीब पांच दशकों से गायब है। इस कारण पट्टे निरस्त होने के बाद भी भूमाफिया सरकारी जमीन पर काबिज हैं।
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कागजों की बिक्री का धंधा भी फल फूल रहा
अवैध मानकर निरस्त किए जा चुके पट्टों के कागजों की बिक्री का धंधा भी खूब फल फूल रहा है। भूमाफिया बाहरी लोगों को अपने जाल में फंसाकर इन पट्टों को किसानों की भूमि दिखाकर कागज बेच देते हैं। सैकड़ों लोग कागज लेकर तहसील के चक्कर काटते रहते हैं। लाख कवायद के बाद भी उन्हें कब्जे नहीं मिल पा रहे हैं।
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गड़बड़ी करने में अधिकारियों को भी काटनी पड़ी थी जेल
गढ़ खादर के नयागांव इनायतपुर के जंगल में वर्ष 1988 से लेकर 1993 तक बाहरी और अपात्र लोगों को साढ़े आठ सौ पट्टों का आवंटन किया गया था। डीएम संतोष यादव के निर्देशन में गाजियाबाद के तत्कालीन एडीएम एसबी तिवारी की जांच में इसका खुलासा हुआ था। इसके बाद तहसील प्रशासन ने कई आला अफसरों समेत 26 सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ गढ़ कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके बाद सर्वे नायब समेत कई आरोपियों को लंबे समय तक जेल की हवा खानी पड़ी थी।

तैयार हो रहा सिजरा
गांव शाकरपुर का सिजरा तैयार कर लिया गया है। शेष गांवों के सिजरे तैयार किए जा रहे हैं। स्टॉफ की कमी के कारण देरी हो रही है, जल्द ही सिजरे तैयार कर कार्रवाई शुरू की जाएगी।
- पंकज सक्सेना, एआरओ
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