{"_id":"62ded409cb823859081be916","slug":"hapur-news-garh-news-gbd242058860","type":"story","status":"publish","title_hn":"23 साल बाद भी शहीद सतपाल के गांव में गेट और सड़क का इंतजार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
23 साल बाद भी शहीद सतपाल के गांव में गेट और सड़क का इंतजार
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
23 साल बाद भी शहीद सतपाल के गांव में गेट और सड़क का इंतजार
कारगिल विजय दिवस
गढ़मुक्तेश्वर। कारगिल युद्ध में दुश्मन सेना से लोहा लेते हुए शहीद हुए लुहारी निवासी सतपाल की शहादत पर परिवार समेत गांव वालों का सीना आज भी गर्व से ऊंचा है। शहीद का परिवार कुछ दिन बाद ही मेरठ में जाकर रहने लगा था। बेटा निजी कंपनी में नौकरी कर रहा, बेटी ने भी बीकॉम कर लिया है। लेकिन गांव में शहीद के नाम पर गेट, सड़क का अभी भी इंतजार है।
पाकिस्तान के साथ वर्ष 1999 में कारगिल की पहाड़ियों में हुए युद्ध में देश के कई वीर सपूतों ने अपनी जान दी थी। जिनमें गढ़ क्षेत्र के गांव लुहारी का शहीद सतपाल भी शामिल था। 28 जून को पैतृक गांव में उनका 23वां बलिदान दिवस मनाया गया। सतपाल की शहादत पर उनकी पत्नी बबीता, बेटे पुलकित और बेटी दिव्या कुमारी समेत परिजनो और गांवों वालों को आज भी गर्व है। सतपाल की शहादत पर शासन स्तर से मेरठ में पेट्रोल पंप, क्षेत्र के गांव आलमगीरपुर में 18 बीघा कृषि भूमि का पट्टा और दस लाख रुपये की मदद मिली थी। पेट्रोल पंप की देखरेख और बच्चों की शिक्षा के लिए बबीता कुछ ही दिन बाद परिवार के साथ मेरठ जाकर रहने लगी थी। बेटा पुलकित वर्तमान में एमबीए कर मल्टीनेशनल कंपनी में कार्यरत है, वहीं बेटी दिव्या हिंदू कॉलेज में पढ़ाई कर रही है।
पूर्व जिला पंचायत सदस्य प्रियपाल चौधरी, कवि राजकुमार हिंदुस्तानी ने बताया कि शासन द्वारा शहीद सतपाल के नाम पर गांव में गेट और सड़क का नाम रखे जाने की घोषणा भी की गई थी, घोषणा को लंबा समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक इन दोनों में से एक भी कार्य नहीं हो सका है। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन
कारगिल विजय दिवस
गढ़मुक्तेश्वर। कारगिल युद्ध में दुश्मन सेना से लोहा लेते हुए शहीद हुए लुहारी निवासी सतपाल की शहादत पर परिवार समेत गांव वालों का सीना आज भी गर्व से ऊंचा है। शहीद का परिवार कुछ दिन बाद ही मेरठ में जाकर रहने लगा था। बेटा निजी कंपनी में नौकरी कर रहा, बेटी ने भी बीकॉम कर लिया है। लेकिन गांव में शहीद के नाम पर गेट, सड़क का अभी भी इंतजार है।
पाकिस्तान के साथ वर्ष 1999 में कारगिल की पहाड़ियों में हुए युद्ध में देश के कई वीर सपूतों ने अपनी जान दी थी। जिनमें गढ़ क्षेत्र के गांव लुहारी का शहीद सतपाल भी शामिल था। 28 जून को पैतृक गांव में उनका 23वां बलिदान दिवस मनाया गया। सतपाल की शहादत पर उनकी पत्नी बबीता, बेटे पुलकित और बेटी दिव्या कुमारी समेत परिजनो और गांवों वालों को आज भी गर्व है। सतपाल की शहादत पर शासन स्तर से मेरठ में पेट्रोल पंप, क्षेत्र के गांव आलमगीरपुर में 18 बीघा कृषि भूमि का पट्टा और दस लाख रुपये की मदद मिली थी। पेट्रोल पंप की देखरेख और बच्चों की शिक्षा के लिए बबीता कुछ ही दिन बाद परिवार के साथ मेरठ जाकर रहने लगी थी। बेटा पुलकित वर्तमान में एमबीए कर मल्टीनेशनल कंपनी में कार्यरत है, वहीं बेटी दिव्या हिंदू कॉलेज में पढ़ाई कर रही है।
विज्ञापन
पूर्व जिला पंचायत सदस्य प्रियपाल चौधरी, कवि राजकुमार हिंदुस्तानी ने बताया कि शासन द्वारा शहीद सतपाल के नाम पर गांव में गेट और सड़क का नाम रखे जाने की घोषणा भी की गई थी, घोषणा को लंबा समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक इन दोनों में से एक भी कार्य नहीं हो सका है। संवाद

शहीद सतपाल सिंह की पत्नी और दो बच्चे।- फोटो : GARH
विज्ञापन