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हाथी पर हुए सवार, फिर भी दूसरी बार मिली हार
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हाथी पर हुए सवार फिर भी दूसरी बार मिली हार
गढ़मुक्तेश्वर। पूर्व में तीन बार विधायक और मनोरंजन कर मंत्री रहे मदन चौहान 2022 में फिर से हार गए हैं। पूर्व मंत्री मदन चौहान ने टिकट न मिलने पर समाजवादी पार्टी को छोड़कर बसपा का दामन थामा, लेकिन जीत हासिल नहीं कर पाए।
पूर्व मंत्री मदन चौहान ने 2002 से 2012 के विधानसभा चुनावों में लगातार तीन बार विधायक बनकर पश्चिम उप्र के राजनैतिक मैदान में अच्छा पांव जमा लिया था। वह 2017 में भी समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़े थे, जिनको कुल 48810 मत मिले थे और वह तीसरे स्थान पर रहे। मतदान से करीब एक माह पहले पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने मदन का टिकट काटकर रविंद्र चौधरी को दे दिया। जिससे मायूस होकर पूर्व मंत्री अगले दिन बसपा में शामिल हो गए। बसपा से टिकट मिलते ही जोर-शोर से चुनाव मैदान में डट गए। इस बार फिर से मदन चौहान तीसरे स्थान पर रहे। इस बार पिछली बार से भी कम कुल 43715 वोट ही मिला। (संवाद)
सपा से टिकट कटते ही मुस्लिम वोट बैंक खिसका
मदन चौहान का जैसे ही सपा से टिकट कटा, सिर्फ एक दिन पुराने साथियों ने उनका साथ देने की औपचारिकता दिखाई। जो 15 साल तक मदन के साथ रहे, उन्होंने टिकट करते ही किनारा कर लिया और सपा प्रत्याशी रविंद्र चौधरी को चुनाव लड़ाने के लिए पहुंच गए। वहीं, अधिक संख्या में मुस्लिम वोट भी मदन को नहीं मिल पाया। जबकि इससे पहले मदन के बारे में कहा जाता था कि मुस्लिम समाज में उनकी व्यक्तिगत वोट काफी है, लेकिन वह भी उनके काम नहीं आई।
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गढ़मुक्तेश्वर। पूर्व में तीन बार विधायक और मनोरंजन कर मंत्री रहे मदन चौहान 2022 में फिर से हार गए हैं। पूर्व मंत्री मदन चौहान ने टिकट न मिलने पर समाजवादी पार्टी को छोड़कर बसपा का दामन थामा, लेकिन जीत हासिल नहीं कर पाए।
पूर्व मंत्री मदन चौहान ने 2002 से 2012 के विधानसभा चुनावों में लगातार तीन बार विधायक बनकर पश्चिम उप्र के राजनैतिक मैदान में अच्छा पांव जमा लिया था। वह 2017 में भी समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़े थे, जिनको कुल 48810 मत मिले थे और वह तीसरे स्थान पर रहे। मतदान से करीब एक माह पहले पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने मदन का टिकट काटकर रविंद्र चौधरी को दे दिया। जिससे मायूस होकर पूर्व मंत्री अगले दिन बसपा में शामिल हो गए। बसपा से टिकट मिलते ही जोर-शोर से चुनाव मैदान में डट गए। इस बार फिर से मदन चौहान तीसरे स्थान पर रहे। इस बार पिछली बार से भी कम कुल 43715 वोट ही मिला। (संवाद)
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सपा से टिकट कटते ही मुस्लिम वोट बैंक खिसका
मदन चौहान का जैसे ही सपा से टिकट कटा, सिर्फ एक दिन पुराने साथियों ने उनका साथ देने की औपचारिकता दिखाई। जो 15 साल तक मदन के साथ रहे, उन्होंने टिकट करते ही किनारा कर लिया और सपा प्रत्याशी रविंद्र चौधरी को चुनाव लड़ाने के लिए पहुंच गए। वहीं, अधिक संख्या में मुस्लिम वोट भी मदन को नहीं मिल पाया। जबकि इससे पहले मदन के बारे में कहा जाता था कि मुस्लिम समाज में उनकी व्यक्तिगत वोट काफी है, लेकिन वह भी उनके काम नहीं आई।
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