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हिंदी हर भारतवासी की पहचान, इसे दिलाएं अधिक पहचान
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रॉयल पब्लिक स्कूल में हिंदी कविता प्रतियोगिता में भाग लेते विद्यार्थी।
- फोटो : GARH
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हिंदी हर भारतवासी की पहचान, इसे दिलाएं अधिक पहचान
गढ़मुक्तेश्वर। गांव शरीफाबाद स्थित रॉयल पब्लिक स्कूल में हिंदी हैं हम अभियान के तहत कविता लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसमें छात्रों ने कविताओं के माध्यम से हिंदी को सम्मान दिया।
कविता लेखन प्रतियोगिता में कक्षा नौ से 12 तक के छात्रों ने प्रतिभाग किया। स्कूल प्रबंधक अवधेश चौहान, प्रधानाचार्य दीपक कुमार शर्मा, शिक्षिका छाया चौहान, तरुणा कौशिक निर्णायक मंडल की भूमिका में रहे। निर्णायक मंडल ने श्वेता चौहान को प्रथम, सृष्टि वत्स को द्वितीय और अनमोल त्यागी को तृतीय स्थान दिया। इस मौके पर प्रबंधक अवधेश चौहान ने कहा कि राजभाषा हिंदी को उसका खोया गौरव लौटने के लिए सभी लोगों को मिलकर प्रयास करने चाहिए। हिंदी बोलने, पढ़ने-लिखने में किसी भी तरह की झिझक नहीं होनी चाहिए। हमें गर्व है कि हम भारतीय विश्व की सबसे सरल और समृद्ध भाषा हिंदी से जुड़े हुए हैं।
क्या कहते हैं शिक्षक व छात्र
राष्ट्रभाषा का मिले दर्जा
संपूर्ण भारतवर्ष में सबसे अधिक लोग हिंदी भाषी हैं। हिंदी को अभी तक केवल राजभाषा का दर्जा प्राप्त है। भारत की मातृभाषा को राष्ट्रभाषा का दर्जा मिलना चाहिए। -दीपक कुमार शर्मा, प्रधानाचार्य
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हमारी पहचान है हिंदी
साहित्य और लेखन में हिंदी एक समृद्ध भाषा है। हिंदी हर भारतवासी की पहचान है। इसे और भी अधिक सम्मान दिलाने के लिए सभी को प्रयास करना चाहिए। - तरुणा कौशिक, शिक्षिका
हम सबका सम्मान हिंदी
हिंदी देश की शान और सबका सम्मान है। हमें हिंदी का इस्तेमाल करने में झिझक नहीं होनी चाहिए। अन्य भाषाओं का ज्ञान रखें, लेकिन हिंदी भाषी होने का अभिमान है। -श्वेता चौहान, छात्रा
एक दिन उत्सव मनाना गलत
हिंदी दिवस पर केवल एक दिन ही उत्सव मनाना गलत है। हिंदी दिवस पर हम अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेते हैं। हमारा प्रत्येक दिन हिंदी दिवस होना चाहिए। - सृष्टि वत्स, छात्रा
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गढ़मुक्तेश्वर। गांव शरीफाबाद स्थित रॉयल पब्लिक स्कूल में हिंदी हैं हम अभियान के तहत कविता लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसमें छात्रों ने कविताओं के माध्यम से हिंदी को सम्मान दिया।
कविता लेखन प्रतियोगिता में कक्षा नौ से 12 तक के छात्रों ने प्रतिभाग किया। स्कूल प्रबंधक अवधेश चौहान, प्रधानाचार्य दीपक कुमार शर्मा, शिक्षिका छाया चौहान, तरुणा कौशिक निर्णायक मंडल की भूमिका में रहे। निर्णायक मंडल ने श्वेता चौहान को प्रथम, सृष्टि वत्स को द्वितीय और अनमोल त्यागी को तृतीय स्थान दिया। इस मौके पर प्रबंधक अवधेश चौहान ने कहा कि राजभाषा हिंदी को उसका खोया गौरव लौटने के लिए सभी लोगों को मिलकर प्रयास करने चाहिए। हिंदी बोलने, पढ़ने-लिखने में किसी भी तरह की झिझक नहीं होनी चाहिए। हमें गर्व है कि हम भारतीय विश्व की सबसे सरल और समृद्ध भाषा हिंदी से जुड़े हुए हैं।
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क्या कहते हैं शिक्षक व छात्र
राष्ट्रभाषा का मिले दर्जा
संपूर्ण भारतवर्ष में सबसे अधिक लोग हिंदी भाषी हैं। हिंदी को अभी तक केवल राजभाषा का दर्जा प्राप्त है। भारत की मातृभाषा को राष्ट्रभाषा का दर्जा मिलना चाहिए। -दीपक कुमार शर्मा, प्रधानाचार्य
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हमारी पहचान है हिंदी
साहित्य और लेखन में हिंदी एक समृद्ध भाषा है। हिंदी हर भारतवासी की पहचान है। इसे और भी अधिक सम्मान दिलाने के लिए सभी को प्रयास करना चाहिए। - तरुणा कौशिक, शिक्षिका
हम सबका सम्मान हिंदी
हिंदी देश की शान और सबका सम्मान है। हमें हिंदी का इस्तेमाल करने में झिझक नहीं होनी चाहिए। अन्य भाषाओं का ज्ञान रखें, लेकिन हिंदी भाषी होने का अभिमान है। -श्वेता चौहान, छात्रा
एक दिन उत्सव मनाना गलत
हिंदी दिवस पर केवल एक दिन ही उत्सव मनाना गलत है। हिंदी दिवस पर हम अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेते हैं। हमारा प्रत्येक दिन हिंदी दिवस होना चाहिए। - सृष्टि वत्स, छात्रा