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गन्ने का सट्टा होगा ऑनलाइन, रकबा 5 फीसदी बढ़ने की उम्मीद
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गन्ने का सट्टा होगा ऑनलाइन, रकबा 5 फीसदी बढ़ने की उम्मीद
गढ़मुक्तेश्वर। गन्ना विकास परिषद द्वारा कराए जा रहे सर्वे के अनुसार पेराई सत्र 2021-22 में क्षेत्र में गन्ने का रकबा पांच प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है। वहीं किसानों को सट्टा प्रमाण पत्र ऑनलाइन कराना होगा, जिसके आधार पर ही उन्हें बांड जारी किया जाएगा। गत वर्ष में क्षेत्र में 26818 हेक्टेयर भूमि पर गन्ना उत्पादन किया गया था।
ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक अशोक कुमार यादव ने बताया कि क्षेत्र में गन्ना उत्पादन को लेकर गन्ना विभाग और शुगर मिल की संयुक्त टीमें किसानों के घर-घर जाकर गन्ना सट्टा सर्वे की सूची का प्रदर्शन कर रही हैं। जिसके आधार पर किसानों की आपत्तियों और शिकायतों का निस्तारण करते हुए गन्ने के रकबे का निर्धारण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सर्वेक्षण की शुरुआत में 12 गांवों का सैंपल सर्वे कराया गया है। जिसमे गत वर्ष के सापेक्ष पेड़ी गन्ना क्षेत्रफल में 16.04 प्रतिशत की कमी, जबकि पौधा गन्ना क्षेत्रफल में औसतन 17.92 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी पाई गई है।
किसानों को भरना होगा ऑललाइन घोषणा पत्र
ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक ने बताया कि इस वर्ष पहली बार विभाग द्वारा ऑनलाइन घोषणा पत्र भरने की व्यवस्था की गई है। जिसमें किसानों द्वारा गाटा संख्या के आधार पर गन्ना क्षेत्रफल व अन्य सूचनाएं भरी जाएंगी। घोषणा पत्र नहीं भरने वाले किसानों का आगामी पेराई सत्र में सट्टा संचालित नहीं किया जाएगा। गत वर्ष में क्षेत्र में गन्ने का रकबा 26818 हेक्टेयर था, जो इस वर्ष पांच प्रतिशत बढ़ने की संभावना है। उन्होंने बताया कि गन्ना समिति का नया सदस्य बनने के लिए 30 सितंबर तक का समय दिया गया है। वहीं गन्ने की उपज बढ़ाने के लिए 0238 प्रजाति को छोड़कर किसानों को उन्नत प्रजातियों की बुआई के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। जिसके लिए नई प्रजातियों के बीज भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
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गढ़मुक्तेश्वर। गन्ना विकास परिषद द्वारा कराए जा रहे सर्वे के अनुसार पेराई सत्र 2021-22 में क्षेत्र में गन्ने का रकबा पांच प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है। वहीं किसानों को सट्टा प्रमाण पत्र ऑनलाइन कराना होगा, जिसके आधार पर ही उन्हें बांड जारी किया जाएगा। गत वर्ष में क्षेत्र में 26818 हेक्टेयर भूमि पर गन्ना उत्पादन किया गया था।
ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक अशोक कुमार यादव ने बताया कि क्षेत्र में गन्ना उत्पादन को लेकर गन्ना विभाग और शुगर मिल की संयुक्त टीमें किसानों के घर-घर जाकर गन्ना सट्टा सर्वे की सूची का प्रदर्शन कर रही हैं। जिसके आधार पर किसानों की आपत्तियों और शिकायतों का निस्तारण करते हुए गन्ने के रकबे का निर्धारण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सर्वेक्षण की शुरुआत में 12 गांवों का सैंपल सर्वे कराया गया है। जिसमे गत वर्ष के सापेक्ष पेड़ी गन्ना क्षेत्रफल में 16.04 प्रतिशत की कमी, जबकि पौधा गन्ना क्षेत्रफल में औसतन 17.92 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी पाई गई है।
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किसानों को भरना होगा ऑललाइन घोषणा पत्र
ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक ने बताया कि इस वर्ष पहली बार विभाग द्वारा ऑनलाइन घोषणा पत्र भरने की व्यवस्था की गई है। जिसमें किसानों द्वारा गाटा संख्या के आधार पर गन्ना क्षेत्रफल व अन्य सूचनाएं भरी जाएंगी। घोषणा पत्र नहीं भरने वाले किसानों का आगामी पेराई सत्र में सट्टा संचालित नहीं किया जाएगा। गत वर्ष में क्षेत्र में गन्ने का रकबा 26818 हेक्टेयर था, जो इस वर्ष पांच प्रतिशत बढ़ने की संभावना है। उन्होंने बताया कि गन्ना समिति का नया सदस्य बनने के लिए 30 सितंबर तक का समय दिया गया है। वहीं गन्ने की उपज बढ़ाने के लिए 0238 प्रजाति को छोड़कर किसानों को उन्नत प्रजातियों की बुआई के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। जिसके लिए नई प्रजातियों के बीज भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
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