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शराब माफिया का नेटवर्क 50 साल में भी नहीं तोड़ पाई पुलिस
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शराब माफिया का नेटवर्क 50 साल में भी नहीं तोड़ पाई पुलिस
गढ़मुक्तेश्वर। गढ़ गंगा खादर में अवैध शराब बनाने का धंधा 50 साल पुराना है। यहां जंगलों और आसपास के गांवों में कच्ची शराब के इस काले कारोबार को चलाने वाले माफिया के नेटवर्क को पुलिस कभी नहीं तोड़ पाई। जब भी आसपास के जिलों में जहरीली शराब से मौतों की घटनाएं होती हैं तो माफिया पर शिकंजा कसने के बजाय पुलिस और आबकारी विभाग गंगा खादर में चल रही इक्का-दुक्का भट्ठियों पर कार्रवाई कर कुछ लोगों को जेल भेज देता है। जेल से जमानत पर छूटते ही यह फिर शराब के काले धंधे में उतर जाते हैं।
1970 के दशक में गढ़ जनपद मेरठ जिले में आता था। तब गढ़ क्षेत्र में सिर्फ एक ही पुलिस चौकी थी। खादर क्षेत्र का घने जंगल और सड़कों का अच्छा नेटवर्क न होने के चलते तब पुलिस का यहां पहुंच पाना काफी मुश्किल था। अगर कभी पुलिस पहुंच भी जाए तो यहां जंगल में छिपना भी आसान है। इसी के चलते शराब माफिया ने खादर क्षेत्र में कच्ची शराब की अवैध भट्ठियों का नेटवर्क खड़ा कर दिया। खादर के गांवों से ही माफिया को सस्ते में काम करने वाले मजदूर मिलने लगे और लोगों की जिंदगी में जहर घोलने वाला यह धंधा फलता-फूलता चला गया।
इन गांवों में हैं अवैध शराब की भट्ठियां
गढ़ सर्किल के गांव नयाबांस, गड़ावली, इनायतपुर, पलवाड़ा, पसवाड़ा, पूठ, शंकराटीला, भंगवतपुर, गांवडी, गड़ावली, शाहपुर, अब्दुल्लापुर, किरयावली, चक लठीरा, कल्याणवाली मढैय़ा, रेतो वाली, शेरा-कृष्णा वाली मढैया समेत कई गांवों में अवैध शराब बनाने की भट्ठियां चलती रही हैं।
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कार्रवाई कम, दिखावा ज्यादा
अवैध शराब की धरपकड़ के लिए आबकारी विभाग और पुलिस होली और कार्तिक पूर्णिमा मेले के आसपास विशेष अभियान चलाती है। कई बार पुलिस की सूचना पहले ही लीक हो जाती है। जो इक्का-दुक्का लोग पुलिस की गिरफ्त में आते हैं वह केस डायरी मजबूत न होने के चलते जमानत पर छूट जाते हैं।
आबकारी विभाग माफिया की लिस्ट ही बना पाया
आबकारी निरीक्षक सीमा कुमारी ने बताया कि गढ़ क्षेत्र में पदम, गौरव, अवतार सिंह चौहान, निरंजन, ताराचंद, रुपेश, सीताराम, विनोद, कैलाश, हरपाल, विपिन, मनोज, विजयपाल, बबलू, लटूर, कलवा, बंटी, नरेश, लोकेश, सुनीता, सविता, मंजीत, राजेश, चुन्नू, समेत दो दर्जन से अधिक लोगों को शराब माफिया की सूची में रखा गया है। इन सभी लोगों के खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत कई बार कार्रवाई की जा चुकी हैं।
जमानत पर छूटते ही फिर बनाते हैं कच्ची शराब
खादर क्षेत्र के गांवों में शिक्षा का अभाव होने के साथ ही रोजगार के साधन भी काफी कम हैं। जिसके चलते कई ऐसे लोग हैं, जो अवैध शराब बनाने और बेचने के धंधे से सालों से जुड़े हुए हैं। पकड़े जाने के बाद जमानत पर छूटते ही यह लोग दोबारा अपने काम में जुट जाते हैं।
महिलाएं भी शामिल
खादर क्षेत्र के कई गांवों में जहां जंगलों में पुरुष अवैध शराब बनाने का काम करते हैं, तो वहीं घरों पर महिलाएं इसे बेचने का काम करती हैं। घरों में विशेष स्थानों पर छिपा कर रखी गई अवैध शराब को महिलाएं धड़ल्ले से बेच रही हैं। आमदनी का अच्छा जरिया होने के चलते रुझान इस तरफ बढ़ रहा है।
छापे की सूचना हो जाती है लीक, चले जाते हैं गंगा पार
गंगा के इस पार जनपद अमरोहा क्षेत्र के कई गांव और उनके जंगल स्थित हैं। अवैध शराब से जुड़े लोग अधिकांश अमरोहा क्षेत्र के जंगल को शराब बनाने के लिए चुनते हैं, क्योंकि गढ़ सर्किल के क्षेत्र से बाहर होने के चलते पुलिस व आबकारी उधर कार्रवाई नहीं कर पाते और जनपद अमरोहा की पुलिस को सड़क के रास्ते पहुंचने के लिए घंटों का समय लगता है। पुलिस के छापों की सूचना भी इन लोगों को आमतौर पर पहले ही मिल जाती है।
केस मजबूत हो तो न मिले जमानत
अवैध शराब बनाने और बेचने के मामले में आबकारी अधिनियम के तहत मामूली धाराओं में रिपोर्ट दर्ज होती है, जिसका फायदा उठाकर ऐसे लोग जल्द जमानत पर छूट जाते है और दोबारा इसी काम में सक्रिय हो जाते हैं। अवैध शराब को लेकर ठोस कानून बनाया जाना चाहिए। -बलराज त्यागी, पूर्व अध्यक्ष, बार एसोसिएशन
आबकारी का दावा: लगातार करते हैं कार्रवाई
अवैध शराब कारोबारियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जाता है। वहीं गांवों में बैठक कर ग्रामीणों को अवैध शराब के खतरों के प्रति जागरूक भी किया जाता है। इन दिनों भी धरपकड़ की जा रही है। -सीमा कुमारी, आबकारी निरीक्षक
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गढ़मुक्तेश्वर। गढ़ गंगा खादर में अवैध शराब बनाने का धंधा 50 साल पुराना है। यहां जंगलों और आसपास के गांवों में कच्ची शराब के इस काले कारोबार को चलाने वाले माफिया के नेटवर्क को पुलिस कभी नहीं तोड़ पाई। जब भी आसपास के जिलों में जहरीली शराब से मौतों की घटनाएं होती हैं तो माफिया पर शिकंजा कसने के बजाय पुलिस और आबकारी विभाग गंगा खादर में चल रही इक्का-दुक्का भट्ठियों पर कार्रवाई कर कुछ लोगों को जेल भेज देता है। जेल से जमानत पर छूटते ही यह फिर शराब के काले धंधे में उतर जाते हैं।
1970 के दशक में गढ़ जनपद मेरठ जिले में आता था। तब गढ़ क्षेत्र में सिर्फ एक ही पुलिस चौकी थी। खादर क्षेत्र का घने जंगल और सड़कों का अच्छा नेटवर्क न होने के चलते तब पुलिस का यहां पहुंच पाना काफी मुश्किल था। अगर कभी पुलिस पहुंच भी जाए तो यहां जंगल में छिपना भी आसान है। इसी के चलते शराब माफिया ने खादर क्षेत्र में कच्ची शराब की अवैध भट्ठियों का नेटवर्क खड़ा कर दिया। खादर के गांवों से ही माफिया को सस्ते में काम करने वाले मजदूर मिलने लगे और लोगों की जिंदगी में जहर घोलने वाला यह धंधा फलता-फूलता चला गया।
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इन गांवों में हैं अवैध शराब की भट्ठियां
गढ़ सर्किल के गांव नयाबांस, गड़ावली, इनायतपुर, पलवाड़ा, पसवाड़ा, पूठ, शंकराटीला, भंगवतपुर, गांवडी, गड़ावली, शाहपुर, अब्दुल्लापुर, किरयावली, चक लठीरा, कल्याणवाली मढैय़ा, रेतो वाली, शेरा-कृष्णा वाली मढैया समेत कई गांवों में अवैध शराब बनाने की भट्ठियां चलती रही हैं।
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कार्रवाई कम, दिखावा ज्यादा
अवैध शराब की धरपकड़ के लिए आबकारी विभाग और पुलिस होली और कार्तिक पूर्णिमा मेले के आसपास विशेष अभियान चलाती है। कई बार पुलिस की सूचना पहले ही लीक हो जाती है। जो इक्का-दुक्का लोग पुलिस की गिरफ्त में आते हैं वह केस डायरी मजबूत न होने के चलते जमानत पर छूट जाते हैं।
आबकारी विभाग माफिया की लिस्ट ही बना पाया
आबकारी निरीक्षक सीमा कुमारी ने बताया कि गढ़ क्षेत्र में पदम, गौरव, अवतार सिंह चौहान, निरंजन, ताराचंद, रुपेश, सीताराम, विनोद, कैलाश, हरपाल, विपिन, मनोज, विजयपाल, बबलू, लटूर, कलवा, बंटी, नरेश, लोकेश, सुनीता, सविता, मंजीत, राजेश, चुन्नू, समेत दो दर्जन से अधिक लोगों को शराब माफिया की सूची में रखा गया है। इन सभी लोगों के खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत कई बार कार्रवाई की जा चुकी हैं।
जमानत पर छूटते ही फिर बनाते हैं कच्ची शराब
खादर क्षेत्र के गांवों में शिक्षा का अभाव होने के साथ ही रोजगार के साधन भी काफी कम हैं। जिसके चलते कई ऐसे लोग हैं, जो अवैध शराब बनाने और बेचने के धंधे से सालों से जुड़े हुए हैं। पकड़े जाने के बाद जमानत पर छूटते ही यह लोग दोबारा अपने काम में जुट जाते हैं।
महिलाएं भी शामिल
खादर क्षेत्र के कई गांवों में जहां जंगलों में पुरुष अवैध शराब बनाने का काम करते हैं, तो वहीं घरों पर महिलाएं इसे बेचने का काम करती हैं। घरों में विशेष स्थानों पर छिपा कर रखी गई अवैध शराब को महिलाएं धड़ल्ले से बेच रही हैं। आमदनी का अच्छा जरिया होने के चलते रुझान इस तरफ बढ़ रहा है।
छापे की सूचना हो जाती है लीक, चले जाते हैं गंगा पार
गंगा के इस पार जनपद अमरोहा क्षेत्र के कई गांव और उनके जंगल स्थित हैं। अवैध शराब से जुड़े लोग अधिकांश अमरोहा क्षेत्र के जंगल को शराब बनाने के लिए चुनते हैं, क्योंकि गढ़ सर्किल के क्षेत्र से बाहर होने के चलते पुलिस व आबकारी उधर कार्रवाई नहीं कर पाते और जनपद अमरोहा की पुलिस को सड़क के रास्ते पहुंचने के लिए घंटों का समय लगता है। पुलिस के छापों की सूचना भी इन लोगों को आमतौर पर पहले ही मिल जाती है।
केस मजबूत हो तो न मिले जमानत
अवैध शराब बनाने और बेचने के मामले में आबकारी अधिनियम के तहत मामूली धाराओं में रिपोर्ट दर्ज होती है, जिसका फायदा उठाकर ऐसे लोग जल्द जमानत पर छूट जाते है और दोबारा इसी काम में सक्रिय हो जाते हैं। अवैध शराब को लेकर ठोस कानून बनाया जाना चाहिए। -बलराज त्यागी, पूर्व अध्यक्ष, बार एसोसिएशन
आबकारी का दावा: लगातार करते हैं कार्रवाई
अवैध शराब कारोबारियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जाता है। वहीं गांवों में बैठक कर ग्रामीणों को अवैध शराब के खतरों के प्रति जागरूक भी किया जाता है। इन दिनों भी धरपकड़ की जा रही है। -सीमा कुमारी, आबकारी निरीक्षक