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ऑनलाइन ठगी : आरोपियों का नहीं लगता पता, न पीड़ितों को मिलते रुपये
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ऑनलाइन ठगी : आरोपियों का नहीं लगता पता, न पीड़ितों को मिलते रुपये
गढ़मुक्तेश्वर। जिले में साइबर क्राइम की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। हर दूसरे व तीसरे दिन कोई न कोई ऑनलाइन ठगी का शिकार हो रहा है। पिछले दो महीनों में ऑनलाइन ठगी के कई मामले सामने आ चुके हैं। लेकिन इनमें न तो अभी तक कोई आरोपी पकड़ा गया है और न ही ठगी का शिकार हुए लोगों को रुपये मिल पाए हैं।
इसी के चलते साइबर ठगी करने वालों के हौसले बुलंद हैं। साइबर ठग दूर बैठकर आसानी से ग्रामीण क्षेत्र में लोगों को अपनी बातों के जाल में फंसाकर उनका बैंक खाता खाली कर रहे हैं। ठगी करने के बाद आरोपियों का मोबाइल फोन स्विच ऑफ हो जाता है। वहीं पीड़ित को शिकायत दर्ज कराने में पापड़ बेलने पड़ते हैं। ठगी का शिकार हुए ज्यादातर लोगाें को आरोपियों ने बैंक अधिकारी बनकर फोन किया और उनके बैंक खातों की जानकारी लेकर चूना लगा दिया।
केस-1
गढ़ के आदर्श नगर निवासी अफजाल के एटीएम कार्ड के बारे में जानकारी करने के बाद दो जनवरी को आठ हजार रुपये साफ कर दिए थे, जिसके बाद पीड़ित ने ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई, लेकिन आज तक उसकी समस्या का कोई समाधान नहीं हो सका है।
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केस-2
गढ़ के दुर्गा कॉलोनी निवासी मोहित गुप्ता के मोबाइल पर तीन जनवरी को कॉल आया, फोनकर्ता ने पेमेंट लेनदेन की बात कहकर पेटीएम ऑन किया, इतने में ही मोहित के 18 हजार रुपये निकल गए। जिसके बाद पीड़ित ने साइबर क्राइम में पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई और कार्रवाई की मांग की है।
ऐसे भी ठग रहे हैं लोगों को
नौकरी लगवाने के नाम पर, सस्ता बैंक लोन दिलवाने, विदेशी रकम भेजने के नाम पर ठगी, बैंक अधिकारी बन एटीएम बंद होने की बात कहकर, फेसबुक मैसेंजर पर लिंक भेजकर, फेसबुक हैक कर दोस्तों से ठगी, फेसबुक पर दोस्ती कर, लोगों को उनका पुराना परिचित बता अपने आपको परेशानी में घिरा दिखाकर पेटीएम वॉलेट में डलवा लेते हैं नकदी, ऐनी डेस्क ऐप डाउनलोड करवाकर भी लोगों से ऑनलाइन ठगी की जा रही है।
इस तरह करते हैं फ्राड
- साइबर अपराधियों के पास लोगों के खाते में सेंध लगाने के लिए कई तरीके हैं। शातिर बैंक अधिकारी बनकर ग्राहकों को फोन करते हैं। इसके बाद उनसे एटीएम कार्ड नंबर, पिन पूछकर पैसे निकाल लेते है। इसके अलावा इन दिनों में अपराधियों ने आधार कार्ड का नंबर भी पूछना शुरू कर दिया है, जैसे ही ग्राहक आधार नंबर बताता है उनके खाते से ऑनलाइन पैसों का ट्रांसफर हो जाता है। वहीं तीसरा तरीका यह है कि अपराधी ग्राहकों के एटीएम का क्लोन तैयार कर दूसरा एटीएम करता है और पैसे की निकासी कर लेता है।
ठगी की रिपोर्ट दर्ज कराना भी चुनौती
- साइबर ठगी का शिकार हुए अधिकांश लोगों के लिए रिपोर्ट दर्ज कराना भी चुनौती है। साइबर क्राइम की रिपोर्ट के लिए हापुड़ में साइबर सेल बनी हुई है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र में कई लोग ठगी का शिकार होने के बाद भी रिपोर्ट नहीं दर्ज करा पाते हैं।
कोट
सीओ डॉ.तेजवीर सिंह ने बताया कि आनलाइन ठगी के शिकार होने वाले लोगों के लिए पुलिस विभाग ने साइबर सेल प्रत्येक जनपद में बनाया हुआ है, जिसमें फ्राड कॉल और आनलाइन ठगी करने वालों के खिलाफ शिकायतें दर्ज की जाती है, उसके बाद आगे की कार्रवाई में लोगों की समस्याओं का समाधान कराया जाता है। बताया कि साइबर अपराधों को सिर्फ लोगों को जागरूक कर रोका जा सकता है। लोगों को किसी ऐसे आदमी पर भरोसा नहीं करना चाहिए। जिससे आप मिले ही न हों। बैंकों को खातों के सत्यापन संबंधित नियम सख्त करने होंगे।
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गढ़मुक्तेश्वर। जिले में साइबर क्राइम की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। हर दूसरे व तीसरे दिन कोई न कोई ऑनलाइन ठगी का शिकार हो रहा है। पिछले दो महीनों में ऑनलाइन ठगी के कई मामले सामने आ चुके हैं। लेकिन इनमें न तो अभी तक कोई आरोपी पकड़ा गया है और न ही ठगी का शिकार हुए लोगों को रुपये मिल पाए हैं।
इसी के चलते साइबर ठगी करने वालों के हौसले बुलंद हैं। साइबर ठग दूर बैठकर आसानी से ग्रामीण क्षेत्र में लोगों को अपनी बातों के जाल में फंसाकर उनका बैंक खाता खाली कर रहे हैं। ठगी करने के बाद आरोपियों का मोबाइल फोन स्विच ऑफ हो जाता है। वहीं पीड़ित को शिकायत दर्ज कराने में पापड़ बेलने पड़ते हैं। ठगी का शिकार हुए ज्यादातर लोगाें को आरोपियों ने बैंक अधिकारी बनकर फोन किया और उनके बैंक खातों की जानकारी लेकर चूना लगा दिया।
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केस-1
गढ़ के आदर्श नगर निवासी अफजाल के एटीएम कार्ड के बारे में जानकारी करने के बाद दो जनवरी को आठ हजार रुपये साफ कर दिए थे, जिसके बाद पीड़ित ने ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई, लेकिन आज तक उसकी समस्या का कोई समाधान नहीं हो सका है।
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केस-2
गढ़ के दुर्गा कॉलोनी निवासी मोहित गुप्ता के मोबाइल पर तीन जनवरी को कॉल आया, फोनकर्ता ने पेमेंट लेनदेन की बात कहकर पेटीएम ऑन किया, इतने में ही मोहित के 18 हजार रुपये निकल गए। जिसके बाद पीड़ित ने साइबर क्राइम में पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई और कार्रवाई की मांग की है।
ऐसे भी ठग रहे हैं लोगों को
नौकरी लगवाने के नाम पर, सस्ता बैंक लोन दिलवाने, विदेशी रकम भेजने के नाम पर ठगी, बैंक अधिकारी बन एटीएम बंद होने की बात कहकर, फेसबुक मैसेंजर पर लिंक भेजकर, फेसबुक हैक कर दोस्तों से ठगी, फेसबुक पर दोस्ती कर, लोगों को उनका पुराना परिचित बता अपने आपको परेशानी में घिरा दिखाकर पेटीएम वॉलेट में डलवा लेते हैं नकदी, ऐनी डेस्क ऐप डाउनलोड करवाकर भी लोगों से ऑनलाइन ठगी की जा रही है।
इस तरह करते हैं फ्राड
- साइबर अपराधियों के पास लोगों के खाते में सेंध लगाने के लिए कई तरीके हैं। शातिर बैंक अधिकारी बनकर ग्राहकों को फोन करते हैं। इसके बाद उनसे एटीएम कार्ड नंबर, पिन पूछकर पैसे निकाल लेते है। इसके अलावा इन दिनों में अपराधियों ने आधार कार्ड का नंबर भी पूछना शुरू कर दिया है, जैसे ही ग्राहक आधार नंबर बताता है उनके खाते से ऑनलाइन पैसों का ट्रांसफर हो जाता है। वहीं तीसरा तरीका यह है कि अपराधी ग्राहकों के एटीएम का क्लोन तैयार कर दूसरा एटीएम करता है और पैसे की निकासी कर लेता है।
ठगी की रिपोर्ट दर्ज कराना भी चुनौती
- साइबर ठगी का शिकार हुए अधिकांश लोगों के लिए रिपोर्ट दर्ज कराना भी चुनौती है। साइबर क्राइम की रिपोर्ट के लिए हापुड़ में साइबर सेल बनी हुई है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र में कई लोग ठगी का शिकार होने के बाद भी रिपोर्ट नहीं दर्ज करा पाते हैं।
कोट
सीओ डॉ.तेजवीर सिंह ने बताया कि आनलाइन ठगी के शिकार होने वाले लोगों के लिए पुलिस विभाग ने साइबर सेल प्रत्येक जनपद में बनाया हुआ है, जिसमें फ्राड कॉल और आनलाइन ठगी करने वालों के खिलाफ शिकायतें दर्ज की जाती है, उसके बाद आगे की कार्रवाई में लोगों की समस्याओं का समाधान कराया जाता है। बताया कि साइबर अपराधों को सिर्फ लोगों को जागरूक कर रोका जा सकता है। लोगों को किसी ऐसे आदमी पर भरोसा नहीं करना चाहिए। जिससे आप मिले ही न हों। बैंकों को खातों के सत्यापन संबंधित नियम सख्त करने होंगे।