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अपराजिता बनना है तो रूढ़िवादिता त्यागकर आगे बढ़ें महिलाएं
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गढ़ के चौधरी महेंद्र सिंह डिग्री कॉलेज में आयोजित अपराजिता कार्यक्रम में मौजूद छात्राएं, शिक्षक
- फोटो : GARH
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अपराजिता बनना है तो रूढ़िवादिता त्यागकर आगे बढ़ें महिलाएं
गढ़मुक्तेश्वर। महिला सशक्तिकरण के लिए चल रहे अमर उजाला के अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के तहत गढ़ के महेंद्र सिंह डिग्री कॉलेज में कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इसमें वक्ताओं ने महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए शिक्षा को सबसे प्रमुख माध्यम बताया। वक्ताओं ने छात्राओं को महिलाओं के अधिकारों के बारे में जानकारी दी।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सीओ अशोक शुक्ल ने कहा कि छात्राएं किसी भी अप्रिय घटना पर चुप न रहें, बल्कि उसके खिलाफ आवाज उठाएं। अपराजिता बनना है तो रूढ़िवादिता को त्यागकर हिम्मत और हौसले के साथ आगे बढ़ें। उन्होंने छात्राओं को बताया कि पढ़ाई के साथ-साथ समाज के हितों से जुड़े कामों में भाग लें, जिससे उनका मानसिक विकास भी होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता करतेे हुए प्राचार्य डॉ. गजेंद्र सिंह ने कहा कि जिस घर में नारी का सम्मान होता है, उस घर में देवी-देवताओं का वास होता है। इसलिए हम सभी को अपनी सोच बदलनी होगी और महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठानी होगी।
फोटो 1
सीओ अशोक शुक्ल ने कहा कि अमर उजाला की यह पहल सराहनीय है। ग्रंथों में भी महिलाओं को पहला स्थान दिया है। जैसे सीता-राम, राधा-कृष्ण, गौरी-शंकर आदि। मुझे लगता है वैसे ही समाज में भी महिलाओं को पहला स्थान मिलना चाहिए।
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फोटो 2
कॉलेज ट्रस्टी चौधरी रेणुका सिंह ने कहा कि जो किसी से न हारे वह अपराजिता होती है। स्कूल-कॉलेजों में इस तरह की गोष्ठी कराकर विद्यार्थियों को इस महत्वपूर्ण विषय के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए। जिससे समाज में नई चेतना जगाई जा सकती है।
फोटो 3
कॉलेज निदेशक डॉ. विजयवीर सिंह ने कहा कि एक शिक्षित महिला कई परिवारों को शिक्षा से जोड़ने का काम करती है। महिला अपनी शक्ति को भूल चुकी है। वास्तव में नारी अबला नहीं है। जो मां-बाप अपनी बेटियों को बोझ समझते हैं उन्हें अपनी सोच बदलनी चाहिए। हमें जागरूक होना होगा।
फोटो 4
प्राचार्य डॉ. गजेंद्र सिंह ने कहा कि लोग महिलाओं को कमजोर समझते हैं पर यह नहीं जानते कि जिम्मेदारी का बोझ पड़ने पर बेटियां ऑटो रिक्शा से लेकर ट्रेन और प्लेन चलाने से भी पीछे नहीं हटतीं। हालांकि समाज में महिलाओं के प्रति नजरिया बदल रहा है।
फोटो 5
शिक्षिका अजिता चौधरी ने कहा कि सोच बदलो.. समाज बदलेगा, आज हर व्यक्ति को सोच बदलने की जरूरत है। महिलाएं अपने आपको कमजोर न समझें। ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है जहां महिलाएं प्रतिनिधित्व न कर रही हों।
फोटो 6
शिक्षिका प्ररेणा चौहान ने कहा कि झिझक छोड़ने से कम होंगे अपराध। महिलाओं और लड़कियों को अपनी समस्याएं बताने में झिझक छोड़नी होगी। इसके लिए डर को भी मन से दूर करना होगा, तभी महिलाओं के प्रति अपराधों में कमी आएगी।
फोटो 7
संचालक राजकुमार हिंदुस्तानी ने कहा कि घर से ही करें शुरुआत। महिलाओं के प्रति अपराध रोकने के लिए हमें अपने घरों से ही शुरुआत करनी होगी। बच्चों में संस्कार विकसित करने होंगे। शिक्षित बनकर सशक्त बनना होगा और अपने हक, सुरक्षा, सम्मान के प्रति जागरूक होना होगा।
फोटो 8
बीसीए की छात्रा डिंपल ने कहा कि बेटियां मजबूत तो देश मजबूत। समाज में बेटियों का सशक्त होना बेहद जरूरी है। बेटियों को हर क्षेत्र में आगे आना चाहिए। स्वस्थ और सशक्त नारी से ही सशक्त समाज बनता है। बेटियां मजबूत होंगी तो देश मजबूत होगा।
फोटो 9
बीकॉम की छात्रा संगीता ने कहा कि जितने अधिकार घर में बेटे को मिलते हैं इतने ही अधिकारी अगर बेटी को मिले तो देश में मिसाल बनेंगी बेटियां।
फोटो 10
बीबीए की छात्रा अलीना ने कहा कि लड़कियां किसी भी जुल्म या उत्पीड़न को चुप रहकर बर्दाश्त नहीं करें। इससे अपराधियों के हौसले बुलंद होते है। महिलाओं को खुलकर अत्याचार के खिलाफ मुखर होना होगा तभी महिलाएं सशक्त होंगी।
फोटो 13
बीएड की छात्रा प्रीति ने कहा कि कोमल है कमजोर नहीं तू, शक्ति का नाम ही नारी है। एक ओर महिलाएं जहां प्रेम का प्रतीक हैं, वहीं दूसरी ओर रानी लक्ष्मीबाई, द्रोपदी, झलकारी देवी भी हैं। इंदिरा गांधी, कल्पना चावला, किरण बेदी जैसी महिलाएं युवा वर्ग की रोल मॉडल होनी चाहिए।
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गढ़मुक्तेश्वर। महिला सशक्तिकरण के लिए चल रहे अमर उजाला के अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के तहत गढ़ के महेंद्र सिंह डिग्री कॉलेज में कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इसमें वक्ताओं ने महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए शिक्षा को सबसे प्रमुख माध्यम बताया। वक्ताओं ने छात्राओं को महिलाओं के अधिकारों के बारे में जानकारी दी।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सीओ अशोक शुक्ल ने कहा कि छात्राएं किसी भी अप्रिय घटना पर चुप न रहें, बल्कि उसके खिलाफ आवाज उठाएं। अपराजिता बनना है तो रूढ़िवादिता को त्यागकर हिम्मत और हौसले के साथ आगे बढ़ें। उन्होंने छात्राओं को बताया कि पढ़ाई के साथ-साथ समाज के हितों से जुड़े कामों में भाग लें, जिससे उनका मानसिक विकास भी होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता करतेे हुए प्राचार्य डॉ. गजेंद्र सिंह ने कहा कि जिस घर में नारी का सम्मान होता है, उस घर में देवी-देवताओं का वास होता है। इसलिए हम सभी को अपनी सोच बदलनी होगी और महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठानी होगी।
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सीओ अशोक शुक्ल ने कहा कि अमर उजाला की यह पहल सराहनीय है। ग्रंथों में भी महिलाओं को पहला स्थान दिया है। जैसे सीता-राम, राधा-कृष्ण, गौरी-शंकर आदि। मुझे लगता है वैसे ही समाज में भी महिलाओं को पहला स्थान मिलना चाहिए।
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कॉलेज ट्रस्टी चौधरी रेणुका सिंह ने कहा कि जो किसी से न हारे वह अपराजिता होती है। स्कूल-कॉलेजों में इस तरह की गोष्ठी कराकर विद्यार्थियों को इस महत्वपूर्ण विषय के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए। जिससे समाज में नई चेतना जगाई जा सकती है।
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कॉलेज निदेशक डॉ. विजयवीर सिंह ने कहा कि एक शिक्षित महिला कई परिवारों को शिक्षा से जोड़ने का काम करती है। महिला अपनी शक्ति को भूल चुकी है। वास्तव में नारी अबला नहीं है। जो मां-बाप अपनी बेटियों को बोझ समझते हैं उन्हें अपनी सोच बदलनी चाहिए। हमें जागरूक होना होगा।
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प्राचार्य डॉ. गजेंद्र सिंह ने कहा कि लोग महिलाओं को कमजोर समझते हैं पर यह नहीं जानते कि जिम्मेदारी का बोझ पड़ने पर बेटियां ऑटो रिक्शा से लेकर ट्रेन और प्लेन चलाने से भी पीछे नहीं हटतीं। हालांकि समाज में महिलाओं के प्रति नजरिया बदल रहा है।
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शिक्षिका अजिता चौधरी ने कहा कि सोच बदलो.. समाज बदलेगा, आज हर व्यक्ति को सोच बदलने की जरूरत है। महिलाएं अपने आपको कमजोर न समझें। ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है जहां महिलाएं प्रतिनिधित्व न कर रही हों।
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शिक्षिका प्ररेणा चौहान ने कहा कि झिझक छोड़ने से कम होंगे अपराध। महिलाओं और लड़कियों को अपनी समस्याएं बताने में झिझक छोड़नी होगी। इसके लिए डर को भी मन से दूर करना होगा, तभी महिलाओं के प्रति अपराधों में कमी आएगी।
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संचालक राजकुमार हिंदुस्तानी ने कहा कि घर से ही करें शुरुआत। महिलाओं के प्रति अपराध रोकने के लिए हमें अपने घरों से ही शुरुआत करनी होगी। बच्चों में संस्कार विकसित करने होंगे। शिक्षित बनकर सशक्त बनना होगा और अपने हक, सुरक्षा, सम्मान के प्रति जागरूक होना होगा।
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बीसीए की छात्रा डिंपल ने कहा कि बेटियां मजबूत तो देश मजबूत। समाज में बेटियों का सशक्त होना बेहद जरूरी है। बेटियों को हर क्षेत्र में आगे आना चाहिए। स्वस्थ और सशक्त नारी से ही सशक्त समाज बनता है। बेटियां मजबूत होंगी तो देश मजबूत होगा।
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बीकॉम की छात्रा संगीता ने कहा कि जितने अधिकार घर में बेटे को मिलते हैं इतने ही अधिकारी अगर बेटी को मिले तो देश में मिसाल बनेंगी बेटियां।
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बीबीए की छात्रा अलीना ने कहा कि लड़कियां किसी भी जुल्म या उत्पीड़न को चुप रहकर बर्दाश्त नहीं करें। इससे अपराधियों के हौसले बुलंद होते है। महिलाओं को खुलकर अत्याचार के खिलाफ मुखर होना होगा तभी महिलाएं सशक्त होंगी।
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बीएड की छात्रा प्रीति ने कहा कि कोमल है कमजोर नहीं तू, शक्ति का नाम ही नारी है। एक ओर महिलाएं जहां प्रेम का प्रतीक हैं, वहीं दूसरी ओर रानी लक्ष्मीबाई, द्रोपदी, झलकारी देवी भी हैं। इंदिरा गांधी, कल्पना चावला, किरण बेदी जैसी महिलाएं युवा वर्ग की रोल मॉडल होनी चाहिए।