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राजकीय इंटर कॉलेज में अव्यवस्था की भरमार
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राजकीय इंटर कॉलेज में अव्यवस्थाओं की भरमार
गढ़मुक्तेश्वर। सिंभावली क्षेत्र के गांव सिखैड़ा में 2.62 करोड़ की लागत से एक वर्ष पहले ही राजकीय इंटर कॉलेज तैयार हुआ था। लेकिन अव्यवस्थाओं के चलते यहां पढ़ने वाले छात्रों की जान पर बन गई है। एक वर्ष में ही दीवारों का प्लास्टर टूटकर गिरने लगा है। विभाग और शासन स्तर से अभी तक फर्नीचर की कोई व्यवस्था नहीं है, जिसेक कारण छात्र-छात्राएं फर्श पर बैठने को मजबूर हैं। कॉलेज परिसर में लगे हैंडपंप से दूषित पानी निकलता है, जिससे छात्र छात्राओं को पानी पीने के लिए बाहर जाना मजबूरी बनी हुई है। कनेक्शन न होने से बिजली फिटिंग भी महज शोपीस साबित हो रही है, जबकि रैन वाटर हार्वेसत्टिंग सिस्टम भी छत धंसने से सही ढंग में काम नहीं कर पा रहा है। जिसका पानी ओवर फ्लो होकर आसपास में भरने से कॉलेज बिल्डिंग को काफी नुकसान होने के साथ ही सीलन भी फैल रही है।
छात्राओं कोे लिए नहीं बना है शौचालय
स्कूलों में छात्राओं के लिए अलग से शौचालय के दावों को सिखैड़ा का राजकीय स्कूल झुठला रहा है। कॉलेज परिसर में छात्र-छात्राओं के लिए अलग से शौचालय नहीं बना है। जिसके चलते छात्राओं को मजबूरी में छात्रों के शौचालयों में जाना पड़ता है, जिसमें उन्हें काफी असुविधा का सामना करना पड़ता है। वहीं शौचालयों में पानी की उपयुक्त व्यवस्था भी नहीं है, जिसके चलते अपेक्षित स्तर पर साफ सफाई नहीं रहती है।
शिक्षकों की कमी शिक्षा की राह में आ रही आड़े
शिक्षा विभाग के मानकों के अनुसार राजकीय इंटर कॉलेज में प्रिंसिपल समेत 17 अध्यापक तैनात होने जरूरी हैं, लेकनि कॉलेज में अभी तक प्रिंसिपल समेत महज चार अध्यापक ही तैनात हैं। जिससे छात्र छात्राओं की पढ़ाई लिखाई भी प्रभावित हो रही है।
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प्रधानाचार्य ने डीआईओएस को भेजा पत्र
कॉलेज के प्रधानाचार्य सुनील कुमार ने डीआईओएस को पत्र भेजा है, जिसके माध्यम से राजकीय इंटर कॉलेज सिखैड़ा में व्याप्त खामियों को अध्यापक और छात्रों के हित में अविलंब दूर कराने की मांग की है।
कोट-
डीआईओएस निशा अस्थाना का कहना है कि जांच पड़ताल कराकर विभागीय स्तर से जुड़ीं खामियों को जल्द से जल्द दूर कराया जाएगा, जबकि अन्य समस्याओं को दूर कराने के लिए संबंधित ठेकेदार को निर्देशित कर दिया गया है।
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गढ़मुक्तेश्वर। सिंभावली क्षेत्र के गांव सिखैड़ा में 2.62 करोड़ की लागत से एक वर्ष पहले ही राजकीय इंटर कॉलेज तैयार हुआ था। लेकिन अव्यवस्थाओं के चलते यहां पढ़ने वाले छात्रों की जान पर बन गई है। एक वर्ष में ही दीवारों का प्लास्टर टूटकर गिरने लगा है। विभाग और शासन स्तर से अभी तक फर्नीचर की कोई व्यवस्था नहीं है, जिसेक कारण छात्र-छात्राएं फर्श पर बैठने को मजबूर हैं। कॉलेज परिसर में लगे हैंडपंप से दूषित पानी निकलता है, जिससे छात्र छात्राओं को पानी पीने के लिए बाहर जाना मजबूरी बनी हुई है। कनेक्शन न होने से बिजली फिटिंग भी महज शोपीस साबित हो रही है, जबकि रैन वाटर हार्वेसत्टिंग सिस्टम भी छत धंसने से सही ढंग में काम नहीं कर पा रहा है। जिसका पानी ओवर फ्लो होकर आसपास में भरने से कॉलेज बिल्डिंग को काफी नुकसान होने के साथ ही सीलन भी फैल रही है।
छात्राओं कोे लिए नहीं बना है शौचालय
स्कूलों में छात्राओं के लिए अलग से शौचालय के दावों को सिखैड़ा का राजकीय स्कूल झुठला रहा है। कॉलेज परिसर में छात्र-छात्राओं के लिए अलग से शौचालय नहीं बना है। जिसके चलते छात्राओं को मजबूरी में छात्रों के शौचालयों में जाना पड़ता है, जिसमें उन्हें काफी असुविधा का सामना करना पड़ता है। वहीं शौचालयों में पानी की उपयुक्त व्यवस्था भी नहीं है, जिसके चलते अपेक्षित स्तर पर साफ सफाई नहीं रहती है।
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शिक्षकों की कमी शिक्षा की राह में आ रही आड़े
शिक्षा विभाग के मानकों के अनुसार राजकीय इंटर कॉलेज में प्रिंसिपल समेत 17 अध्यापक तैनात होने जरूरी हैं, लेकनि कॉलेज में अभी तक प्रिंसिपल समेत महज चार अध्यापक ही तैनात हैं। जिससे छात्र छात्राओं की पढ़ाई लिखाई भी प्रभावित हो रही है।
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प्रधानाचार्य ने डीआईओएस को भेजा पत्र
कॉलेज के प्रधानाचार्य सुनील कुमार ने डीआईओएस को पत्र भेजा है, जिसके माध्यम से राजकीय इंटर कॉलेज सिखैड़ा में व्याप्त खामियों को अध्यापक और छात्रों के हित में अविलंब दूर कराने की मांग की है।
कोट-
डीआईओएस निशा अस्थाना का कहना है कि जांच पड़ताल कराकर विभागीय स्तर से जुड़ीं खामियों को जल्द से जल्द दूर कराया जाएगा, जबकि अन्य समस्याओं को दूर कराने के लिए संबंधित ठेकेदार को निर्देशित कर दिया गया है।