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निकाय चुनाव : हापुड़ और बाबूगढ़ एससी महिला के लिए आरक्षित
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हापुड़। शासन ने बृहस्पतिवार शाम नगर निकाय के अध्यक्ष पद का अनंतिम आरक्षण जारी कर दिया है। हापुड़ जिले की पिलखुवा और गढ़ नगर पालिका की सीटों पर बदलाव हुआ है। अब जिले में चार के बजाय दो सीटों पर महिलाओं की दावेदारी होगी। हापुड़ नगर पालिका अध्यक्ष पद की सीट अनुसूचित जाति महिला, पिलखुवा अनारक्षित, गढ़ नगर पालिका सीट अनुसूचित जाति व नगर पंचायत बाबूगढ़ अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित की गई। जिन सीटों पर आरक्षण में बदलाव हुआ है, वहां समीकरण बदल गए हैं।
जिले में तीन नगर पालिका हापुड़, गढ़मुक्तेश्वर और पिलखुवा व एक नगर पंचायत बाबूगढ़ शामिल हैं। चारों निकाय में चुनाव को लेकर दिसंबर माह में शासन ने आरक्षण जारी कर दिया गया था। लेकिन मामला सुप्रीम कोर्ट में जाने पर इस पर रोक लगा दी गई थी। जिसके बाद से लोग अध्यक्ष पद के आरक्षण का इंतजार कर रहे थे। बृहस्पतिवार शाम को शासन ने निकाय के अध्यक्ष पद का भी संशोधित आरक्षण जारी कर दिया।
शासन द्वारा जारी की गई सूची के अनुसार हापुड़ नगर पालिका व बाबूगढ़ नगर पंचायत अनुसूचित जाति महिला, गढ़मुक्तेश्वर अनुसूचित जाति और पिलखुवा नगर पालिका को अनराक्षित रखा गया है। जबकि इससे पहले पिलखुवा निकाय में पिछड़ा वर्ग जाति की महिला की सीट आरक्षित की गई थी। जबकि गढ़मुक्तेश्वर अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित की गई थी।
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पिलखुवा का चुनाव होगा दिलचस्प, गढ़ के भी समीकरण बदले
अध्यक्ष पद का नए सिरे से आरक्षण जारी होते ही कई ऐसे उम्मीदवार थे जो खुद के लिए राहत की उम्मीद जगाए बैठे थे, लेकिन बदलाव उनके मन मुताबिक न होने के कारण उनकी उम्मीदों को एक बार फिर धक्का लगा है। जबकि गढ़ और पिलखुवा में बदलाव होने से कुछ दावेदार जरूर खिल उठे हैं। पिलखुवा की सीट पिछड़ा वर्ग महिला से अनारक्षित होने पर यहां के सियासी समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। यहां चुनाव दिलचस्प होगा और कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा। गढ़ में भी अनुसूचित जाति महिला से अनुसूचित जाति होने पर कुछ समीकरणों में जरूर बदलाव हुआ है।
सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को लगा झटका
हापुड़ नगर पालिका की सीट वर्ष 2012 में भी अनुसूचित जाति महिला के पाले में गई थी। इसके बाद वर्ष 2017 में सीट सामान्य में पहुंच गई। दिसंबर में घोषित आरक्षण में इस सीट के अनुसूचित जाति महिला होने पर कई दावेदारों को झटका लगा था और नए सिरे से आरक्षण जारी होने के इंतजार में उन्हें उम्मीद थी कि उनके पक्ष में बदलाव हो जाएगा।
छह में से पांचवीं बार अनुसूचित जाति हुई सीट, नहीं हुआ बदलाव
नए सिरे से आरक्षण में भी हापुड़ नगर पालिका सीट में बदलाव नहीं हुआ। वर्ष 1995 से लेकर अब तक छह बार में से पांच बार हापुड़ नगर पालिका की सीट अनुसूचित जाति रही है। वर्ष 1995 में हापुड़ नगर पालिका की सीट अनुसूचित जाति महिला, वर्ष 2000 में अनुसूचित जाति, वर्ष 2006 में अनुसूचित जाति, वर्ष 2012 में अनुसूचित जाति महिला रही है। अब एक बार फिर से शासन ने इस सीट को अनुसूचित जाति महिला कर दिया है।
वर्ष 2012 में आरक्षण की स्थिति
निकाय का नाम
आरक्षण
हापुड़
अनुसूचित जाति महिला
गढ़मुक्तेश्वर अनुसूचित जाति महिला
पिलखुवा
अनुसूचित जाति
बाबूगढ़
अनुसूचित जाति महिला
वर्ष 2017 में आरक्षण की स्थिति
निकाय का नाम
आरक्षण
हापुड़
अनारक्षित
गढ़मुक्तेश्वर अनारक्षित
पिलखुवा
महिला
बाबूगढ़ अनारक्षित
छह अप्रैल तक दर्ज करा सकते हैं आपत्ति
शासन द्वारा जिले के निकायों के अध्यक्ष पदों की आरक्षण जारी कर दिए गए हैं। आरक्षण को लेकर यदि किसी को आपत्ति या दावे हैं तो वह छह अप्रैल तक दर्ज करा सकता है। - संदीप कुमार, एडीएम
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जिले में तीन नगर पालिका हापुड़, गढ़मुक्तेश्वर और पिलखुवा व एक नगर पंचायत बाबूगढ़ शामिल हैं। चारों निकाय में चुनाव को लेकर दिसंबर माह में शासन ने आरक्षण जारी कर दिया गया था। लेकिन मामला सुप्रीम कोर्ट में जाने पर इस पर रोक लगा दी गई थी। जिसके बाद से लोग अध्यक्ष पद के आरक्षण का इंतजार कर रहे थे। बृहस्पतिवार शाम को शासन ने निकाय के अध्यक्ष पद का भी संशोधित आरक्षण जारी कर दिया।
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शासन द्वारा जारी की गई सूची के अनुसार हापुड़ नगर पालिका व बाबूगढ़ नगर पंचायत अनुसूचित जाति महिला, गढ़मुक्तेश्वर अनुसूचित जाति और पिलखुवा नगर पालिका को अनराक्षित रखा गया है। जबकि इससे पहले पिलखुवा निकाय में पिछड़ा वर्ग जाति की महिला की सीट आरक्षित की गई थी। जबकि गढ़मुक्तेश्वर अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित की गई थी।
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पिलखुवा का चुनाव होगा दिलचस्प, गढ़ के भी समीकरण बदले
अध्यक्ष पद का नए सिरे से आरक्षण जारी होते ही कई ऐसे उम्मीदवार थे जो खुद के लिए राहत की उम्मीद जगाए बैठे थे, लेकिन बदलाव उनके मन मुताबिक न होने के कारण उनकी उम्मीदों को एक बार फिर धक्का लगा है। जबकि गढ़ और पिलखुवा में बदलाव होने से कुछ दावेदार जरूर खिल उठे हैं। पिलखुवा की सीट पिछड़ा वर्ग महिला से अनारक्षित होने पर यहां के सियासी समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। यहां चुनाव दिलचस्प होगा और कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा। गढ़ में भी अनुसूचित जाति महिला से अनुसूचित जाति होने पर कुछ समीकरणों में जरूर बदलाव हुआ है।
सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को लगा झटका
हापुड़ नगर पालिका की सीट वर्ष 2012 में भी अनुसूचित जाति महिला के पाले में गई थी। इसके बाद वर्ष 2017 में सीट सामान्य में पहुंच गई। दिसंबर में घोषित आरक्षण में इस सीट के अनुसूचित जाति महिला होने पर कई दावेदारों को झटका लगा था और नए सिरे से आरक्षण जारी होने के इंतजार में उन्हें उम्मीद थी कि उनके पक्ष में बदलाव हो जाएगा।
छह में से पांचवीं बार अनुसूचित जाति हुई सीट, नहीं हुआ बदलाव
नए सिरे से आरक्षण में भी हापुड़ नगर पालिका सीट में बदलाव नहीं हुआ। वर्ष 1995 से लेकर अब तक छह बार में से पांच बार हापुड़ नगर पालिका की सीट अनुसूचित जाति रही है। वर्ष 1995 में हापुड़ नगर पालिका की सीट अनुसूचित जाति महिला, वर्ष 2000 में अनुसूचित जाति, वर्ष 2006 में अनुसूचित जाति, वर्ष 2012 में अनुसूचित जाति महिला रही है। अब एक बार फिर से शासन ने इस सीट को अनुसूचित जाति महिला कर दिया है।
वर्ष 2012 में आरक्षण की स्थिति
निकाय का नाम
आरक्षण
हापुड़
अनुसूचित जाति महिला
गढ़मुक्तेश्वर अनुसूचित जाति महिला
पिलखुवा
अनुसूचित जाति
बाबूगढ़
अनुसूचित जाति महिला
वर्ष 2017 में आरक्षण की स्थिति
निकाय का नाम
आरक्षण
हापुड़
अनारक्षित
गढ़मुक्तेश्वर अनारक्षित
पिलखुवा
महिला
बाबूगढ़ अनारक्षित
छह अप्रैल तक दर्ज करा सकते हैं आपत्ति
शासन द्वारा जिले के निकायों के अध्यक्ष पदों की आरक्षण जारी कर दिए गए हैं। आरक्षण को लेकर यदि किसी को आपत्ति या दावे हैं तो वह छह अप्रैल तक दर्ज करा सकता है। - संदीप कुमार, एडीएम