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20 हजार 20 हजार क्विंटल भीगे धान को मिलों ने लेने से किया इनकार
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20 हजार क्विंटल भीगे धान को मिलों ने लेने से किया इनकार
हापुड़। बारिश में भीगे धान के मंडी में किसानों को खरीदार नहीं मिल रहे हैं। मंडी में आढ़तियों का किसानों से खरीदा गया करीब 20 हजार क्विंटल धान भीग गया, जिसे चावल मिलों ने लेने से इनकार कर दिया है। धूप नहीं खिलने से बोरियों में बंद धान के बर्बाद होने का खतरा है, किसानों के भी पैसे अटक गए हैं। सोमवार को कई किसान मंडी से मायूस लौटे, सिर्फ 50 क्विंटल धान की ही बिक्री हो सकी। ऐसे में आढ़ती भी अब नया धान खरीदने से बच रहे हैं।
हापुड़ की नवीन कृषि मंडी धान निर्यात का बड़ा हब है, प्रतिदिन सीजन में यहां 12 हजार से 15 हजार क्विंटल धान की बिक्री किसानों द्वारा की जाती है। लेकिन बीते चार दिनों से बरसात ने मंडी को सुना कर दिया है। खेतों में किसानों की फसल भीगकर बर्बाद हो रही है, ऐसे में आढ़ती भी नुकसान से अछूते नहीं रहे हैं।
चार दिन पहले मौसम साफ था, तब किसानों से धान खरीदकर आढ़तियों ने स्टॉक कर लिया था। जिसे पंजाब, हरियाणा भेजा जाना था। इसी बीच बरसात आ गई, ऐसे में आढ़तियों द्वारा खरीदी गई करीब 20 हजार क्विंटल धान बारिश में भीग गया। चावल मीलों ने इस धान को लेने से इंकार कर दिया। लगातार बरसात के चलते आढ़ती भीगे धान को सुखा भी नहीं पा रहे हैं, अब ऐसे धान के बर्बाद होने का खतरा बढ़ गया है।
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उधर आढ़तियों ने किसानों से अपने जोखिम पर ही धान मंडी लाने की बात कही है। इसमें यदि मौसम ने किसानों का साथ दिया तो उनकी धान बिक्री हो जाएगी। यदि बरसात में धान भीगी तो यह नुकसान किसान को ही झेलना होगा। आढ़ती ऐसे धान को लेने से इंकार कर देेंगे, यही कारण है कि सोमवार को महज 50 क्विंटल धान ही बिक्री के लिए पहुंचा, पूरा मंडी परिसर सुनसान पड़ा रहा।
खेतों में कटे पड़े धान को ज्यादा नुकसान
खेतों में जो धान कटा पड़ा है, उसमें सबसे ज्यादा नुकसान है। कई दिन से बादल छाए हैं, ऐसे में जमीन पर पड़े धान के उगने का खतरा है। जिसकी बिक्री करना मुश्किल होगा। क्योंकि उगने पर चावल का महत्व ही खत्म हो जाएगा।
मंडी में इस समय धान का दाम 3400 रुपये/क्विंटल चल रहा है, जिसमें वृद्धि की संभावना है। लेकिन लगातार बरसात के कारण चावल की गुणवत्ता खराब होने का खतरा है, जिसका दाम भी गिर सकता है।
किसान बाजार में भर दिया व्यापारियों ने अपना धान
किसानों को मंडी में एक अच्छा प्लेटफार्म देने के लिए किसान बाजार बनाया गया था। इसमें किसानों को महत्व आज तक नहीं दिया गया, हालांकि इन दिनों कुछ व्यापारियों ने इसमें कब्जा कर, अपना धान भर दिया है।
किसानों के साथ आढ़तियों को भारी नुकसान
बारिश से खेतों में धान की फसल तबाह हो गई है, आढ़तियों की हजारों बोरियां धान भीग गया। चावल मिलों ने इसे खरीदने से इंकार कर दिया है, आढ़ती अब नया धान खरीदने से फिलहाल बच रहे हैं, क्योंकि धान को बारिश से बचाने के मंडी में खास प्रबंध नहीं हैं।
नरेश त्यागी, अध्यक्ष आढ़ती संघ।
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हापुड़। बारिश में भीगे धान के मंडी में किसानों को खरीदार नहीं मिल रहे हैं। मंडी में आढ़तियों का किसानों से खरीदा गया करीब 20 हजार क्विंटल धान भीग गया, जिसे चावल मिलों ने लेने से इनकार कर दिया है। धूप नहीं खिलने से बोरियों में बंद धान के बर्बाद होने का खतरा है, किसानों के भी पैसे अटक गए हैं। सोमवार को कई किसान मंडी से मायूस लौटे, सिर्फ 50 क्विंटल धान की ही बिक्री हो सकी। ऐसे में आढ़ती भी अब नया धान खरीदने से बच रहे हैं।
हापुड़ की नवीन कृषि मंडी धान निर्यात का बड़ा हब है, प्रतिदिन सीजन में यहां 12 हजार से 15 हजार क्विंटल धान की बिक्री किसानों द्वारा की जाती है। लेकिन बीते चार दिनों से बरसात ने मंडी को सुना कर दिया है। खेतों में किसानों की फसल भीगकर बर्बाद हो रही है, ऐसे में आढ़ती भी नुकसान से अछूते नहीं रहे हैं।
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चार दिन पहले मौसम साफ था, तब किसानों से धान खरीदकर आढ़तियों ने स्टॉक कर लिया था। जिसे पंजाब, हरियाणा भेजा जाना था। इसी बीच बरसात आ गई, ऐसे में आढ़तियों द्वारा खरीदी गई करीब 20 हजार क्विंटल धान बारिश में भीग गया। चावल मीलों ने इस धान को लेने से इंकार कर दिया। लगातार बरसात के चलते आढ़ती भीगे धान को सुखा भी नहीं पा रहे हैं, अब ऐसे धान के बर्बाद होने का खतरा बढ़ गया है।
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उधर आढ़तियों ने किसानों से अपने जोखिम पर ही धान मंडी लाने की बात कही है। इसमें यदि मौसम ने किसानों का साथ दिया तो उनकी धान बिक्री हो जाएगी। यदि बरसात में धान भीगी तो यह नुकसान किसान को ही झेलना होगा। आढ़ती ऐसे धान को लेने से इंकार कर देेंगे, यही कारण है कि सोमवार को महज 50 क्विंटल धान ही बिक्री के लिए पहुंचा, पूरा मंडी परिसर सुनसान पड़ा रहा।
खेतों में कटे पड़े धान को ज्यादा नुकसान
खेतों में जो धान कटा पड़ा है, उसमें सबसे ज्यादा नुकसान है। कई दिन से बादल छाए हैं, ऐसे में जमीन पर पड़े धान के उगने का खतरा है। जिसकी बिक्री करना मुश्किल होगा। क्योंकि उगने पर चावल का महत्व ही खत्म हो जाएगा।
मंडी में इस समय धान का दाम 3400 रुपये/क्विंटल चल रहा है, जिसमें वृद्धि की संभावना है। लेकिन लगातार बरसात के कारण चावल की गुणवत्ता खराब होने का खतरा है, जिसका दाम भी गिर सकता है।
किसान बाजार में भर दिया व्यापारियों ने अपना धान
किसानों को मंडी में एक अच्छा प्लेटफार्म देने के लिए किसान बाजार बनाया गया था। इसमें किसानों को महत्व आज तक नहीं दिया गया, हालांकि इन दिनों कुछ व्यापारियों ने इसमें कब्जा कर, अपना धान भर दिया है।
किसानों के साथ आढ़तियों को भारी नुकसान
बारिश से खेतों में धान की फसल तबाह हो गई है, आढ़तियों की हजारों बोरियां धान भीग गया। चावल मिलों ने इसे खरीदने से इंकार कर दिया है, आढ़ती अब नया धान खरीदने से फिलहाल बच रहे हैं, क्योंकि धान को बारिश से बचाने के मंडी में खास प्रबंध नहीं हैं।
नरेश त्यागी, अध्यक्ष आढ़ती संघ।