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बारिश में भीगा धान, व्यापारियों को भारी नुकसान
सार
बारिश में भीगा धान, व्यापारियों को भारी नुकसानगढ़मुक्तेश्वर।वहीं खेतों में कटी हुई धान की फसल भी पानी भरने से बरबाद हो गई है।जिस जगह पर व्यापारी धान की खरीद फरोख्त कर रहे हैं, वहां पर चारों तरफ कीचड़ और जलभराव है, जिससे व्यापारियों के सामने भारी परेशानी बन गई है।
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विस्तार
बारिश में भीगा धान, व्यापारियों को भारी नुकसान
गढ़मुक्तेश्वर। रविवार को दूसरे दिन भी लगातार बारिश होने के कारण खुले आसमान के नीचे रखा आढ़तियों का हजारों क्विंटल धान पानी में भीग गया, जिससे करीब पांच करोड़ रुपये के धान के नष्ट होने की आशंका बनी हुई है। जिससे व्यापारियों को भारी नुकसान हो रहा है। वहीं खेतों में कटी हुई धान की फसल भी पानी भरने से बरबाद हो गई है। धान के अलावा सब्जी की फसल में भी भारी नुकसान है। आर्थिक तंगी से घिरे किसानों ने शासन से नष्ट हुई फसल का मुआवजा दिलाने की मांग की है।
मंडी शुल्क जमा करने के बावजूद भी गढ़ के आढ़तियों को उपकृषि मंडी में कोई पर्याप्त जगह नहीं मिल पा रही है। जिसके चलते मजबूरी में व्यापारी धान की खरीद फरोख्त खुले में रखकर कर रहे हैं। दो दिन से लगातार बारिश होने के कारण खुले आसमान के नीचे रखा हजारों क्विंटल धान पानी में डूबकर बेकार हो चुका है। जिससे व्यापारियों को भारी नुकसान हो रहा है। जिस जगह पर व्यापारी धान की खरीद फरोख्त कर रहे हैं, वहां पर चारों तरफ कीचड़ और जलभराव है, जिससे व्यापारियों के सामने भारी परेशानी बन गई है। वहीं खेतों में कटी और खड़ी फसल में भी भारी नुकसान है।
क्या बोले व्यापारी
दो दिन के भीतर व्यापारियों की हजारों क्विंटल धान भीगा है, जिसके चलते व्यापारी परेशान हैं। ऐसे में मंडी समिति के अधिकारियों को मंडी शुल्क नहीं वसूलना चाहिए। किसानों से खरीदा गया धान जमीन पर पड़ा है, जिसमें पानी भर गया है, जिससे धान काला होने लगा है। जो व्यापारियों के लिए एक बड़ी समस्या बनकर खड़ी हो गई है।- मूलचंद सिंघल, धान आढ़ती
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किसानों की मेहनत से उगाई फसल भी हुई बरबाद
लगातार बारिश के चलते खेतों में कटी हुई धान की फसल में भी जलभराव हो गया है। पानी में पड़े रहने से धान का दाना काला पड़ जाएगा, जिसके चलते मेहनत से उगाई गई फसल का उचित दाम नहीं मिलेगा। वहीं सब्जी की फसलों में भी भारी नुकसान है। इसके अलावा बारिश के चलते अगेती गेहूं और सरसों की बुआई भी लेट हो जाएगी। हजारों बीघा धान इस समय पानी में समाया हुआ है, जिससे किसानों की कड़ी मेहनत पूरी तरह से नष्ट होने की कगार पर आ गई है। शासन को किसानों की सुध लेकर मुआवजा देना चाहिए। - अजय त्यागी, किसान नेता
लेखपालों को भेजकर कराऐंगे सर्वे, 30 प्रतिशत से अधिक नुकसान पर मिलेगा मुआवजा
बारिश के चलते फसलों में काफी नुकसान हुआ है। लेखपालों को भेजकर खेतों में खड़ी और कटी हुई फसल का सर्वे कराया जाएगा। यदि नुकसान 30 प्रतिशत से अधिक है, तो किसानों को मुआवजा दिलाया जाएगा। - विवेक भदौरिया, तहसीलदार
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गढ़मुक्तेश्वर। रविवार को दूसरे दिन भी लगातार बारिश होने के कारण खुले आसमान के नीचे रखा आढ़तियों का हजारों क्विंटल धान पानी में भीग गया, जिससे करीब पांच करोड़ रुपये के धान के नष्ट होने की आशंका बनी हुई है। जिससे व्यापारियों को भारी नुकसान हो रहा है। वहीं खेतों में कटी हुई धान की फसल भी पानी भरने से बरबाद हो गई है। धान के अलावा सब्जी की फसल में भी भारी नुकसान है। आर्थिक तंगी से घिरे किसानों ने शासन से नष्ट हुई फसल का मुआवजा दिलाने की मांग की है।
मंडी शुल्क जमा करने के बावजूद भी गढ़ के आढ़तियों को उपकृषि मंडी में कोई पर्याप्त जगह नहीं मिल पा रही है। जिसके चलते मजबूरी में व्यापारी धान की खरीद फरोख्त खुले में रखकर कर रहे हैं। दो दिन से लगातार बारिश होने के कारण खुले आसमान के नीचे रखा हजारों क्विंटल धान पानी में डूबकर बेकार हो चुका है। जिससे व्यापारियों को भारी नुकसान हो रहा है। जिस जगह पर व्यापारी धान की खरीद फरोख्त कर रहे हैं, वहां पर चारों तरफ कीचड़ और जलभराव है, जिससे व्यापारियों के सामने भारी परेशानी बन गई है। वहीं खेतों में कटी और खड़ी फसल में भी भारी नुकसान है।
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क्या बोले व्यापारी
दो दिन के भीतर व्यापारियों की हजारों क्विंटल धान भीगा है, जिसके चलते व्यापारी परेशान हैं। ऐसे में मंडी समिति के अधिकारियों को मंडी शुल्क नहीं वसूलना चाहिए। किसानों से खरीदा गया धान जमीन पर पड़ा है, जिसमें पानी भर गया है, जिससे धान काला होने लगा है। जो व्यापारियों के लिए एक बड़ी समस्या बनकर खड़ी हो गई है।- मूलचंद सिंघल, धान आढ़ती
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किसानों की मेहनत से उगाई फसल भी हुई बरबाद
लगातार बारिश के चलते खेतों में कटी हुई धान की फसल में भी जलभराव हो गया है। पानी में पड़े रहने से धान का दाना काला पड़ जाएगा, जिसके चलते मेहनत से उगाई गई फसल का उचित दाम नहीं मिलेगा। वहीं सब्जी की फसलों में भी भारी नुकसान है। इसके अलावा बारिश के चलते अगेती गेहूं और सरसों की बुआई भी लेट हो जाएगी। हजारों बीघा धान इस समय पानी में समाया हुआ है, जिससे किसानों की कड़ी मेहनत पूरी तरह से नष्ट होने की कगार पर आ गई है। शासन को किसानों की सुध लेकर मुआवजा देना चाहिए। - अजय त्यागी, किसान नेता
लेखपालों को भेजकर कराऐंगे सर्वे, 30 प्रतिशत से अधिक नुकसान पर मिलेगा मुआवजा
बारिश के चलते फसलों में काफी नुकसान हुआ है। लेखपालों को भेजकर खेतों में खड़ी और कटी हुई फसल का सर्वे कराया जाएगा। यदि नुकसान 30 प्रतिशत से अधिक है, तो किसानों को मुआवजा दिलाया जाएगा। - विवेक भदौरिया, तहसीलदार