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Hapur News: कहने को गांव की महिला प्रधान, पतिदेव कर रहे सारे काम
Thu, 30 Nov 2023 10:17 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
Updated Thu, 30 Nov 2023 10:17 PM IST
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हापुड़। जिले की 273 ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रधान चुनी गईं महिलाओं की शक्ति महज उनके नाम तक ही सीमित है, महिला सशक्तिकरण अभियान का असर भी जिले में धरातल पर दिखाई नहीं दे रहा है। आरक्षण की मजबूरी ने महिलाओं को ग्राम प्रधान तो बना दिया है, लेकिन असली प्रधान तो उनके पति ही सब काम कर रहे हैं। हालांकि प्रशासनिक सख्ती से कुछ सुधार भी जरूर हुए हैं और बैठकों से प्रधानों और सभासद पतियों की उपस्थिति पर लगाम लगी है। लेकिन अभी और प्रयास जरूरी हैं।
जिले में कुल ग्राम पंचायतों की संख्या 273 है। पंचायत चुनावों में 150 सीटों पर महिलाओं ने जीत दर्ज की। कुल ग्राम प्रधानों में आधे से अधिक महिलाएं हैं। जिन गांवों की ग्राम प्रधान महिलाएं हैं, वहां ग्राम प्रधान का पूरा काम उनके पति, पुत्र, देवर, ससुर या प्रतिनिधि देखते हैं। चुनाव जीतने के बाद इनकी मुहर, डोंगल व पंचायतों से जुड़े अभिलेख भी प्रतिनिधि ही संभालते हैं।
अधिकांश गांवों में प्रधान के बजाए लोग उनको ही ग्राम प्रधान कहते हैं और समझते हैं। महिला ग्राम प्रधानों के अलावा अनुसूचित जाति व पिछड़ी जाति के अधिकांश ग्राम प्रधानों को भी अपने प्रतिनिधि के पीछे चलना पड़ता है। कई गांवों में तो अपनी प्रतिष्ठा लगाकर अपने खास को प्रधान बनाने वाले मांगने पर भी उन्हें मुहर, डोंगल व पंचायत से जुड़े महत्वपूर्ण अभिलेख नहीं देते। ग्राम प्रधान के प्रतिनिधि इस कदर दबंगई पर आमादा रहते हैं कि वे उन बैठकों में भी शामिल होते हैं, जहां प्रत्येक दशा में जनप्रतिनिधि का होना आवश्यक होता है। बैठक के एजेंडे पर भी प्रतिनिधि ही प्रधान के हस्ताक्षर कर देते हैं। कई गांवों में तो ग्राम प्रधान के बजाय बैंकों में ग्राम प्रधान का हस्ताक्षर तक प्रतिनिधि करते हैं।
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हाईकोर्ट ने भी जताई नाराजगी
इस संबंध में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ग्रामसभा के कार्य में प्रधान जनप्रतिनिधि के हस्तक्षेप पर नाराजगी जताते हुए राज्य निर्वाचन आयोग को महिला ग्राम प्रधान प्रत्याशियों से नामांकन के समय हलफनाना लेने और साथ ही प्रधान के कार्य में किसी का हस्तक्षेप न करने के आदेश दिए।
नगर पालिका में 15 महिला सभासद-
नगर पालिका हापुड़ में पुष्पा सिंह पालिकाध्यक्ष हैं, जबकि 41 वार्डों में से 15 वार्डों में महिला सभासद हैं। हापुड़ की बात करें तो पालिका में पुष्पा सिंह भले ही अग्रणी भूमिका में हों, लेकिन उनके पति श्रीपाल अभी भी जनसंपर्क में आगे हैं। निकाय चुनाव में जीत के बाद पालिकाध्यक्ष पुष्पा सिंह से अधिक उनके पति श्रीपाल सिंह का जगह-जगह स्वागत हुआ और वही लोगों के संपर्क में रहते हैं। नगर के अधिकतर वार्डों में महिला सभासद की जगह उनके पति वार्डों में होने वाले कार्यों की देखरेख करते हैं और लोगों की समस्याएं सुनते हैं।
कोट -
जनता द्वारा चुनकर आई महिला प्रधानों के अधिकारों की रक्षा के लिए जिला प्रशासन कटिबद्ध है। महिला प्रधान जिले में अग्रणी भूमिका में हैंं। कार्यालयों को भी निर्देश दिए गए हैं, कि महिला प्रधानों की भूमिका में उनके पतियों को किसी प्रकार की तव्वजों न दी जाए।- प्रेरणा सिंह, सीडीओ।
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जिले में कुल ग्राम पंचायतों की संख्या 273 है। पंचायत चुनावों में 150 सीटों पर महिलाओं ने जीत दर्ज की। कुल ग्राम प्रधानों में आधे से अधिक महिलाएं हैं। जिन गांवों की ग्राम प्रधान महिलाएं हैं, वहां ग्राम प्रधान का पूरा काम उनके पति, पुत्र, देवर, ससुर या प्रतिनिधि देखते हैं। चुनाव जीतने के बाद इनकी मुहर, डोंगल व पंचायतों से जुड़े अभिलेख भी प्रतिनिधि ही संभालते हैं।
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अधिकांश गांवों में प्रधान के बजाए लोग उनको ही ग्राम प्रधान कहते हैं और समझते हैं। महिला ग्राम प्रधानों के अलावा अनुसूचित जाति व पिछड़ी जाति के अधिकांश ग्राम प्रधानों को भी अपने प्रतिनिधि के पीछे चलना पड़ता है। कई गांवों में तो अपनी प्रतिष्ठा लगाकर अपने खास को प्रधान बनाने वाले मांगने पर भी उन्हें मुहर, डोंगल व पंचायत से जुड़े महत्वपूर्ण अभिलेख नहीं देते। ग्राम प्रधान के प्रतिनिधि इस कदर दबंगई पर आमादा रहते हैं कि वे उन बैठकों में भी शामिल होते हैं, जहां प्रत्येक दशा में जनप्रतिनिधि का होना आवश्यक होता है। बैठक के एजेंडे पर भी प्रतिनिधि ही प्रधान के हस्ताक्षर कर देते हैं। कई गांवों में तो ग्राम प्रधान के बजाय बैंकों में ग्राम प्रधान का हस्ताक्षर तक प्रतिनिधि करते हैं।
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हाईकोर्ट ने भी जताई नाराजगी
इस संबंध में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ग्रामसभा के कार्य में प्रधान जनप्रतिनिधि के हस्तक्षेप पर नाराजगी जताते हुए राज्य निर्वाचन आयोग को महिला ग्राम प्रधान प्रत्याशियों से नामांकन के समय हलफनाना लेने और साथ ही प्रधान के कार्य में किसी का हस्तक्षेप न करने के आदेश दिए।
नगर पालिका में 15 महिला सभासद-
नगर पालिका हापुड़ में पुष्पा सिंह पालिकाध्यक्ष हैं, जबकि 41 वार्डों में से 15 वार्डों में महिला सभासद हैं। हापुड़ की बात करें तो पालिका में पुष्पा सिंह भले ही अग्रणी भूमिका में हों, लेकिन उनके पति श्रीपाल अभी भी जनसंपर्क में आगे हैं। निकाय चुनाव में जीत के बाद पालिकाध्यक्ष पुष्पा सिंह से अधिक उनके पति श्रीपाल सिंह का जगह-जगह स्वागत हुआ और वही लोगों के संपर्क में रहते हैं। नगर के अधिकतर वार्डों में महिला सभासद की जगह उनके पति वार्डों में होने वाले कार्यों की देखरेख करते हैं और लोगों की समस्याएं सुनते हैं।
कोट -
जनता द्वारा चुनकर आई महिला प्रधानों के अधिकारों की रक्षा के लिए जिला प्रशासन कटिबद्ध है। महिला प्रधान जिले में अग्रणी भूमिका में हैंं। कार्यालयों को भी निर्देश दिए गए हैं, कि महिला प्रधानों की भूमिका में उनके पतियों को किसी प्रकार की तव्वजों न दी जाए।- प्रेरणा सिंह, सीडीओ।