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Hapur News: गंगा जलस्तर फिर बढ़ा, 198.73 मीटर पहुंचा
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गंगा का जलस्तर बढऩे से खादर क्षेत्र में डूबा घाट। संवाद
गढ़मुक्तेश्वर। गंगा नदी के जलस्तर में एक बार फिर तेजी से बढ़ोतरी होने से खादर क्षेत्र के ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। पिछले 24 घंटे में गंगा का जलस्तर करीब सात सेंटीमीटर बढ़कर 198.73 मीटर के निशान तक पहुंच गया है। जलस्तर बढ़ने से कुदैनी, काकाठेर, गड़ावली और चक लठीरा समेत खादर क्षेत्र के गांवों में एक बार फिर बाढ़ के पानी पहुंचने की आशंका बन गई है।
गंगा का जलस्तर खतरे के निशान के बेहद करीब पहुंचने से ग्रामीणों में बेचैनी का माहौल है। गढ़-ब्रजघाट में गंगा का खतरे का निशान 199.33 मीटर (समुद्र तल से) निर्धारित है। ऐसे में वर्तमान जलस्तर खतरे के निशान से महज 60 सेंटीमीटर नीचे है। लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन और ग्रामीण दोनों ही स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
बाढ़ नियंत्रण कक्ष मेरठ ड्रेनेज खंड प्रथम के प्रभारी अधिकारी के अनुसार सोमवार को बिजनौर बैराज से गंगा में 1.27 लाख क्यूसिक पानी का डिस्चार्ज किया गया। पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में हो रही बारिश तथा बैराजों से छोड़े जा रहे पानी का असर गंगा के जलस्तर पर पड़ने की संभावना है।
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एसडीएम श्रीराम यादव ने बताया कि प्रशासन गंगा के जलस्तर पर लगातार निगरानी रख रहा है। संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। खादर क्षेत्र के संवेदनशील गांवों में स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
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गंगा का जलस्तर खतरे के निशान के बेहद करीब पहुंचने से ग्रामीणों में बेचैनी का माहौल है। गढ़-ब्रजघाट में गंगा का खतरे का निशान 199.33 मीटर (समुद्र तल से) निर्धारित है। ऐसे में वर्तमान जलस्तर खतरे के निशान से महज 60 सेंटीमीटर नीचे है। लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन और ग्रामीण दोनों ही स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
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बाढ़ नियंत्रण कक्ष मेरठ ड्रेनेज खंड प्रथम के प्रभारी अधिकारी के अनुसार सोमवार को बिजनौर बैराज से गंगा में 1.27 लाख क्यूसिक पानी का डिस्चार्ज किया गया। पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में हो रही बारिश तथा बैराजों से छोड़े जा रहे पानी का असर गंगा के जलस्तर पर पड़ने की संभावना है।
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एसडीएम श्रीराम यादव ने बताया कि प्रशासन गंगा के जलस्तर पर लगातार निगरानी रख रहा है। संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। खादर क्षेत्र के संवेदनशील गांवों में स्थिति पर नजर रखी जा रही है।