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फ्रेट कॉरडिोर : ट्रैक पर सौ किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से दौड़ा लोको इंजन
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हापुड़। आखिरकार लंबे इंतजार के बाद डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर शुक्रवार को ट्रायल किया गया। बारिश और इलेक्ट्रिक टेस्टिंग कार्य में व्यवधान के कारण ट्रायल की शुरूआत करीब छह घंटे देरी से हुई। सुबह साढ़े दस बजे के बजाय साढ़े चार बजे न्यू खुर्जा स्टेशन से लोको इंजन को हरी झंडी दिखाई गई। देरी के कारण केवल लोको इंजन के साथ ही ट्रायल हो पाया। मालगाड़ी के डिब्बों के साथ ट्रायल अब शनिवार को होगा।
26 हजार करोड़ की लागत से बन रहे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के दो भाग हैं। पहला भाग वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर जो कि दादरी से मुंबई के बंदरगाह तक बन रहा है। वहीं दूसरा भाग है ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर जोकि लुधियाना से कोलकाता के डालकुनी तक बन रहा है। एलएंडटी कंपनी द्वारा खुर्जा से सहारनपुर के पिलखनी तक 225 किलोमीटर में कार्य किया जा रहा है। हापुड़ के 21 किलोमीटर लंबाई में कार्य किया गया है। खुर्जा से मेरठ होते हुए सहारनपुर तक का हिस्सा एकल पटरी लाइन का है। खुर्जा से सहारनपुर के बीच लोडिंग व अनलोडिंग स्टेशन भी नहीं है। रघुनाथपुर में स्टेशन का निर्माण किया गया है। जिले में 44 अंडरपास भी बनाए गए हैं। इसके अलावा दो बड़े पुल हैं। जिनमें हरसिंहपुर नहर से एनएच 334 और पिलखुवा में निजामपुर के निकट एलिवेटिड रोड पर बनाया गया पुल शामिल है।
खुर्जा से साढ़े चार बजे रवाना हुआ लोको इंजन
शुक्रवार को खुर्जा से करीब साढ़े दस बजे लोको डीजल इंजन, इसके बाद लोको इलेक्ट्रिक इंजन और फिर इलेक्ट्रिक इंजन के साथ मालगाड़ी के डिब्बों को जोड़कर ट्रायल किया जाना था। लेकिन बृहस्पतिवार रात हुई झमाझम बारिश के कारण पहले ट्रैक और इसके इलेक्ट्रिक सिस्टम की टेस्टिंग की गई। जिसके कारण ट्रायल करीब छह घंटे देरी से शुरू हुआ। देरी के कारण डीजल और इलेक्ट्रिक इंजन को एक साथ जोडक़र एक साथ पटरी पर दौड़ाया गया। ट्रायल के दौरान ट्रैक पर इंजन सौ किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ा। खुर्जा से खतौली तक 134 किलोमीटर का सफर लोको इंजन ने पार किया। हापुड़ तक 13 स्टेशन पार करके लोको इंजन 5 बजकर 50 मिनट पर गुजरा। इस दौरान कर्मचारी खासे उत्साहित दिखे। फूलों से सजे इंजन का लोगों ने खासा स्वागत किया। अब जल्द ही मालगाड़ी के डिब्बों के साथ ट्रायल किया जाएगा।
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गुलावठी से वलीदपुर तक ट्रैक की हुई जांच
खुर्जा से गुलावठी तक फ्रेट कॉरिडोर पुरानी रेलवे लाइन के साथ साथ आया है। इसके बाद गुलावठी के आगे से मेरठ के गांव वलीदपुर तक यह ट्रैक बाईपास होता हुआ अलग हो गया है। यह ट्रैक पूरी तरह से नया है और मिट्टी भराव, विद्युतीकरण और सिग्नल कनेक्टिविटी का कार्य पूरी तरह से नया है। ऐसे में इस ट्रैक की जांच मुख्य रूप से की गई।
सफल रहा ट्रायल
ट्रायल के दौरान किसी प्रकार की खामी प्रकाश में नहीं आयी है। देरी से शुरू होने के बावजूद इस दौरान सब कुछ ठीक रहा, जिससे टीम उत्साहित है। इसके बाद अन्य ट्रायल की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।-गुरविंदर सिंह, प्रबंधक, एलएंडटी।
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26 हजार करोड़ की लागत से बन रहे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के दो भाग हैं। पहला भाग वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर जो कि दादरी से मुंबई के बंदरगाह तक बन रहा है। वहीं दूसरा भाग है ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर जोकि लुधियाना से कोलकाता के डालकुनी तक बन रहा है। एलएंडटी कंपनी द्वारा खुर्जा से सहारनपुर के पिलखनी तक 225 किलोमीटर में कार्य किया जा रहा है। हापुड़ के 21 किलोमीटर लंबाई में कार्य किया गया है। खुर्जा से मेरठ होते हुए सहारनपुर तक का हिस्सा एकल पटरी लाइन का है। खुर्जा से सहारनपुर के बीच लोडिंग व अनलोडिंग स्टेशन भी नहीं है। रघुनाथपुर में स्टेशन का निर्माण किया गया है। जिले में 44 अंडरपास भी बनाए गए हैं। इसके अलावा दो बड़े पुल हैं। जिनमें हरसिंहपुर नहर से एनएच 334 और पिलखुवा में निजामपुर के निकट एलिवेटिड रोड पर बनाया गया पुल शामिल है।
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खुर्जा से साढ़े चार बजे रवाना हुआ लोको इंजन
शुक्रवार को खुर्जा से करीब साढ़े दस बजे लोको डीजल इंजन, इसके बाद लोको इलेक्ट्रिक इंजन और फिर इलेक्ट्रिक इंजन के साथ मालगाड़ी के डिब्बों को जोड़कर ट्रायल किया जाना था। लेकिन बृहस्पतिवार रात हुई झमाझम बारिश के कारण पहले ट्रैक और इसके इलेक्ट्रिक सिस्टम की टेस्टिंग की गई। जिसके कारण ट्रायल करीब छह घंटे देरी से शुरू हुआ। देरी के कारण डीजल और इलेक्ट्रिक इंजन को एक साथ जोडक़र एक साथ पटरी पर दौड़ाया गया। ट्रायल के दौरान ट्रैक पर इंजन सौ किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ा। खुर्जा से खतौली तक 134 किलोमीटर का सफर लोको इंजन ने पार किया। हापुड़ तक 13 स्टेशन पार करके लोको इंजन 5 बजकर 50 मिनट पर गुजरा। इस दौरान कर्मचारी खासे उत्साहित दिखे। फूलों से सजे इंजन का लोगों ने खासा स्वागत किया। अब जल्द ही मालगाड़ी के डिब्बों के साथ ट्रायल किया जाएगा।
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गुलावठी से वलीदपुर तक ट्रैक की हुई जांच
खुर्जा से गुलावठी तक फ्रेट कॉरिडोर पुरानी रेलवे लाइन के साथ साथ आया है। इसके बाद गुलावठी के आगे से मेरठ के गांव वलीदपुर तक यह ट्रैक बाईपास होता हुआ अलग हो गया है। यह ट्रैक पूरी तरह से नया है और मिट्टी भराव, विद्युतीकरण और सिग्नल कनेक्टिविटी का कार्य पूरी तरह से नया है। ऐसे में इस ट्रैक की जांच मुख्य रूप से की गई।
सफल रहा ट्रायल
ट्रायल के दौरान किसी प्रकार की खामी प्रकाश में नहीं आयी है। देरी से शुरू होने के बावजूद इस दौरान सब कुछ ठीक रहा, जिससे टीम उत्साहित है। इसके बाद अन्य ट्रायल की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।-गुरविंदर सिंह, प्रबंधक, एलएंडटी।