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चुनाव आयोग की सख्ती ने निकाली नेताओं की ‘हवा’
ब्यूरो, अमर उजाला/ हापुड़
Updated Mon, 09 Jan 2017 09:04 PM IST
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चुनाव आयोग
- फोटो : amar ujala
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चुनाव आयोग की सख्ती और कड़े तेवरों ने राजनीतिक दलों के नेताओं की हवा निकाल दी है। विधानसभा चुनाव की तिथियां घोषित होने के बाद शहर में चुनाव प्रचार के पुराने तौर तरीके नजर नहीं आ रहे हैं।
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न कोई झंडा और न बैनर, यही नहीं प्रमुख दलों के प्रत्याशी भी बिना किसी तामझाम के प्रचार कर रहे हैं। हर दल खर्चा करने से बच रहा है। बड़े नेताओं की सभाएं भी सोच समझकर तय की जा रही है।
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पूर्व के चुनावों पर निगाह डालें तो चुनाव की घोषणा होने के साथ ही शहर और कस्बों को झंडों, बैनरों और होर्डिंग से पाटने की होड़ लग जाती थी। इस दौरान विभिन्न दलों के कार्यकर्ताओं के साथ झगड़े तक हो जाते थे।
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पिछले चुनाव में राजनीतिक दलों, उनके समर्थकों में चुनाव का जादू सिर चढ़कर बोलता था, वह गायब हो गया है। इसका कारण निर्वाचन आयोग का कड़ा रुख और राजनीतिक दलों एवं प्रत्याशियों के चुनावी खर्चे पर नकेल डालना माना जा रहा है।
प्रमुख दलों के पदाधिकारी भी मानते हैं कि निर्वाचन आयोग की कड़ाई के चलते अब फूंक-फूंक कर कदम रखना पड़ रहा है। रालोद के जिलाध्यक्ष शिवकुमार त्यागी का कहना है कि आयोग ने इतने प्रतिबंध लगा दिए हैं कि प्रचार के लिए अब तो घर-घर जाकर जनसंपर्क में ही भलाई है।
अधिक खर्चा होने पर प्रचार में अनावश्यक खर्चों में कटौती करने को मजबूर कर दिया है। उधर चुनाव प्रचार-प्रसार के साथ पार्टी के राष्ट्रीय, प्रांतीय नेताओं और स्टार प्रचारकों की जनसभाएं भी बहुत ही सोच समझकर तय की जा रही है।
राजनीतिक दलों का पूरा-पूरा ध्यान सघन जनसंपर्क के दौरान एक एक मतदाता से रुबरु होकर उसे विश्वास में लेना है। राजनीतिक दल भी चुनाव प्रचार के आडंबरों और दिखावे से अपने को दूर रखे हुए हैं। हर राजनीतिक दल चुनाव संचालन के मामले में एक-एक कदम फूंक-फूंक कर रखा रहा है।