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भीतरघात और जोड़तोड़ से धौलाना में त्रिकोणीय संघर्ष
ब्यूरो, अमर उजाला/ हापुड़
Updated Sun, 05 Feb 2017 08:24 PM IST
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चुनाव
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जिले का धौलाना विधान सभा क्षेत्र मुस्लिम और ठाकुर बाहुल्य है। पिछले चुनाव में यह सीट सपा ने जीती थी, लेकिन इस बार इस सीट पर भीतरघात और जोड़ तोड़ की राजनीति के चलते तिकोना संघर्ष होने के आसार हैं। हालांकि रालोद प्रत्याशी भी दम भर रहा है।
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धौलाना विधान सभा क्षेत्र में मतदाताओं की कुल संख्या 3.78 लाख है। इनमें करीब 1.10 लाख मुस्लिम मतदाता हैं। जबकि ठाकुर मतदाताओं की संख्या 85 हजार और करीब 35 हजार एससी हैं। इनके अलावा 25 हजार वैश्य, 20 हजार जाट, 20 हजार कोरी, 15 हजार गुर्जर,
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16 हजार ब्राह्मण, 12 हजार त्यागी और 40 हजार अन्य मतदाता हैं। दिलचस्प बात यह है कि इस बार धौलाना विधान सभा सीट से चार प्रमुख प्रत्याशियों में सिर्फ एक मुस्लिम और तीन तोमर प्रत्याशी हैं। पिछले चुनाव में तीन प्रमुख प्रत्याशी मुस्लिम थे।
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इसके बावजूद धर्मेश तोमर 59150 वोट पाकर सिर्फ 9339 मतों से जीते थे। जबकि बसपा के असलम चौधरी 49811 वोट पाकर चुनाव हार गए थे। इस बार समीकरण बदले हैं। दरअसल पिछले चुनाव में असलम चौधरी के लिए पीस पार्टी के वाशिद अली और रालोद के अय्यूब अली भारी पड़े थे
जिन्होंने 20-20 हजार वोट प्राप्त कर लिये थे, जिसका लाभ धर्मेश तोमर को मिला था। हालांकि इस बार यह लोग इस सीट से प्रत्याशी नहीं हैं लेकिन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की मसूरी में हुई जनसभा में वाशिद अली और इलाके में काफी दबंग माने जाने वाले इस्ते प्रधान ने सपा प्रत्याशी धर्मेश तोमर के समर्थन का ऐलान कर दिया है।
उधर कांग्रेस से सपा का गठबंधन हो गया है। ऐसे में कुछ दिन पहले तक बसपा के लिए लड्डू कही जाने वाली यह सीट आसान नहीं रही है क्योंकि भाजपा ने भी अपने चार बार के पुराने सांसद रमेश चंद तोमर को मैदान में उतार रखा है।
इसलिए ठाकुरों के साठा चौरासी में वह भी कम असरदार नहीं है, यह बात अलग है कि ठाकुर बिरादरी के टिकटार्थी भीतरघात करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे लेकिन मुस्लिम और एससी वोटों को छोड़कर अन्य बिरादरियों में मोदी का क्रेज उन्हें भी दौड़ में शामिल किए हुए है।
हालांकि रालोद के नगेंद्र तोमर भी चुनावी मैदान में है। रालोद का जनाधार किसान मतदाता माने जाते हैं, वह चाहे किसी भी जाति के हों लेकिन वह कितने वोट पाएंगे, यह तो वक्त ही बताएगा। फिलहाल जोड़तोड़ के चलते इस सीट पर मुकाबला त्रिकोणीय ही होने के आसार हैं।