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Hapur News: एंबुलेंस मिली नहीं, स्कूली वाहन में प्रसूता ने जन्मा मृत बच्चा
Thu, 10 Jul 2025 10:46 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
Updated Thu, 10 Jul 2025 10:46 PM IST
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हापुड़। एंबुलेंस सेवा नहीं मिलने से स्कूल की गाड़ी से हापुड़ सीएचसी पहुंची प्रसूता को रास्ते में ही मृत बच्चा हुआ। सीएचसी में गंभीर प्रसूता को इलाज देने से भी इन्कार कर दिया गया। इसके विरोध में एकत्र हुई आशाओं ने शिशु के शव को अस्पताल के बाहर रखकर जमकर हंगामा किया। अधिकारियों को आशाओं के आक्रोश के चलते दौड़ना पड़ा, दोपहर तक आशाएं धरने पर डटी रहीं।
दरअसल, रघुनाथपुर निवासी मनीष की गर्भवती पत्नी चंचल का इलाज हापुड़ सीएचसी में ही चल रहा था। बृहस्पतिवार सुबह दर्द होने पर उसने आशा मुनेश से संपर्क किया। आशा ने चंचल के घर पहुंचकर, 108 नंबर एंबुलेंस को कॉल किया। लेकिन करीब दस मिनट तक कोई जवाब नहीं आया। इसके बाद 102 नंबर पर कॉल किया, वहां नंबर भी नहीं लग सका।
चंचल की हालत बिगड़ी तो परिजनों ने किसी तरह स्कूल की गाड़ी की व्यवस्था करायी। उस गाड़ी से ही चंचल को रघुनाथपुर से हापुड़ सीएचसी लाया गया। लेकिन एंबुलेंस जैसी सुविधा नहीं मिलने के कारण चंचल को प्रसव गाड़ी में ही हो गया।
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अवरनाल भी बाहर आ गई, बच्चा भी मृत था। आशा मुनेश ने बताया कि चंचल की हालत भी गंभीर हो गई। इसे सीएचसी में भर्ती कराना चाहा। आरोप है कि वहां तैनात स्टाफ नर्स ने कहा कि डिलवरी घर कराकर लाई है, इसलिए यहां इलाज नहीं मिलेगा। आरोप यह भी है कि अधीक्षक से बच्चे को रिकॉर्ड में चढ़ाने और महिला को इलाज देने की मांग की, लेकिन अधीक्षक ने भी उन्हें अनसुना कर दिया।
कुल मिलाकर करीब आधा घंटे तक प्रसूता अस्पताल में ही तड़पती रही। इसके विरोध में आशाओं ने एकत्र होकर, अस्पताल का गेट बंद कर दिया। नवजात शिशु का शव रखकर अधीक्षक हटाओ के नारे लगाए। इसी बीच अधिकारी आशाओं के बीच आने के बजाए इधर उधर भागते नजर आए। एआरओ मोहित त्यागी, फार्मासिस्ट मलिक व डॉ.पुष्पेंद्र किसी तरह आशाओं को शांत कराने में जुटे रहे। इस दौरान उनकी काफी नोकझोंक भी हुई। दोपहर में एसीएमओ डॉ.नवीन मौके पर पहुंचे, जिन्होंने किसी तरह मामला शांत कराया। इस दौरान पुलिस भी पहुंची।
अल्ट्रासाउंड समय से होता तो बच जाती जान
चंचल पिछले महीने आठ महीने की गर्भवती थी, उसने सीएचसी में अल्ट्रासाउंड कराया था। तब बच्चा स्वस्थ बताया गया था, दस दिन पहले बच्चे का घुमाव कम होने पर फिर चंचल सीएचसी आयी। आरोप है कि स्टाफ ने गर्भस्थ शिशु के स्वस्थ होने की बात कह, अल्ट्रासाउंड अगले महीने कराने की बात कही। आशाओं द्वारा बताया गया कि यदि तभी अल्ट्रासाउंड हो जाता तो बच्चा मृत पैदा नहीं होता।
जोखिम भरा हो रहा सरकारी अस्पतालों का इलाज-
हाल ही में सिखैड़ा सीएचसी में प्रसव के दौरान लापरवाही से दो नवजातों की मौत हुई है। हापुड़ सीएचसी के अंदर ही महिला का एंबुलेंस में प्रसव कराया गया है और अब इलाज के अभाव में चंचल की हालत भी खराब हो गई है। इन अस्पतालों में इलाज जोखिम भरा हो रहा है।
अधीक्षक और आशाओं से जुड़े अधिकारी की नाराजगी अधिक
हंगामे के दौरान आशाओं ने सीएचसी अधीक्षक पर अस्पताल चला पाने में असमर्थ होने के आरोप लगाए। साथ ही कुछ अधिकारियों पर सिर्फ वसूली पर ही ध्यान देने का आरोप लगाया। आशाओं ने बताया कि उन्हें दो महीने से मानदेय नहीं मिला है। शिकायत करने पर उन्हें टरकाया जाता है।
अधीक्षक से मांगा स्पष्टीकरण-
प्रसूता दो दिन अस्पताल में ही भर्ती रहेगी। आरोपों को लेकर सीएचसी अधीक्षक से स्पष्टीकरण मांगा है। स्त्री रोग विभाग में कई अन्य शिकायतें मिली हैं, इन पर भी संज्ञान लिया जा रहा है। उपचार सेवाओं को लेकर लापरवाही नहीं बरतने दी जाएगी। - डॉ.सुनील त्यागी, सीएमओ।
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दरअसल, रघुनाथपुर निवासी मनीष की गर्भवती पत्नी चंचल का इलाज हापुड़ सीएचसी में ही चल रहा था। बृहस्पतिवार सुबह दर्द होने पर उसने आशा मुनेश से संपर्क किया। आशा ने चंचल के घर पहुंचकर, 108 नंबर एंबुलेंस को कॉल किया। लेकिन करीब दस मिनट तक कोई जवाब नहीं आया। इसके बाद 102 नंबर पर कॉल किया, वहां नंबर भी नहीं लग सका।
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चंचल की हालत बिगड़ी तो परिजनों ने किसी तरह स्कूल की गाड़ी की व्यवस्था करायी। उस गाड़ी से ही चंचल को रघुनाथपुर से हापुड़ सीएचसी लाया गया। लेकिन एंबुलेंस जैसी सुविधा नहीं मिलने के कारण चंचल को प्रसव गाड़ी में ही हो गया।
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अवरनाल भी बाहर आ गई, बच्चा भी मृत था। आशा मुनेश ने बताया कि चंचल की हालत भी गंभीर हो गई। इसे सीएचसी में भर्ती कराना चाहा। आरोप है कि वहां तैनात स्टाफ नर्स ने कहा कि डिलवरी घर कराकर लाई है, इसलिए यहां इलाज नहीं मिलेगा। आरोप यह भी है कि अधीक्षक से बच्चे को रिकॉर्ड में चढ़ाने और महिला को इलाज देने की मांग की, लेकिन अधीक्षक ने भी उन्हें अनसुना कर दिया।
कुल मिलाकर करीब आधा घंटे तक प्रसूता अस्पताल में ही तड़पती रही। इसके विरोध में आशाओं ने एकत्र होकर, अस्पताल का गेट बंद कर दिया। नवजात शिशु का शव रखकर अधीक्षक हटाओ के नारे लगाए। इसी बीच अधिकारी आशाओं के बीच आने के बजाए इधर उधर भागते नजर आए। एआरओ मोहित त्यागी, फार्मासिस्ट मलिक व डॉ.पुष्पेंद्र किसी तरह आशाओं को शांत कराने में जुटे रहे। इस दौरान उनकी काफी नोकझोंक भी हुई। दोपहर में एसीएमओ डॉ.नवीन मौके पर पहुंचे, जिन्होंने किसी तरह मामला शांत कराया। इस दौरान पुलिस भी पहुंची।
अल्ट्रासाउंड समय से होता तो बच जाती जान
चंचल पिछले महीने आठ महीने की गर्भवती थी, उसने सीएचसी में अल्ट्रासाउंड कराया था। तब बच्चा स्वस्थ बताया गया था, दस दिन पहले बच्चे का घुमाव कम होने पर फिर चंचल सीएचसी आयी। आरोप है कि स्टाफ ने गर्भस्थ शिशु के स्वस्थ होने की बात कह, अल्ट्रासाउंड अगले महीने कराने की बात कही। आशाओं द्वारा बताया गया कि यदि तभी अल्ट्रासाउंड हो जाता तो बच्चा मृत पैदा नहीं होता।
जोखिम भरा हो रहा सरकारी अस्पतालों का इलाज-
हाल ही में सिखैड़ा सीएचसी में प्रसव के दौरान लापरवाही से दो नवजातों की मौत हुई है। हापुड़ सीएचसी के अंदर ही महिला का एंबुलेंस में प्रसव कराया गया है और अब इलाज के अभाव में चंचल की हालत भी खराब हो गई है। इन अस्पतालों में इलाज जोखिम भरा हो रहा है।
अधीक्षक और आशाओं से जुड़े अधिकारी की नाराजगी अधिक
हंगामे के दौरान आशाओं ने सीएचसी अधीक्षक पर अस्पताल चला पाने में असमर्थ होने के आरोप लगाए। साथ ही कुछ अधिकारियों पर सिर्फ वसूली पर ही ध्यान देने का आरोप लगाया। आशाओं ने बताया कि उन्हें दो महीने से मानदेय नहीं मिला है। शिकायत करने पर उन्हें टरकाया जाता है।
अधीक्षक से मांगा स्पष्टीकरण-
प्रसूता दो दिन अस्पताल में ही भर्ती रहेगी। आरोपों को लेकर सीएचसी अधीक्षक से स्पष्टीकरण मांगा है। स्त्री रोग विभाग में कई अन्य शिकायतें मिली हैं, इन पर भी संज्ञान लिया जा रहा है। उपचार सेवाओं को लेकर लापरवाही नहीं बरतने दी जाएगी। - डॉ.सुनील त्यागी, सीएमओ।