फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hapur News ›   The thief took vehicle.

जनता मचा रही शोर, वाहन ले गए चोर

Tue, 27 Dec 2016 04:07 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला, हापुड़
ब्यूरो अमर उजाला, हापुड़ Updated Tue, 27 Dec 2016 04:07 PM IST
विज्ञापन
The thief took vehicle.
कार ले भागे बदमाश - फोटो : demo

जिले में वाहन चोरों का बोलबोला है। वाहन चोरी की बढ़ती घटनाओं से लोग दहशत में हैं। जीवन भर की गाढ़ी कमाई से खरीदे गए वाहन को चोर चंद मिनटों में पार कर देते हैं। जिले में ऐसा कोई दिन जाता होगा जिस दिन चार या पांच वाहन चोरी न होते हों।

विज्ञापन


लगातार बढ़ रही वारदातों पर पुलिस अंकुश लगाने में नाकामयाब हो चुकी है। वर्तमान में जिले में वाहन चोरी बड़ा सिरदर्द बन गया है। पुलिस वाहन चोरों को गिरफ्तार कर चोरी किए हुए वाहन भी बरामद करती है, इसके बावजूद वाहन चोरों के हौसले बुलंद हैं।
विज्ञापन


पुलिस द्वारा वाहन चोरों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया जाता है, लेकिन जल्द ही वाहन चोर जेल से छूटकर बाहर आ जाते हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो प्रत्येक दिन जिले में तीन से चार वाहन चोरी होते हैं। जिसका प्रमुख कारण पुलिस की चौकसी में कमी है।
विज्ञापन
विज्ञापन


सूत्रों के अनुसार जिले में दो दर्जन से अधिक गिरोह वाहन चोरी की घटना को अंजाम दे रहे हैं। इस गिरोह में शामिल प्रत्येक सदस्य का अलग अलग कार्य होता है। वाहन मालिक पर निगाह रखने से लेकर चोरी तक एक गैंग काम करता है।

चोरी के बाद वाहन को बाजार में बेचने का काम दूसरी गैंग करती है। ये बात कई बार पुलिस खुलासे में भी सामने आ चुकी है। इतना हीं नहीं ये चोर बाजार की डिमांड का भी खास ध्यान रखते हैं। एनसीआर में मेरठ का सोतीगंज वाहन चोरों का अड्डा माना जाता है।

अब हापुड़ भी मिनी सोतीगंज बन चुका है। क्षेत्र में बड़े पैमाने में पर अवैध रूप से वाहन कटान होता है। इन गोदामों पर लुका छिपी तौर पर भी चोरी के वाहनों का कटान होता है। इसके अलावा चंढीगढ़ व मुजफ्फरनगर में भी चोरी के वाहनों का बाजार सजता है।

जिले में बाइक चोरों को पनाह देने में नकली दस्तावेज बनाने वाले भी पूरा संरक्षण दे रहे हैं। ये आरटीओ विभाग से रजिस्ट्रेशन समाप्त या चोरी हुए वाहन का नंबर पता लगाकर उसका फर्जी रूप से पंजीकरण कर देते हैं। इस दौरान वाहन का इंजन और चेसिस नंबर तक बदल दिया जाता है।

जिले में वाहन चोरी के आंकड़ों में तेजी से वृद्धि हो रही है। वर्ष 2014 में 1367 वाहन चोरी की रिपोर्ट दर्ज हुई। उसके बाद वर्ष 2015 में ये ग्राफ बढ़कर 1715 तक पहुंच गया। सितंबर 2016 तक ये ग्राफ 1581 है। वहीं, कई मामलों में पुलिस रिपोर्ट भी दर्ज नहीं करती है।


एसपी अलंकृता सिंह का कहना है कि वाहन चोरी रोकने के लिए पुलिस प्रयासरत है। वाहन चोरी की घटनाएं रोकने के लिए क्राइम मैपिंग भी की जा रही है।

इसके अलावा थाने या कंट्रोल रूम में आने वाली सूचनाओं पर भी कार्रवाई की जाती है। थानेदारों को निर्देशित भी किया गया है कि थाने में आने वाले फरियादी की रिपोर्ट दर्ज कर चोरों को पकड़ा जाए।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed