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दो लोगों की सरेआम हत्या से दहल उठा संजय विहार

Mon, 01 May 2017 09:25 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/ हापुड़
ब्यूरो, अमर उजाला/ हापुड़ Updated Mon, 01 May 2017 09:25 PM IST
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Sanjay Vihar was killed in the murder of two people.
सरेआम हत्या से दहल उठा संजय विहार - फोटो : अमर उजाला

किसान सेवा सहकारी समिति कैली के चेयरमैन और रालोद के प्रदेश महासचिव वीरेंद्र त्यागी उर्फ बबली और उनके मित्र मुकेश त्यागी की 17 अप्रैल 06 की सुबह 6.30 बजे ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर हत्या कर दी गई थी। इससे संजय विहार आवास विकास दहल उठा था।

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इस दोहरे हत्याकांड में 11 साल बाद कोर्ट ने मुख्य आरोपी संतरपाल समेत तीन हत्यारों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। फैसले पर मृतकों के परिजनों ने कहा है कि उन्हें इंसाफ मिला है। मामूली विवाद से शुरू हुई इस रंजिश में अब तक कुल 6 लोगों की जान जा चुकी है।
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वीरेंद्र त्यागी उर्फ बबली मेरठ के थाना खरखौदा के गांव अतराड़ा के निवासी थे। वह परिवार के साथ संजय विहार में रहते थे। सहकारी गन्ना विकास समिति महीउद्दीनपुर (मेरठ) में लिपिक के पद पर कार्यरत मुकेश त्यागी सबली गांव का निवासी था।
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वह भी परिवार के साथ बबली के पास ही रहता था।  17 अप्रैल 2006 की सुबह बबली और मुकेश बच्चों को स्कूल बस में बैठाने के लिए पैदल मुख्य चौराहे पर आए थे। तभी कई हमलावरों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर दोनों की सरेआम हत्या कर दी।

इससे संजय विहार दहल उठा था और परिवार में कोहराम मच गया। हत्याकांड की रिपोर्ट बबली के भाई देवेद्र पहलवान ने बाबूगढ़ के संतरपाल निवासी व राजबहादुर सहित तीन अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

संतरपाल अपने भाइयों के साथ संजय विहार के पास ही गांधी विहार कालोनी में रहता है। मामले की तफ्तीश में संतरपाल के दो भाइयों नीरज और रवि, रजपुरा थाना खरखौदा (मेरठ) निवासी राजकुमार, बाबूगढ़ थाना के गांव दयानतपुर निवासी ज्ञानेन्द्र उर्फ ज्ञानी,

अजीत निवासी नूरपुर थाना बाबूगढ़, कपिल और सुरेन्द्र निवासी वझीलपुर और चंद्रप्रकाश निवासी अतराड़ा के इस हत्याकांड के षडय़ंत्रकर्ता में सामने आए थे। इस मामले की तफ्तीश हापुड़ पुलिस के अलावा बुलंदशहर और मेरठ एसआईएस शाखा द्वारा भी की गई।

सोमवार को गाजियाबाद की कोर्ट ने उक्त मामले में संतरपाल, नीरज और अजीत को आरोप सिद्ध होने पर उम्रकैद की सजा सुनाई । इस निर्णय पर बबली के बड़े भाई देवेंद्र पहलवान का कहना है कि उन्हें न्याय मिला है।

दोयमी के पास एक वैश्य परिवार की कुछ जमीन थी। उस पर कुछ लोग कब्जा करना चाहते थे। अतराड़ा के जयभगवान को उक्त परिवार जानता था,

जिनके कहने पर बबली आदि ने संतरपाल को इस मामले में दखल नहीं देने को कहा था। इसपर दोहरे हत्याकांड को अंजाम दिया गया तथा इसकी पैरवी करने पर बबली के छोटे भाई राकेश की हत्या भी कर दी गई थी।

जमीन को लेकर शुरू हुए विवाद में अब तक बबली और मुकेश समेत 6 लोगों की जान जा चुकी है। बबली और मुकेश की हत्या 17 अप्रैल 2006 को होने के बाद 21 अक्तूबर 2006 को ज्ञानेन्द्र उर्फ ज्ञानी पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था।

वह बबली की हत्या में शामिल था। इसके बाद 12 अप्रैल 2012 को किठौर रोड पर अतराड़ा के पूर्व प्रधान और बबली के भाई राकेश की शिवम कोल्डस्टोरेज के पास गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई। इस हत्याकांड के गवाह सुरेंद्र की गवाही की तिथि से चार दिन पहले उसकी हत्या की गयी।


इस मामले में चंद्रप्रकाश और राजकुमार समेत तीन लोग जेल में थे। इनमें से चंद्र प्रकाश की 3 अप्रैल 2017 को जेल में ही संदिग्ध हालत में मौत हो गई। इस तरह अब तक कुल 6 लोग जान गंवा चुके हैं।

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