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पुलिस के हाथ नहीं लगा कोई सुराग

Fri, 24 Jun 2016 10:15 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हापुड़
ब्यूरो/अमर उजाला, हापुड़ Updated Fri, 24 Jun 2016 10:15 PM IST
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Police did not have a clue.
दरोगा सुखबीर सिंह की गोली मारकर हत्या का मामला - फोटो : अमर उजाला

बागपत में तैनात दरोगा सुखबीर सिंह यादव की यहां मोदीनगर रोड पर बृहस्पतिवार की रात गोली मारकर हत्या के मामले में पुलिस के हाथ अभी तक कोई सुराग नहीं लगा है। हमलावरों की धरपकड़ व मामले की जांच के लिए एसपी ने दो टीमों का गठन किया है।

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टीम में तेज तर्रार थाना प्रभारियों को शामिल किया गया है। वहीं, नोएडा की एसटीएफ भी जांच में जुटी है। उधर, हमलावरों के लाल रंग की बुलेट मोटरसाइकिल पर होने की बात चली है। इस पर पुलिस लाल रंग की बाइक की भी तलाश कर रही है।
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बुलंदशहर के सिकंदरा थाना क्षेत्र के सिरोधन निवासी दरोगा सुखबीर सिंह (57) बागपत के सिंघावली अहीर थाने में तैनात थे। बृहस्पतिवार की रात ड्यूटी खत्म कर लौटते समय हापुड़ कोतवाली क्षेत्र के मोदीनगर रोड पर गांव बिजलीघर के पास बाइक सवार हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।
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दरोगा की हत्या की सूचना मिलने पर रात करीब 12 बजे आईजी सुजीत पांडेय ने पहुंचकर स्थिति की जानकारी की। साथ ही हमलावरों की गिरफ्तारी के कड़े निर्देश दिए।

इसके बाद एसपी के निर्देश पर सीओ विशाल यादव के नेतृत्व में हापुड़ कोतवाली समेत जिले कई तेज तर्रार थाना प्रभारी, सर्विलांस की टीम और खुफिया तंत्र इस हत्या कांड का खुलासा करने में जुट गया है।

पुलिस की दो टीमों का गठन किया गया तथा नोएडा की एसटीएफ भी जांच में जुटी है। रात में भी पुलिस की टीमों ने संदिग्धों की तलाश में कई जगह दबिश दी, कुछ लोगों से पूछताछ भी की गई। इतनी कवायद के बाद भी घटना के 24 घंटे बीत जाने पर भी अभी तक पुलिस के हाथ खाली हैं।

हालांकि पुलिस के बड़े अफसर जल्द ही इस मामले का खुलासा करने का दावा कर रहे हैं। उधर, बागपत के थाना सिंघावली अहीर पुलिस से भी इस मामले में सहयोग लिया जा रहा है कि मृतक दरोगा के पास किन-किन मामलों की तफ्तीश थी।

उधर, इस मामले में मृतक के बड़े भाई कृष्णपाल सिंह यादव ने हापुड़ कोतवाली में अज्ञात बदमाशों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कराया है, जिसमें किसी भी रंजिश से इंकार किया गया है।

दरोगा सुखबीर सिंह की गोली मारकर हत्या की सूचना मिलने पर आईजी रेंज सुजीत पांडेय देर रात अस्पताल पहुंचे और इस हत्याकांड पर गहरा शोक व्यक्त किया। साथ ही लापरवाह पुलिस अफसरों को कड़ी फटकार भी लगाई।

आईजी ने अपनी एक्सपर्ट फोरेंसिक टीम को मौके पर बुलवाया और घटनास्थल का टैक्नीकल मुआयना कराया। वहीं बागपत की एसपी ने भी हापुड़ में डेरा डाल दिया है।

दरोगा सुखबीर सिंह को बदमाशों ने काफी नजदीक से पेट में दायीं ओर गोली मारी, जो उनकी कमर को चीर कर पार निकल गई। देव नंदिनी अस्पताल के सर्जन डॉ. श्याम कुमार का कहना है कि दरोगा को काफी नाजुक हालत में यहां लाया गया था।

ओटी में ले जाकर जांच करने पर पता चला कि गोली पेट में लगने के बाद कमर को चीर कर पार निकल गई थी। लगता है कि गोली लगने से उनके गुर्दे व लीवर क्षतिग्रस्त हो गए थे।

डॉ. श्याम कुमार के मुताबिक अगर थोड़ा समय और मिल जाता तो आपरेशन कर दरोगा को बचाने का हर संभव प्रयास किया जा सकता था। वैसे भी बड़ी संख्या में पुलिस कर्मी भी घायल दरोगा के लिए खून देने के लिए तैयार थे।

दरोगा सुखबीर सिंह की हिम्मत ही कही जाएगी कि पेट में गोली लगने के बाद भी तकरीबन एक किमी तक बाइक चलाकर केशवनगर पुलिस चौकी से कुछ आगे  एक कोल्ड स्टोर के बाहर स्थित शकील की चाय की दुकान तक पहुंचे।

दुकान पर पहुंचकर लड़खड़ा कर गिर पड़े। शकील ने बताया कि बाइक से गिरते ही दरोगा ने अस्पताल पहुंचाने की गुहार लगाई। शकील के बेटे मेहताब ने किसी तरह उन्हें केशवनगर पुलिस चौकी तक पहुंचाया और वहां से पुलिस की मदद से उन्हें देव नंदिनी अस्पताल भिजवाया गया था।

दरोगा सुखबीर सिंह के छोटे बेटे मनोज ने दो टूक कहा कि उनके पिता की गांव में किसी से रंजिश नहीं थी। बल्कि वह लोग एक दशक पहले गांव छोड़कर सिकंदराबाद में रहने लगे हैं।

अपने ताऊ कृष्ण पाल यादव तथा अन्य परिजनों के साथ यहां पहुंचे मनोज का कहना है कि उनके पिता के दो भाई हैं। तीनों ने करीब एक दशक पहले अपना गांव सिरोधन छोड़कर सिकंदराबाद में सिरोधन बस अड्डे के पास मोहल्ला पत्थर वाला में अपना मकान बना लिया हैं

तथा वहीं तीनों के परिवार रहते हैं। गांव में किसी से भी उनकी रंजिश नहीं है। साथ ही इस ओर संकेत किया कि उनके पिता की हत्या के पीछे पुलिस महकमे की किसी जांच से जुटा मामला हो सकता है या फिर बदमाशों ने पुलिस की वर्दी में देखकर पकड़े जाने के भय से गोली मारी होगी। पुलिस को इस मामले का खुलासा करना चाहिए।

मनोज ने बताया कि उनके पिता लखनऊ के गोमतीनगर थाने में छह साल रहने के बाद हापुड़ तबादले पर करीब डेढ़ साल पहले आये थे और धौलाना थाने में तैनात रहे। आठ माह पहले बार्डर स्कीम के तहत उनका तबादला बागपत हो गया था, जहां वह सिंघावली अहीर थाने में तैनात थे।

शायद शुक्रवार को उनकी हापुड़ में किसी मुकदमे में तारीख थी। साथ ही कहा कि अगर उनके पास सर्विस रिवाल्वर होता तो वह एक दो बदमाशों को ढेर कर सकते थे।

अपने पिता की हत्या की सूचना मिलते ही सुखबीर सिंह यादव का  बेटा मनोज अपने परिजनों के साथ हापुड़ पहुंच गया था। वह बिजनौर पुलिस लाइन में सिपाही है।

मनोज अपने साथ करीब एक दर्जन परिजनों और मित्रों को लेकर सुबह करीब 9 बजे मोदीनगर रोड स्थित बेतहस्ता क्रिश्चियन एकेडमी भी पहुंचा। इसी एकेडमी के सामने बदमाशों ने सुखबीर सिंह यादव को गोली मारी थी। 


इस एकेडमी के मुख्य द्वार के पास सीसीटीवी कैमरा लगा है, जिसकी रिकार्डिंग उन लोगों ने देखी लेकिन अंधेरा होने के कारण घटना रिकार्ड नहीं हो पाई।

घटना के समय तैनात एकेडमी के गार्ड राजेंद्र ने ने बताया कि दरोगा को गोली मारने वाले  लाल रंग की बुलेट पर सवार थे और गोली मारते ही हापुड़ की ओर भाग गए। जबकि दरोगा भी बिना रुके बाइक से ही आगे बढ़ गए थे। पुलिस लाल रंग की बाइक की सरगर्मी से तलाश कर रही है ताकि उसके मिलने पर बदमाशों तक पहुंचा जा सके।

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