{"_id":"570e6bd44f1c1ba3544a6abe","slug":"farmers-avoided-the-bloody-conflict","type":"story","status":"publish","title_hn":"हापुड़-अमरोहा के किसानों में होने से बचा खूनी संघर्ष","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
हापुड़-अमरोहा के किसानों में होने से बचा खूनी संघर्ष
ब्यूरो/अमर उजाला, हापुड़
Updated Wed, 13 Apr 2016 09:25 PM IST
विज्ञापन
वारदात
- फोटो : demo photo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जनपदीय सीमा से जुड़े विवादित खेतों में खड़ी गेहूं की फसल काटने को लेकर हापुड़ और अमरोहा के किसानों के बीच एक बार फिर खूनी संषर्घ होने से बच गया। बुधवार को दोनों जिलों के किसानों में जमकर तकरार हुई। ग्रामीणों के हस्तक्षेप पर पैमाइश होने तक किसान फसल न काटने पर राजी हो गए।
विज्ञापन
जिले की सीमा से जुड़ी भूमि में गेहूं की फसल पककर तैयार है। इसे काटने के लिए हापुड़ और अमरोहा के किसानों के बीच बुधवार को तकरार हुई। अमरोहा से लठीरा और फरीदपुर गांव के किसान विवादित भूमि में खड़ी गेहूं और सरसों की फसल पर हक जता रहे हैं।
विज्ञापन
वहीं हापुड़ की गढ़ तहसील क्षेत्र से जुड़े गांव चक लठीरा के किसान इस भूमि को अपना बता रहे हैं। उनका कहना है कि वे मेहनत से उगाई गई फसलों को लूटने नहीं देंगे। किसान सतीश, करन, पालू, रामपाल, जयपाल, रामकिशोर, कृपाल का आरोप है कि अमरोहा प्रशासन सीमा विवाद की समस्या को सुलझाने की बजाए उल्टे उलझाता आ रहा है।
विज्ञापन
हालांकि दोनों जिलों के ग्रामीणों ने पैमाइश होने तक फसल न काटने के लिए किसानों को राजी कर लिया।
गंगा की तलहटी वाली जमीन में खेतीबाड़ी और फिर फसलों के कटान को लेकर अमरोहा और हापुड़ के किसानों में संघर्ष का दौर कई दशकों से जारी है। तीन दशकों के भीतर इरफान खां, मवासी, दयाराम, तेजवीर, इकबाल सिंह, खानसिंह समेत एक दर्जन से भी अधिक किसानों की हत्या हो चुकी हैं।
बरसात के सीजन में गंगा अक्सर अपने तटीय इलाके में भूकटान कर देती है। गैप वाली भूमि पर मालिकाना हक जताने वाले दोनों जनपदों के किसानों में तनातनी होती है। इस समस्या के समाधान के लिए अमरोहा के तिगरी धाम की तर्ज पर गढ़ साइड में भी पक्का बांध बन जाए तो फिर सीमा विवाद खत्म हो सकता है।
प्रदेश के पंचायत राज राज्यमंत्री कमाल अख्तर, सपा विधायक मदन चौहान की मौजूदगी में तीन सान पहले दोनों जनपद के प्रशासन की ब्रजघाट डाक बंगले में बैठक हुई थी। अमरोहा प्रशासन ने गढ़ के गांव शकराटीला के अस्तित्व को ही नकार दिया था।
गढ़ के तहसील प्रशासन ने पुराने अभिलेख प्रस्तुत कर शकराटीला के अस्तित्व को साबित करने की कोशिश की थी। बैठक बेनतीजा खत्म हो गई थी।
अभी जनपदीय सीमा विवाद की शिकायत नहीं आई है। हल्का लेखपाल और राजस्व टीम के माध्यम से इस मुद्दे पर नजर रखी जा रही है। अगर किसी भूमि को लेकर विवाद बनता है तो फिर उसकी पैमाइश होने के बाद ही फसल कटवाई जाएगी। - भगत सिंह, तहसीलदार, गढ़