फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hapur News ›   Fake arms licenses were distributed

फर्जी लाइसेंस बनाकर बांट दिए गए हथियार

Mon, 25 Jul 2016 12:30 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला हापुड़।
ब्यूरो,अमर उजाला हापुड़। Updated Mon, 25 Jul 2016 12:30 AM IST
विज्ञापन
Fake arms licenses were distributed
अपराध्‍ा - फोटो : अमर उजाला
हाईकोर्ट की रोक के बावजूद शातिरों ने फर्जी लाइसेंस बनाकर उनपर शस्त्र भी जारी करा दिए। बुलंदशहर के शस्त्र विक्रेता द्वारा बनाए गए शस्त्र लाइसेंस और उनपर जारी हथियारों का खुलासा पिलखुआ पुलिस ने किया है।
विज्ञापन


पुलिस ने सात फर्जी लाइसेंस और इनपर जारी कई हथियार बरामद कर लिए हैं। लाइसेंस बनाने वाले शातिर सहित तीन आरोपियों को पुलिस ने दबोच लिया है, जबकि लाइसेंस बनवाने वाला मुख्य आरोपी अभी फरार है।
विज्ञापन


 पुलिस लाइन में आयोजित प्रेस वार्ता में एसपी अलंकृता सिंह ने बताया कि 29 जून को पिलखुवा पुलिस ने सफल सिंह विकल और दीपक को दो रिवाल्वर के साथ गिरफ्तार किया था। दोनों हथियार फैक्ट्री मेड थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


पुलिस ने दोनों शस्त्रों की जांच कराने के लिए उन्हें कानपुर की आर्डिनेस फैक्ट्री में भेजा था। कंपनी ने जानकारी दी कि कि दोनों रिवाल्वर चौधरी गन हाउस गढ़ दिल्ली रोड हापुड़ से 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को मुकेश और सतवीर के नाम पर खरीदे गए थे।

एसपी ने बताया कि सत्यापन के दौरान इनके नाम व पते फर्जी पाये गए। इस मामले की जांच में स्वॉट टीम को लगाया गया था।  शनिवार रात पिलखुवा और स्वॉट टीम को सूचना मिली कि एक कार में फर्जी लाइसेंस मामले का एक आरोपी आ रहा है।

उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से तीन शस्त्र लाइसेंस प्राप्त हुए। एक शस्त्र लाइसेंस बुलंदशहर जिले का था, जिस पर एक रिवाल्वर और 10 कारतूस अंकित थे। पूछताछ में उसने बताया कि बाबूगढ़ के पूर्व प्रधान और ढाबा स्वामी की मदद से बुलंदशहर के पंडित गन हाउस संचालक से ये लाइसेंस बनवाए थे।

ये लाइसेंस बुलंदशहर के पंडित गन हाउस संचालक ने बनवाए थे। एक लाइसेंस पर राइफल गौतमबुद्धनगर के दनकौर निवासी एक युवक को बिक्री कर दी थी। जबकि तीसरा लाइसेंस कोतवाली नगर बुलंदशहर के सतवीर उर्फ चुन्नू के नाम का बरामद हुआ।

पकड़े गए आरोपी मुकेश शर्मा निवासी गांव बछलौता थाना बाबूगढ़ जिला हापुड़ को साथ लेकर पंडित गन हाउस पर दबिश दी गई। जहां से गन हाउस संचालक अरुण शर्मा को तीन फर्जी लाइसेंस, सरकारी मुहर और पैड के साथ गिरफ्तार कर लिया।

इसी दौरान उसकी दुकान पर आए अमित शर्मा निवासी दनकौर थाना गौतमबुद्धनगर को भी फर्जी लाइसेंस और एक राइफल के साथ गिरफ्तार कर लिया गया। बाबूगढ़ का पूर्व प्रधान सतवीर उर्फ चुन्नू फरार हो गया है।

उसकी तलाश में पुलिस टीम को लगाया गया है। पुलिस अधीक्षक अलंकृता सिंह ने एसएचओ पिलखुवा यशवीर सिंह, स्वॉट टीम प्रभारी संजय त्यागी, एसओ पिलखुवा मनीष चंद्र चौहान, कांस्टेबिल रामवीर खटाना, अमित कुमार, संतोष कुमार, कादिर अहमद, रामवीर, अशोक कुमार, अनुज कुमार, कुलदीप और प्रवीन कुमार को पांच हजार का ईनाम देने की घोषणा की है।

लाइसेंस बनवाने वाले को नहीं होती थी फर्जी होने की जानकारी

 शस्त्र लाइसेंस बनवाने वालों को पता ही नहीं होता था कि उनको फर्जी लाइसेंस थमा दिया गया है। बुलंदशहर के पंडित गन हाउस का मालिक लाइसेंस बनवाने के 50 हजार रुपये लेता था।

लाइसेंस धारक को विश्वास दिलाने के लिए उसको वेरीफिकेशन के लिए बुलंदशहर कलक्ट्रेट लेकर भी जाते थे। एसपी हापुड़ ने बुलंदशहर के एसएसपी को पत्र भेजकर पूरे मामले की जानकारी दी है और उनसे जांच में सहयोग का आग्रह किया गया है।  

फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनाने वाला गिरोह बेहद शातिर था। वह लाइसेंस बनवाने वालों से 50 हजार रुपये लेता था। फर्जीवाड़ा इतनी चालाकी से किया जाता था कि लाइसेंस बनवाने वालों को पता ही नहीं होता था। वह फर्जी लाइसेंस को असली मानकर प्रयोग करते थे।

गिरोह के सदस्य फर्जी लाइसेंस पर शस्त्र भी जारी कराते थे। उसको विश्वास दिलाने के लिए बुलंदशहर कलक्ट्रेट ले जाकर वेरीफिकेशन भी कराया जाता था। हापुड़ में बदमाशों के पास पकड़े गए दो लाइसेंसी रिवाल्वरों के नंबर यदि मिटे से नहीं होते तो पुलिस उनकी जांच ही नहीं कराती। इस जांच में कानपुर आर्डिनेंस फैक्ट्री से रिपोर्ट आने के बाद ही पुलिस ने फर्जीवाड़े की जांच शुरू की थी।

पंडित गन हाउस के मालिक अरुण शर्मा और बछलौता के मुकेश शर्मा ने पुलिस पूछताछ में बताया कि दोनों ने फर्जी लाइसेंस बनाकर रातोंरात करोड़पति बनने का सपना देखा था। उन्हें पता था कि हाईकोर्ट ने शस्त्र लाइसेंस पर रोक लगा रखी है, लेकिन जिन लोगों को शस्त्र लाइसेंस बनवाने की जल्दी रहती थी, वह 40 -50 हजार रुपये दे देते थे।

10-15 दिन बाद शस्त्र धारक का बुलंदशहर कलक्ट्रेट में जाकर वैरीफिकेशन कराते थे और फर्जी मोहर लगाकर उसका लाइसेंस तैयार करके देते थे। यदि हाईकोर्ट की रोक लगी नहीं होती तो इस फर्जीवाड़े को पकड़ना आसान नहीं होता। आरोपियों ने रोक लगने के बाद की तारीखों में लाइसेंस जारी कर दिए थे।

एसपी अलंकृता सिंह ने बताया कि  बुलंदशहर में इस प्रकार के कितने लाइसेंस बने हैं, उनकी जांच के लिए बुलंदशहर के एसएसपी को पत्र लिखा है। हापुड़ जिले में ऐसे कितने लाइसेंस बने हैं, उनकी भी जांच शुरू करा दी गई है।


अरूण की वर्ष 2015 में दुकान हो चुकी है सील
हापुड़। सीओ पिलखुवा शैलेंद्र राठौर ने बताया कि अरूण कुमार शर्मा की दुकान पर पुलिस ने जांच के दौरान दस कारतूस अधिक पाये थे। जिसके बाद उसकी दुकान को सील करने की कार्रवाई कर दी गई थी। अब हापुड़ एसपी के माध्यम से जो पत्र बुलंदशहर प्रशासन को भेजा गया है,उसमें यह भी अनुरोध किया गया है कि अरूण की शस्त्र दुकान का लाइसेंस निरस्त भी किया जाए।

तीनों अपराधियों की खोली जाएगी हिस्ट्रीशीट
 एसपी हापुड़ अलंकृता सिंह ने बताया कि तीनों शातिर किस्म के अपराधी है। जिनकी हिस्ट्रीशीट खोलने के जिले पुलिस को निर्देश दिए गए हैं।
गौरव शर्मा अनिल त्यागी 24एचपीआर05
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed