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दरिंदों का शिकार बनी मासूम बच्ची की मौत पर दुआ को नहीं उठे हाथ
Updated Fri, 07 Sep 2018 12:20 AM IST
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दरिंदों का शिकार बनी मासूम बच्ची
हापुड़। मोहल्ला फूलगढ़ी में बुुधवार को मासूम बेटी की हत्या और उसके भाई की गर्दन रेत कर हत्या की कोशिश करने वाले घर के अंदर से रुक रुक कर मासूमों की मां और अन्य परिजनों के बिलखने की आवाज से जब सन्नाटा टूटता है, तब उधर से गुजरने वालों का दिल उस परिवार पर टूटे पहाड़ की कल्पना मात्र से ही कांप उठता है।
यह बात अलग है कि दरिंदों का शिकार बनी शहर की मासूम बेटी की मौत पर उसकी आत्मा की शांति के लिए किसी के हाथ नहीं उठे। यहां तक कि जिले की कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी महिला हैं, जिनकी ओर से भी कोई शोक संवेदना उक्त परिवार के प्रति व्यक्त नहीं की गई। हालांकि एक अधिकारी ने यह कहकर पल्ला झाड़ने का प्रयास किया कि बुधवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग में वरिष्ठ अधिकारी व्यस्त थे। वैसे भी यह मामला पुलिस विभाग से संबंधित है, लेकिन वह शायद यह भूल गए कि कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी प्रशासनिक अफसरों की भी होती है।
शायद इस घटना के बाद कोई बवाल नहीं होने के कारण प्रशासनिक अफसरों ने पीड़ित परिवार से मिलकर सांत्वना देना भी जरूरी नहीं समझा। अगर इसी तरह का कांड दिल्ली, जम्मू काश्मीर, मध्य प्रदेश, राजस्थान आदि देश के किसी कोने में हो जाता तो जगह-जगह मोमबत्तियां जलायी जातीं या फिर हाथों में नारे लिखी तख्तियां लेकर जुलूस निकाले जाते।
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समाचार पत्रों के दफ्तरों में विज्ञप्तियों के अंबार लग जाते, लेकिन हापुड़ की बेटी को किसी भी संगठन या समिति ने शोकसभा कर उसकी आत्मा की शांति के लिए दुआ नहीं की। वह तो इस दुनिया से अकाल ही चली गई, उसे किसी से अब कोई गिला शिकवा नहीं रहेगा। लेकिन कम से काम आप अपनी आत्मा की आवाज पर उसकी आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन जरूर रख सकते हैं।
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हापुड़। मोहल्ला फूलगढ़ी में बुुधवार को मासूम बेटी की हत्या और उसके भाई की गर्दन रेत कर हत्या की कोशिश करने वाले घर के अंदर से रुक रुक कर मासूमों की मां और अन्य परिजनों के बिलखने की आवाज से जब सन्नाटा टूटता है, तब उधर से गुजरने वालों का दिल उस परिवार पर टूटे पहाड़ की कल्पना मात्र से ही कांप उठता है।
यह बात अलग है कि दरिंदों का शिकार बनी शहर की मासूम बेटी की मौत पर उसकी आत्मा की शांति के लिए किसी के हाथ नहीं उठे। यहां तक कि जिले की कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी महिला हैं, जिनकी ओर से भी कोई शोक संवेदना उक्त परिवार के प्रति व्यक्त नहीं की गई। हालांकि एक अधिकारी ने यह कहकर पल्ला झाड़ने का प्रयास किया कि बुधवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग में वरिष्ठ अधिकारी व्यस्त थे। वैसे भी यह मामला पुलिस विभाग से संबंधित है, लेकिन वह शायद यह भूल गए कि कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी प्रशासनिक अफसरों की भी होती है।
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शायद इस घटना के बाद कोई बवाल नहीं होने के कारण प्रशासनिक अफसरों ने पीड़ित परिवार से मिलकर सांत्वना देना भी जरूरी नहीं समझा। अगर इसी तरह का कांड दिल्ली, जम्मू काश्मीर, मध्य प्रदेश, राजस्थान आदि देश के किसी कोने में हो जाता तो जगह-जगह मोमबत्तियां जलायी जातीं या फिर हाथों में नारे लिखी तख्तियां लेकर जुलूस निकाले जाते।
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समाचार पत्रों के दफ्तरों में विज्ञप्तियों के अंबार लग जाते, लेकिन हापुड़ की बेटी को किसी भी संगठन या समिति ने शोकसभा कर उसकी आत्मा की शांति के लिए दुआ नहीं की। वह तो इस दुनिया से अकाल ही चली गई, उसे किसी से अब कोई गिला शिकवा नहीं रहेगा। लेकिन कम से काम आप अपनी आत्मा की आवाज पर उसकी आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन जरूर रख सकते हैं।