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मजदूर की मौत होने से बकरीद की खुशी मातम में बदली
Updated Wed, 22 Aug 2018 12:13 AM IST
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मजदूर की मौत से बकरीद की खुशी मातम में बदली
गढ़मुक्तेश्वर। कॉलेज का पुराना कमरा तोड़ने के दौरान लेंटर गिरने से मजदूर की मौत होने पर बकरीद की खुशी मातम में बदल गई, जिसके चलते बच्चों के सपने परवान चढ़ने से पहले ही दम तोड़ गए।
बहादुरगढ़ क्षेत्र के गांव सालारपुर के स्वतंत्र भारत इंटर कॉलेज में पुराने गेट समेत कई कमरों का पुर्ननिर्माण का काम चल रहा है। मंगलवार की शाम पुराने कमरे तोड़ने के दौरान लेंटर भरभराकर गिरने से तीन मजदूर मलबे की चपेट में आ गए थे। जिनमें पड़ौसी गांव पलवाड़ा के मजदूर कलुआ ने गढ़ सीएचसी ले जाने के दौरान रास्ते में ही दम तोड़ दिया। मजदूर कलुवा की हादसे में मौत होने से उसके परिवार में चल रहीं बकरीद मनाने की तैयारी मातम में बदल गईं। पत्नी संजीदा समेत दो बेटे और तीन बेटियों का रो रोकर बुरा हाल है। आबिद, जावेद, आबिदा, सन्नो और नजराना का कहना है कि कामकाज पर जाने के दौरान पिता कलुवा उनसे यह कहकर गए थे कि बकरीद का त्योहार बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाएगा, जिससे जुड़ा सभी सामान देर शाम को वे घर लेकर आ जाएंगे। लेकिन सामान आने से पहले ही पिता की हादसे में मौत की खबर आ गई। पड़ौसियों का कहना है कि कलुवा का मकान भी कच्चा है, जिसकी मौत होने से परिवार के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है। क्योंकि वह एक बेटे के साथ मजदूरी कर परिवार की गुजर बसर करता था।
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गढ़मुक्तेश्वर। कॉलेज का पुराना कमरा तोड़ने के दौरान लेंटर गिरने से मजदूर की मौत होने पर बकरीद की खुशी मातम में बदल गई, जिसके चलते बच्चों के सपने परवान चढ़ने से पहले ही दम तोड़ गए।
बहादुरगढ़ क्षेत्र के गांव सालारपुर के स्वतंत्र भारत इंटर कॉलेज में पुराने गेट समेत कई कमरों का पुर्ननिर्माण का काम चल रहा है। मंगलवार की शाम पुराने कमरे तोड़ने के दौरान लेंटर भरभराकर गिरने से तीन मजदूर मलबे की चपेट में आ गए थे। जिनमें पड़ौसी गांव पलवाड़ा के मजदूर कलुआ ने गढ़ सीएचसी ले जाने के दौरान रास्ते में ही दम तोड़ दिया। मजदूर कलुवा की हादसे में मौत होने से उसके परिवार में चल रहीं बकरीद मनाने की तैयारी मातम में बदल गईं। पत्नी संजीदा समेत दो बेटे और तीन बेटियों का रो रोकर बुरा हाल है। आबिद, जावेद, आबिदा, सन्नो और नजराना का कहना है कि कामकाज पर जाने के दौरान पिता कलुवा उनसे यह कहकर गए थे कि बकरीद का त्योहार बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाएगा, जिससे जुड़ा सभी सामान देर शाम को वे घर लेकर आ जाएंगे। लेकिन सामान आने से पहले ही पिता की हादसे में मौत की खबर आ गई। पड़ौसियों का कहना है कि कलुवा का मकान भी कच्चा है, जिसकी मौत होने से परिवार के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है। क्योंकि वह एक बेटे के साथ मजदूरी कर परिवार की गुजर बसर करता था।
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