{"_id":"5bad2159867a55012c3512bf","slug":"181538072921-hapur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नहर किनारे मिली नवजात, महिला ने अपनाया","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
नहर किनारे मिली नवजात, महिला ने अपनाया
Updated Thu, 27 Sep 2018 11:58 PM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
नहर किनारे मिली नवजात, महिला ने अपनाया
गढ़मुक्तेश्वर। जन्म लेते ही किसी परिवार ने नवजात बच्ची को जंगल में नहर किनारे फेंक दिया। बृहस्पतिवार सुबह बच्ची के रोने की आवाज सुनकर पहुंचे ग्रामीणों ने उसे उठाया। गांव की एक महिला ने बच्ची को गोद ले लिया है।
सिंभावली क्षेत्र के गांव रजापुर के जंगल से होकर निकल रही नहर किनारे बृहस्पतिवार सुबह एक नवजात बच्ची पड़ी हुई थी। बच्ची के रोने की आवाज सुनकर पहुंचे किसान उसे देखकर सन्न रह गए। नहर किनारे लावारिस हालत में नवजात के मिलने की खबर फैलते ही महिला-बच्चों समेत सैकड़ों ग्रामीण की भीड़ लग गई। गांव के लोगों ने आसपास काफी तलाशने की कोशिश की, लेकिन बच्ची के माता-पिता का कोई पता नहीं चल सका। गांव की एक महिला नेमवती ने बच्ची को अपनी संतान की तरह पालने की इच्छा जताई तो मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने सर्व सम्मति से बच्ची को उसकी सुपुर्दगी में दे दिया। ग्राम प्रधान के बेटे निशांत ने बच्ची की परवरिश में हरसंभव आर्थिक मदद का आश्वासन दिया है।
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान बेअसर
किसी मां ने जन्म लेते ही अपनी मासूम बच्ची को भूखा-प्यासा मरने के लिए आखिर नहर किनारे सुनसान जंगल में क्यों फिंकवा दिया, यह सवाल तो फिलहाल एक अनसुलझी पहेली है, लेकिन इससे मोदी और योगी सरकार द्वारा चलाए जा रहे बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की हकीकत भी सामने आ गई है। कुल मिलाकर जन्म लेते ही नवजात को नहर किनारे फेंका जाना सभ्य समाज के महिलाओं के प्रति नजरिये को उजागर करता है। जन जागरूकता के बिना अकेले सरकारी अभियान काफी नहीं हैं।
गढ़मुक्तेश्वर। जन्म लेते ही किसी परिवार ने नवजात बच्ची को जंगल में नहर किनारे फेंक दिया। बृहस्पतिवार सुबह बच्ची के रोने की आवाज सुनकर पहुंचे ग्रामीणों ने उसे उठाया। गांव की एक महिला ने बच्ची को गोद ले लिया है।
सिंभावली क्षेत्र के गांव रजापुर के जंगल से होकर निकल रही नहर किनारे बृहस्पतिवार सुबह एक नवजात बच्ची पड़ी हुई थी। बच्ची के रोने की आवाज सुनकर पहुंचे किसान उसे देखकर सन्न रह गए। नहर किनारे लावारिस हालत में नवजात के मिलने की खबर फैलते ही महिला-बच्चों समेत सैकड़ों ग्रामीण की भीड़ लग गई। गांव के लोगों ने आसपास काफी तलाशने की कोशिश की, लेकिन बच्ची के माता-पिता का कोई पता नहीं चल सका। गांव की एक महिला नेमवती ने बच्ची को अपनी संतान की तरह पालने की इच्छा जताई तो मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने सर्व सम्मति से बच्ची को उसकी सुपुर्दगी में दे दिया। ग्राम प्रधान के बेटे निशांत ने बच्ची की परवरिश में हरसंभव आर्थिक मदद का आश्वासन दिया है।
विज्ञापन
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान बेअसर
किसी मां ने जन्म लेते ही अपनी मासूम बच्ची को भूखा-प्यासा मरने के लिए आखिर नहर किनारे सुनसान जंगल में क्यों फिंकवा दिया, यह सवाल तो फिलहाल एक अनसुलझी पहेली है, लेकिन इससे मोदी और योगी सरकार द्वारा चलाए जा रहे बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की हकीकत भी सामने आ गई है। कुल मिलाकर जन्म लेते ही नवजात को नहर किनारे फेंका जाना सभ्य समाज के महिलाओं के प्रति नजरिये को उजागर करता है। जन जागरूकता के बिना अकेले सरकारी अभियान काफी नहीं हैं।
विज्ञापन