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Hapur News: सीलिएक स्प्रू की चपेट में बालिकाएं, रुका शारीरिक विकास
Thu, 30 Nov 2023 10:28 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
Updated Thu, 30 Nov 2023 10:28 PM IST
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हापुड़। जिले में 10 से 20 साल की बालिकाएं सीलिएक स्प्रू बीमारी की चपेट में हैं। जांच में पाया गया है कि गेहूं, जौ, जेई, राई में पाए जाने वाले ग्लूटेन प्रोटीन के कारण भी बालिकाओं के शरीर में आयरन की कमी से हीमोग्लोबिन का स्तर गिर रहा है। कई अन्य कारण भी सामने आ रहे हैं। आयरन की गोली और सीरप भी कारगर नहीं हो रहा। सीएचसी और जिला अस्पताल में ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ी है।
फिजिशियन डॉ.अशरफ अली ने बताया कि उनकी ओपीडी में अब तक ऐसे 100 से भी अधिक केस आए हैं। 18 साल की उम्र में भी सीलिएक बीमारी से पीड़ित बालिकाएं देखने में आठ वर्ष जैसी लगती हैं। ऐसी बालिकाओं को स्वस्थ करने के लिए पहले उन्हें आयरन की गोलियां और सीरप दिया गया, लेकिन हीमोग्लोबिन नहीं बढ़ा। रिसर्च में पता चला कि गेहूं, जौ, जेई, राई में पाए जाने वाले ग्लूटेन नामक प्रोटीन को उनकी छोटी आंत शोषित ही नहीं कर पा रही है। जिसके चलते शरीर में आयरन नहीं पहुंच पाता। बालिकाओं की एंड्रोस्कॉपी और एक अन्य आवश्यक जांच की गई, जिसमें सीलिएक स्प्रू बीमारी की पुष्टि हुई। इन बालिकाओं को गेहूं, जौ, जेई, राई से बनी रोटी व अन्य उत्पाद छोड़ने की सलाह दी गई, इन अनाजों को छोड़ते ही शारीरिक विकास तो बढ़ा ही हीमोग्लोबिन भी तेजी से बढ़ा।
सीलिएक स्प्रू के लक्षण-
* बार-बार शौच का आना।
* उम्र के हिसाब से शारीरिक विकास नहीं होना।
* हीमोग्लोबिन का स्तर 4 से 6 तक बने रहना।
* पेट दर्द, उल्टियां, भूख न लगना, चिड़चिड़ापन।
* शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक विकास नहीं होना।
मरीजों को इन बीमारियों का भी खतरा
सीलिएक स्प्रू से पीडि़त मरीजों को मधुमेह, त्वचा पर सफेद दाग, थाइराइड, जोड़ों का दर्द, गठिया होने का खतरा सबसे अधिक होता है। ज्यादातर केसों में 10 से 20 साल तक की बालिकाएं और 60 साल से ऊपर के बुजुर्गों में यह बीमारी देखी जा रही है।
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कोट -
गैस्ट्रोलॉजिस्ट डॉ.हरिओम सिंह के अनुसार ऐसे मरीज जब भी गेहूं, जौ, राई, जेई के उत्पादों का सेवन करेंगे, उन्हें समस्या होगी। महज परहेज कर इस बीमारी से आसानी से निजात पाई जा सकती है। अनाज के तौर पर चावल, चना, मक्का, बाजरा, दाल का सेवन कर सकते हैं।
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फिजिशियन डॉ.अशरफ अली ने बताया कि उनकी ओपीडी में अब तक ऐसे 100 से भी अधिक केस आए हैं। 18 साल की उम्र में भी सीलिएक बीमारी से पीड़ित बालिकाएं देखने में आठ वर्ष जैसी लगती हैं। ऐसी बालिकाओं को स्वस्थ करने के लिए पहले उन्हें आयरन की गोलियां और सीरप दिया गया, लेकिन हीमोग्लोबिन नहीं बढ़ा। रिसर्च में पता चला कि गेहूं, जौ, जेई, राई में पाए जाने वाले ग्लूटेन नामक प्रोटीन को उनकी छोटी आंत शोषित ही नहीं कर पा रही है। जिसके चलते शरीर में आयरन नहीं पहुंच पाता। बालिकाओं की एंड्रोस्कॉपी और एक अन्य आवश्यक जांच की गई, जिसमें सीलिएक स्प्रू बीमारी की पुष्टि हुई। इन बालिकाओं को गेहूं, जौ, जेई, राई से बनी रोटी व अन्य उत्पाद छोड़ने की सलाह दी गई, इन अनाजों को छोड़ते ही शारीरिक विकास तो बढ़ा ही हीमोग्लोबिन भी तेजी से बढ़ा।
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सीलिएक स्प्रू के लक्षण-
* बार-बार शौच का आना।
* उम्र के हिसाब से शारीरिक विकास नहीं होना।
* हीमोग्लोबिन का स्तर 4 से 6 तक बने रहना।
* पेट दर्द, उल्टियां, भूख न लगना, चिड़चिड़ापन।
* शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक विकास नहीं होना।
मरीजों को इन बीमारियों का भी खतरा
सीलिएक स्प्रू से पीडि़त मरीजों को मधुमेह, त्वचा पर सफेद दाग, थाइराइड, जोड़ों का दर्द, गठिया होने का खतरा सबसे अधिक होता है। ज्यादातर केसों में 10 से 20 साल तक की बालिकाएं और 60 साल से ऊपर के बुजुर्गों में यह बीमारी देखी जा रही है।
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कोट -
गैस्ट्रोलॉजिस्ट डॉ.हरिओम सिंह के अनुसार ऐसे मरीज जब भी गेहूं, जौ, राई, जेई के उत्पादों का सेवन करेंगे, उन्हें समस्या होगी। महज परहेज कर इस बीमारी से आसानी से निजात पाई जा सकती है। अनाज के तौर पर चावल, चना, मक्का, बाजरा, दाल का सेवन कर सकते हैं।