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बिना ऑडिट कराए दोबारा चुनाव नहीं लड़ पाएंगे ग्राम प्रधान
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बिना ऑडिट कराए दोबारा चुनाव नहीं लड़ पाएंगे ग्राम प्रधान
हापुड़। ग्राम प्रधानों का दोबारा चुनाव लड़ने का सपना अधूरा रह सकता है। गांवों में हुए विकास कार्यों का जब तक ऑडिट पूरा नहीं होगा तब तक वह चुनावी मैदान में नहीं कूद सकेंगे। शासन की ओर से ऐसे प्रधानों पर चुनाव लड़ने के लिए रोक रहेगी। शासन के आदेश पर जिला पंचायत राज विभाग ने ऐसे ग्राम प्रधानों की सूची तैयार करके शत प्रतिशत ग्राम पंचायतों का ऑडिट कराने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
जिले में कुल 273 ग्राम पंचायतें हैं। जिनमें से करीब दो सौ प्रधानों ने ऑडिट नहीं कराया है। शासन की ओर से भेजी जाने वाली ऑडिट टीम को अक्सर ऑडिट करने में विभिन्न कठिनाइयां उठानी पड़ती हैं। जैसा कि शासनादेश है कि केद्रीय वित्त एंव राज्यवित्त आयोग की ओर से जो बजट जारी किया जाता है। आयोग की गाइड लाइन के अनुसार ग्राम पंचायतों द्वारा धन को कैसे खर्च किया गया है, इसका ऑडिट कराया जाना अनिवार्य है। फिर भी इसको लेकर ग्राम पंचायतें रुचि नहीं लेती हैं। फर्जीवाड़ा कहें या कोई ओर कारण ग्राम प्रधान इस मामले में रुचि नहीं लेते।
उन्हें डर रहता है कि कहीं ऑडिट टीम के सामने फर्जीवाड़ा सामने न आ जाए। केंद्रीय वित्त आयोग की ओर से परफारमेंस ग्रांट और राज्य वित्त आयोग की ओर से जारी किया जाने वाला बजट भी ऑडिट की अनुशंसा पर ही ग्राम पंचायतों को दिया जाता है। अब जबकि ग्राम पंचायत चुनाव नजदीक हैं। ऐसे में शासन की ओर से शत प्रतिशत ग्राम पंचायतों के ऑडिट कराने की तैयारी शुरू कर दी गई है। प्रधान यदि दोबारा से चुनाव लडने की मंशा रखते हैं या फिर अपने घर से किसी को लड़ाने की तैयारी कर रहे हैं तो उन्हें ऑडिट से आनाकानी करना महंगा पड़ सकता है। पंचायती राज निदेशक किशन सिंह द्वारा इस संबंध में आदेश जारी कर दिए गए हैं। ऐसे प्रधान चुनाव लड़ने से वंचित रह जाएंगे।
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डीपीआरओ यावर अब्बास ने बताया कि इस संबंध में प्रधानों को निर्देशित कर दिया गया है। लापरवाही बरतने वाले प्रधान दोबारा चुनाव नहीं लड़ सकेंगे।
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हापुड़। ग्राम प्रधानों का दोबारा चुनाव लड़ने का सपना अधूरा रह सकता है। गांवों में हुए विकास कार्यों का जब तक ऑडिट पूरा नहीं होगा तब तक वह चुनावी मैदान में नहीं कूद सकेंगे। शासन की ओर से ऐसे प्रधानों पर चुनाव लड़ने के लिए रोक रहेगी। शासन के आदेश पर जिला पंचायत राज विभाग ने ऐसे ग्राम प्रधानों की सूची तैयार करके शत प्रतिशत ग्राम पंचायतों का ऑडिट कराने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
जिले में कुल 273 ग्राम पंचायतें हैं। जिनमें से करीब दो सौ प्रधानों ने ऑडिट नहीं कराया है। शासन की ओर से भेजी जाने वाली ऑडिट टीम को अक्सर ऑडिट करने में विभिन्न कठिनाइयां उठानी पड़ती हैं। जैसा कि शासनादेश है कि केद्रीय वित्त एंव राज्यवित्त आयोग की ओर से जो बजट जारी किया जाता है। आयोग की गाइड लाइन के अनुसार ग्राम पंचायतों द्वारा धन को कैसे खर्च किया गया है, इसका ऑडिट कराया जाना अनिवार्य है। फिर भी इसको लेकर ग्राम पंचायतें रुचि नहीं लेती हैं। फर्जीवाड़ा कहें या कोई ओर कारण ग्राम प्रधान इस मामले में रुचि नहीं लेते।
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उन्हें डर रहता है कि कहीं ऑडिट टीम के सामने फर्जीवाड़ा सामने न आ जाए। केंद्रीय वित्त आयोग की ओर से परफारमेंस ग्रांट और राज्य वित्त आयोग की ओर से जारी किया जाने वाला बजट भी ऑडिट की अनुशंसा पर ही ग्राम पंचायतों को दिया जाता है। अब जबकि ग्राम पंचायत चुनाव नजदीक हैं। ऐसे में शासन की ओर से शत प्रतिशत ग्राम पंचायतों के ऑडिट कराने की तैयारी शुरू कर दी गई है। प्रधान यदि दोबारा से चुनाव लडने की मंशा रखते हैं या फिर अपने घर से किसी को लड़ाने की तैयारी कर रहे हैं तो उन्हें ऑडिट से आनाकानी करना महंगा पड़ सकता है। पंचायती राज निदेशक किशन सिंह द्वारा इस संबंध में आदेश जारी कर दिए गए हैं। ऐसे प्रधान चुनाव लड़ने से वंचित रह जाएंगे।
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डीपीआरओ यावर अब्बास ने बताया कि इस संबंध में प्रधानों को निर्देशित कर दिया गया है। लापरवाही बरतने वाले प्रधान दोबारा चुनाव नहीं लड़ सकेंगे।