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बाबूगढ़ बिजलीघर सेना ने किया सील!
Hapur
Updated Thu, 20 Mar 2014 05:32 AM IST
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हापुड़। ईबीएस बाबूगढ़ की जमीन पर एक अनुबंध के तहत बने 132केवी बिजलीघर से जुड़े 33केवी बिजलीघर को बुधवार को अपराह्न करीब दो बजे सेना की टीम ने सील कर दिया। इससे टाउन एरिया सहित करीब दस गांव के हजारों घरों में बिजली सप्लाई ठप हो गई तथा निगम के अफसरों में भी हड़कंप मचा हुआ है। हालांकि सैन्य अधिकारी सील लगाने से इंकार करते रहे जबकि बिजली निगम के अधिकारियों का दावा है कि अनुबंध तथा बिलों का विवाद था जिसे वार्ता कर सुलझाया जा रहा है। इसी के बाद शाम को करीब 6 बजे सील सेना ने अपनी सील हटा ली।
नेशनल हाईवे-24 पर 132केवी का बिजलीघर स्थित है। इसी के बराबर में बाबूगढ़ 33केवी का बिजलीघर स्थित है। इस बिजलीघर से कस्बा में स्थित ईबीएस कैंट, इंस्डस्ट्रीयल एरिया सहित गांव ततारपुर, सीतादेई, बांगडपुर, बछलौता, श्यामपुर, ददायरा, गजालपुर, मलकपुर, हबिसपुर बिगास व सिमरौली गांवों को बिजली आपूर्ति दी जाती है। बुधवार अपराह्न करीब दो बजे ईबीएस बाबूगढ़ के सैनिकों की टीम बिजलीघर पर पहुंची और वहां काम कर रहे कर्मचारियों को बाहर निकाल दिया और बिजलीघर पर सील लगा दी। कर्मचरियों ने सेना के जवानों की हरकत को देखा तो तत्काल पावर कारपोरेशन के अधिकारियों को सूचित किया। बिजलीघर बंद होते ही दस गांवों व कस्बा की बिजली आपूर्ति बाधित हो गई।ईबीएस बाबूगढ़ के एक अधिकारी का कहना कि वर्ष 1976 में पावर कारपोरेशन के अधिकारियों को यह जमीन इसलिए दी गई थी कि ताकि कैंट एरिया को 24 घंटा बिजली आपूर्ति मिले। ऐसा नहीं होने के साथ साथ बिजली बिलों में भारी गड़बड़ी आ रही थी। लेकिन वह सील लगाने की कार्यवाही से इंकार करते रहे। इस पर सवाल यह था कि सील किसने लगाई। दिलचस्प बात यह है कि जब तक सील लगी थी, सैन्य अधिकारियों ने फोन ही नहीं उठाए। बिजली आपूर्ति चालू होने के बाद एक मेजर से बात की गयी तो वह कहने लगे कि कौन कहता सील लगाई गई। हमारे यहां तो बिजली आ रही है।
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नेशनल हाईवे-24 पर 132केवी का बिजलीघर स्थित है। इसी के बराबर में बाबूगढ़ 33केवी का बिजलीघर स्थित है। इस बिजलीघर से कस्बा में स्थित ईबीएस कैंट, इंस्डस्ट्रीयल एरिया सहित गांव ततारपुर, सीतादेई, बांगडपुर, बछलौता, श्यामपुर, ददायरा, गजालपुर, मलकपुर, हबिसपुर बिगास व सिमरौली गांवों को बिजली आपूर्ति दी जाती है। बुधवार अपराह्न करीब दो बजे ईबीएस बाबूगढ़ के सैनिकों की टीम बिजलीघर पर पहुंची और वहां काम कर रहे कर्मचारियों को बाहर निकाल दिया और बिजलीघर पर सील लगा दी। कर्मचरियों ने सेना के जवानों की हरकत को देखा तो तत्काल पावर कारपोरेशन के अधिकारियों को सूचित किया। बिजलीघर बंद होते ही दस गांवों व कस्बा की बिजली आपूर्ति बाधित हो गई।ईबीएस बाबूगढ़ के एक अधिकारी का कहना कि वर्ष 1976 में पावर कारपोरेशन के अधिकारियों को यह जमीन इसलिए दी गई थी कि ताकि कैंट एरिया को 24 घंटा बिजली आपूर्ति मिले। ऐसा नहीं होने के साथ साथ बिजली बिलों में भारी गड़बड़ी आ रही थी। लेकिन वह सील लगाने की कार्यवाही से इंकार करते रहे। इस पर सवाल यह था कि सील किसने लगाई। दिलचस्प बात यह है कि जब तक सील लगी थी, सैन्य अधिकारियों ने फोन ही नहीं उठाए। बिजली आपूर्ति चालू होने के बाद एक मेजर से बात की गयी तो वह कहने लगे कि कौन कहता सील लगाई गई। हमारे यहां तो बिजली आ रही है।
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