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तलाक के बिना औरत का दूसरा निकाह नाजायज
Hapur
Updated Sun, 05 Jan 2014 05:49 AM IST
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गढ़मुक्तेश्वर। गांव दौताई में रहने वाले एक युवक ने दारुल उलूम देवबंद से फतवा मंगाया है कि तलाक हुए बिना ही उसकी बीवी से गांव के ही एक दूसरे युवक ने निकाह कर लिया है। मजहबी उलेमाओं ने तलाक के बिना हुए दूसरे निकाह को पूरी तरह शरई कानून के विपरीत और नाजायज करार दिया है।
गांव दौताई निवासी मुहम्मद तारिक ने दारुल उलूम देवबंद के फतवा विभाग में एक पत्र भेजा था, जिसमें उल्लेख किया है कि 5 अप्रैल 2011 को उसने गांव में रहने वाली एक लड़की से शरई तौर तरीके पर निकाह किया था, परंतु परिजनों की गुहार पर दुल्हन की रुखसती नहीं हो पाई थी। हालांकि उसका पत्नी के घर आना जाना रहता था और वह ही उसकी जरूरत भी पूरी करता था। मुहम्मद तारिक का कहना है कि कोई भी तलाक हुए बिना 28 दिसंबर को उसकी पत्नी का गांव में ही रहने वाले एक युवक ने निकाह कर लिया है। दारूल उलूम देवबंद के फतवा विभाग में कार्यरत मुफ्ती वकार और मुफ्ती महमूद द्वारा भेजे गए जवाब में तलाक हुए बिना औरत का दूसरा निकाह कराए जाने को पूरी तरह शरई कानून के खिलाफ और नाजायज करार दिया है।
मजहबी उलेमाओं ने साथ ही यह हिदायत भी दी है कि जिस मौलाना ने तलाक हुए बिना औरत का निकाह पढ़ाया है, वह अलल एलान लोगों के सामने इसे गलत होने का एलान करे, ताकि लोगों पर निकाह गलत होने की सच्चाई जाहिर हो सके।
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गांव दौताई निवासी मुहम्मद तारिक ने दारुल उलूम देवबंद के फतवा विभाग में एक पत्र भेजा था, जिसमें उल्लेख किया है कि 5 अप्रैल 2011 को उसने गांव में रहने वाली एक लड़की से शरई तौर तरीके पर निकाह किया था, परंतु परिजनों की गुहार पर दुल्हन की रुखसती नहीं हो पाई थी। हालांकि उसका पत्नी के घर आना जाना रहता था और वह ही उसकी जरूरत भी पूरी करता था। मुहम्मद तारिक का कहना है कि कोई भी तलाक हुए बिना 28 दिसंबर को उसकी पत्नी का गांव में ही रहने वाले एक युवक ने निकाह कर लिया है। दारूल उलूम देवबंद के फतवा विभाग में कार्यरत मुफ्ती वकार और मुफ्ती महमूद द्वारा भेजे गए जवाब में तलाक हुए बिना औरत का दूसरा निकाह कराए जाने को पूरी तरह शरई कानून के खिलाफ और नाजायज करार दिया है।
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मजहबी उलेमाओं ने साथ ही यह हिदायत भी दी है कि जिस मौलाना ने तलाक हुए बिना औरत का निकाह पढ़ाया है, वह अलल एलान लोगों के सामने इसे गलत होने का एलान करे, ताकि लोगों पर निकाह गलत होने की सच्चाई जाहिर हो सके।
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