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जगमगाई गंगा
Hapur
Updated Sun, 17 Nov 2013 05:44 AM IST
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लाखों श्रद्धालुओं ने दीपदान कर दिवंगत परिजनों के लिए मांगा मोक्ष
गढ़मुक्तेश्वर। गंगा मेला शनिवार को पूरे शबाब पर था। शाम ढलते ही लाखों श्रद्धालु गंगा तट पर थे। हाथों में दीये और मन में दिवंगत परिजनों की आत्मिक शांति और मोक्ष की प्रार्थना। सूर्य अस्त होते ही जब दीये प्रवाहित हुए तो गंगा जगमगा उठी। रोशनी की चादर मां गंगा का श्रंगार हो गई। घाट से घाट मिल गए और मेले से मेला। एक ऐसा नजारा जिसे देख लोग ठगे से खड़े रह गए। यह अलौकिक दृश्य था कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष चतुर्दशी की संध्या का जब लाखों ने दीपदान किया।
उत्तर भारत के कोने-कोने से आए लोगों की आस्था ने गंगातट को हर-हर गंगे से गुंजाएमान कर दिया। आरती हुई और शुरू हो गया गंगा पूजन का सिलसिला जो देर रात तक चलता रहा। दीपदान के वक्त दीयों की रोशनी ने गंगा का प्रवाह दिखाया, जीवनदायिनी का प्रभाव भी और मोक्षदायिनी का मार्ग भी। गंगा तट पर मौजूद बड़ों-बूढ़ों, महिलाओं, युवाओं और बच्चों में गजब का उत्साह था, श्रद्धा और आस्था भी। यह भक्ति की शक्ति थी जिसने खादर के गंगा मेले, ब्रजघाट के शहरी मेले और गंगा पारी तिगरी के मेले को एक कर दिया। गंगा पुल से मिले नजारे में अब तक अलग-अलग दिख रहे मेले एक हो गए। रोशनी में जगमगाते तीनों छोर के तंबुओं के शहर एक हो गए और जरिया बना दीपों का दरिया जिसे गंगा मइया की जय कह कर सबने हाथ जोड़ लिए। नमन किया और शांति-सौहार्द और स्मृद्धि की कामना की।
यूं तो गंगा मेले में रौनक बीते दो दिनों से चरम पर थी लेकिन शनिवार दोपहरबाद से रौनक कुछ और ही थी। मेला मार्गों पर चलने में भी दिक्कत हुई लेकिन आस्था ने सबको गंगा मइया के दर्शन करा दिए...स्नान भी और पूजन भी। सभी अलौकिक दृश्य को कैमरे में कैद करने की कोशिश में थे लेकिन भला उस पूरे सीन को कौन कैमरे में पूरी तरह कैद कर पाया।
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गढ़मुक्तेश्वर। गंगा मेला शनिवार को पूरे शबाब पर था। शाम ढलते ही लाखों श्रद्धालु गंगा तट पर थे। हाथों में दीये और मन में दिवंगत परिजनों की आत्मिक शांति और मोक्ष की प्रार्थना। सूर्य अस्त होते ही जब दीये प्रवाहित हुए तो गंगा जगमगा उठी। रोशनी की चादर मां गंगा का श्रंगार हो गई। घाट से घाट मिल गए और मेले से मेला। एक ऐसा नजारा जिसे देख लोग ठगे से खड़े रह गए। यह अलौकिक दृश्य था कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष चतुर्दशी की संध्या का जब लाखों ने दीपदान किया।
उत्तर भारत के कोने-कोने से आए लोगों की आस्था ने गंगातट को हर-हर गंगे से गुंजाएमान कर दिया। आरती हुई और शुरू हो गया गंगा पूजन का सिलसिला जो देर रात तक चलता रहा। दीपदान के वक्त दीयों की रोशनी ने गंगा का प्रवाह दिखाया, जीवनदायिनी का प्रभाव भी और मोक्षदायिनी का मार्ग भी। गंगा तट पर मौजूद बड़ों-बूढ़ों, महिलाओं, युवाओं और बच्चों में गजब का उत्साह था, श्रद्धा और आस्था भी। यह भक्ति की शक्ति थी जिसने खादर के गंगा मेले, ब्रजघाट के शहरी मेले और गंगा पारी तिगरी के मेले को एक कर दिया। गंगा पुल से मिले नजारे में अब तक अलग-अलग दिख रहे मेले एक हो गए। रोशनी में जगमगाते तीनों छोर के तंबुओं के शहर एक हो गए और जरिया बना दीपों का दरिया जिसे गंगा मइया की जय कह कर सबने हाथ जोड़ लिए। नमन किया और शांति-सौहार्द और स्मृद्धि की कामना की।
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यूं तो गंगा मेले में रौनक बीते दो दिनों से चरम पर थी लेकिन शनिवार दोपहरबाद से रौनक कुछ और ही थी। मेला मार्गों पर चलने में भी दिक्कत हुई लेकिन आस्था ने सबको गंगा मइया के दर्शन करा दिए...स्नान भी और पूजन भी। सभी अलौकिक दृश्य को कैमरे में कैद करने की कोशिश में थे लेकिन भला उस पूरे सीन को कौन कैमरे में पूरी तरह कैद कर पाया।
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