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सरकार के तेवर कड़े मिल प्रबंधन मौन
Hapur
Updated Sun, 17 Nov 2013 05:44 AM IST
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हापुड़। प्रदेश सरकार की 22 नवंबर से चीनी मिलों में पेराई सत्र प्रारंभ करने की कड़ी चेतावनी के बाद भी चीनी मिल प्रबंधन ने अभी तक अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं की है। इतना ही नहीं मिलों के क्रय केन्द्र भी स्थापित नहीं किये गये हैं। ऐसे में चीनी मिल निर्धारित समय पर चल पायेेंगी, इसके आसार कम है। उधर मिलों के नहीं चलने से गन्ना उत्पादक किसानों में बेचैनी बढ़ रही है।
उल्लेखनीय है कि जिले के किसानोें का गन्ना सिंभावली, ब्रजनाथपुर, मोदीनगर, नगलामल और अगौता चीनी मिल के क्रय केन्द्रों पर पड़ता है। इन पांचों चीनी मिलों ने अभी तक मिलों को चालू करने के बारे में अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं की है। बल्कि इन मिलों के प्रबंधकों का एक ही जवाब है कि मिल मालिकों के दिशा निर्देशों के अनुसार ही आगे की कार्यवाही होगी। एक चीनी मिल के वरिष्ठ अधिकारी से बातचीत किये जाने पर उनका कहना था कि मिल प्रबंधकों, गन्ना आयुक्त और सरकार के सामने गन्ना भाव को लेकर कई बार वार्ता हो चुकी है जो बेनतीजा रही है। मिलों में पेेराई सत्र शुरू करने से पहले क्रय केन्द्रों की स्थापना के लिए लगभग एक सप्ताह का समय चाहिए लेकिन अभी तक मिलों ने इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया है । पेडी गन्ना काटकर खेत खाली करने के लिये किसान क्रेशरों पर गन्ना डालने के लिए मजबूर हैं। जबकि क्रेशरों पर गन्ने का भाव 170 रुपये क्विंटल बेचने कोे मजबूर हैं जिससे भी किसानों को भारी नुकसान हो रहा है।
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उल्लेखनीय है कि जिले के किसानोें का गन्ना सिंभावली, ब्रजनाथपुर, मोदीनगर, नगलामल और अगौता चीनी मिल के क्रय केन्द्रों पर पड़ता है। इन पांचों चीनी मिलों ने अभी तक मिलों को चालू करने के बारे में अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं की है। बल्कि इन मिलों के प्रबंधकों का एक ही जवाब है कि मिल मालिकों के दिशा निर्देशों के अनुसार ही आगे की कार्यवाही होगी। एक चीनी मिल के वरिष्ठ अधिकारी से बातचीत किये जाने पर उनका कहना था कि मिल प्रबंधकों, गन्ना आयुक्त और सरकार के सामने गन्ना भाव को लेकर कई बार वार्ता हो चुकी है जो बेनतीजा रही है। मिलों में पेेराई सत्र शुरू करने से पहले क्रय केन्द्रों की स्थापना के लिए लगभग एक सप्ताह का समय चाहिए लेकिन अभी तक मिलों ने इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया है । पेडी गन्ना काटकर खेत खाली करने के लिये किसान क्रेशरों पर गन्ना डालने के लिए मजबूर हैं। जबकि क्रेशरों पर गन्ने का भाव 170 रुपये क्विंटल बेचने कोे मजबूर हैं जिससे भी किसानों को भारी नुकसान हो रहा है।
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