{"_id":"112-22239","slug":"Hapur-22239-112","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब गंगा होने लगी काली","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब गंगा होने लगी काली
Hapur
Updated Sun, 11 Nov 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
गढ़मुक्तेश्वर। गंगा की रेती में लगने वाले उत्तर भारत के प्रसिद्ध कार्तिक पूर्णिमा गढ़ गंगा मेले और जनवरी में भरने वाले इलाहाबाद कुंभ के श्रद्धालुओं को इस बार शायद ही गंगा में डुबकी लगाने का मौका मिले। वजह, गंगा में डाले जा रहे फैक्ट्रियों के प्रदूषित पानी से मैली हो चुकी मोक्षदायिनी गंगा काली नदी का रूप धारण करती जा रही है। बिजनौर और बुलंदशहर के बीच गंगा कुछ ऐसी ही नजर आती है। यदि गंगा में गिरने वाले नालों को नहीं रोका गया तो करीब एक करोड़ श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत होंगी। क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी भी कहते हैं कि गंगा जल नहाने लायक है, परंतु पानी पीने लायक नहीं है। बहरहाल, कोई पीता भी नहीं है।
गंगा का जल स्तर इस समय समुन्द्र तल से 196.46 मीटर पर है, जिसके चलते ब्रजघाट, तिगरी (अमरोहा) और गढ़ खादर में गंगा में पानी काफी कम हो गया है। बिजनौर-बुलंदशहर के बीच कुछ फैक्ट्रियों का पानी डाले जाने से गंगा जल भी काला हो रहा है। स्थानीय लोगों के विरोध के बाद भी सरकारी तंत्र की आंखें नहीं खुल रही हैं, जबकि इसी माह कार्तिक पूर्णिमा गंगा स्नान मेले पर शुक्रताल (मेरठ), ब्रजघाट, गढ़ खादर, तिगरी (अमरोहा), भगवानपुर(बुलंदशहर), अनूपशहर(बुलंदशहर) के घाट पर करीब एक करोड़ श्रद्धालु गोता लगाएंगे। जनवरी 2013 में इलाहाबाद कुंभ में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेंगे। लेकिन, शासन एवं प्रशासन ने गंगा में पड़ रही गंदगी से निजात दिलाने के लिए अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है।
पूठ के पास गिर रहा नाला
पुष्पावती पूठ पर एक नाला गंगा में जाकर मिल रहा है। इस नाले से हापुड़ और बुलंदशहर जनपद की फैक्ट्रियों का प्रदूषित पानी जाकर गंगा में समा रहा है, जिससे गंगा काली नदी का रूप धारण करती जा रही है। इस नाले से पहले भी ब्रजघाट में गंगा जल काला नजर आता है।
विज्ञापन
इनकी सुनिए
क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी टीयू खान कहते हैं कि काला पानी प्रदूषित नहीं होता। वह बताते हैं कि गंगा जलनहाने लायक है, परंतु पीने लायक नहीं है। बहरहाल, कोई पीता भी नहीं है। कुछ दिन पूर्व सर्वे किया गया था, तब हापुड़ जनपद में कहीं कैमिकल युक्त पानी गंगा में नहीं गिर रहा था। वह कहते हैं कि गंगा जल के प्रति माह नमूने लिए जाते हैं। वहीं पर्यावरण विद् डॉ. अब्बास अली कहते हैं कि बीओटी की मात्रा बढ़ने से गंगा का पानी पीने लायक नहीं है।
शायद मिल जाए कोई भागीरथ
गढ़ गंगा मेले पर होने वाली गंगा संसद की आवाज इलाहाबाद कुंभ तक पहुंचेगी
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सहित केन्द्र और प्रदेश के कई मंत्री पहुंच सकते हैं मेले में
गढ़मुक्तेश्वर। गंगा को प्रदूषण मुक्त करने का मामला लोकसभा में कई बार उठा। योजनाएं बनाई गईं, करोड़ों रुपये स्वीकृत हुए, परंतु गंगा आज भी प्रदूषण से कराह रही है। गंगा मैया की पवित्रता को लेकर इतिहास में पहली बार गंगा किनारे जल जंगल और जमीन का चिंतन गंगा संसद में होने जा रहा है। इसमें केंद्र और प्रदेश के कई राजनीतिज्ञों के हिस्सा लेने की उम्मीद है। शायद इन्हीं में से कोई भागीरथ गंगा को मिल जाए।
गंगा संसद कार्यक्रम के कोआर्डिनेटर भारत भूषण गर्ग ने बताया कि गंगा सदन में विश्व स्तर के विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे, जो चार दिन मात्र चिंतन कर उसे असलीजामा पहनाने का काम करेंगे। जल पुरुष राजेन्द्र चौधरी का कहना है कि गंगा संसद का मामला गढ़ गंगा मेला तक सीमित नहीं रहेगा , यह संदेश सापेक्ष गति को प्राप्त होकर इलाहाबाद कुम्भ तक पहुंचेगा और गंगा को फिर से निर्मल तथा अविरल धारा में परिवर्तित कराया जाएगा।
गर्ग ने बताया कि गंगा संसद में प्रदेश मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी आएंगे, जिनसे जल पुरुष राजेन्द्र चौधरी की वार्ता हो गई है। तीन-चार दिन में मुख्यमंत्री का कार्यक्रम प्रशासन के पास आ जाएगा।
मेला मानचित्र पर आ सकता है मेला
भगवान कृष्ण के समय से लगने वाले कार्तिक पूर्णिमा गंगा स्नान मेले पर प्रदेश सरकार की नजरें इनायत र्हुइं तो शायद इस बार इसको मेला मानचित्र पर पहुंचने की स्वीकृति मिल सकती है।
डीएम भी दे गए संकेत
मेला मीटिंग में डीएम चक्रपाणि यादव ने बताया कि इस बार मेले में वीआईपी के अलावा वीवीआईपी कैंप भी लगाया जाए, क्योंकि प्रदेश और केन्द्र से कई मंत्री, सचिवों के आने की उम्मीद है।
विज्ञापन
गंगा का जल स्तर इस समय समुन्द्र तल से 196.46 मीटर पर है, जिसके चलते ब्रजघाट, तिगरी (अमरोहा) और गढ़ खादर में गंगा में पानी काफी कम हो गया है। बिजनौर-बुलंदशहर के बीच कुछ फैक्ट्रियों का पानी डाले जाने से गंगा जल भी काला हो रहा है। स्थानीय लोगों के विरोध के बाद भी सरकारी तंत्र की आंखें नहीं खुल रही हैं, जबकि इसी माह कार्तिक पूर्णिमा गंगा स्नान मेले पर शुक्रताल (मेरठ), ब्रजघाट, गढ़ खादर, तिगरी (अमरोहा), भगवानपुर(बुलंदशहर), अनूपशहर(बुलंदशहर) के घाट पर करीब एक करोड़ श्रद्धालु गोता लगाएंगे। जनवरी 2013 में इलाहाबाद कुंभ में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेंगे। लेकिन, शासन एवं प्रशासन ने गंगा में पड़ रही गंदगी से निजात दिलाने के लिए अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है।
विज्ञापन
पूठ के पास गिर रहा नाला
पुष्पावती पूठ पर एक नाला गंगा में जाकर मिल रहा है। इस नाले से हापुड़ और बुलंदशहर जनपद की फैक्ट्रियों का प्रदूषित पानी जाकर गंगा में समा रहा है, जिससे गंगा काली नदी का रूप धारण करती जा रही है। इस नाले से पहले भी ब्रजघाट में गंगा जल काला नजर आता है।
विज्ञापन
इनकी सुनिए
क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी टीयू खान कहते हैं कि काला पानी प्रदूषित नहीं होता। वह बताते हैं कि गंगा जलनहाने लायक है, परंतु पीने लायक नहीं है। बहरहाल, कोई पीता भी नहीं है। कुछ दिन पूर्व सर्वे किया गया था, तब हापुड़ जनपद में कहीं कैमिकल युक्त पानी गंगा में नहीं गिर रहा था। वह कहते हैं कि गंगा जल के प्रति माह नमूने लिए जाते हैं। वहीं पर्यावरण विद् डॉ. अब्बास अली कहते हैं कि बीओटी की मात्रा बढ़ने से गंगा का पानी पीने लायक नहीं है।
शायद मिल जाए कोई भागीरथ
गढ़ गंगा मेले पर होने वाली गंगा संसद की आवाज इलाहाबाद कुंभ तक पहुंचेगी
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सहित केन्द्र और प्रदेश के कई मंत्री पहुंच सकते हैं मेले में
गढ़मुक्तेश्वर। गंगा को प्रदूषण मुक्त करने का मामला लोकसभा में कई बार उठा। योजनाएं बनाई गईं, करोड़ों रुपये स्वीकृत हुए, परंतु गंगा आज भी प्रदूषण से कराह रही है। गंगा मैया की पवित्रता को लेकर इतिहास में पहली बार गंगा किनारे जल जंगल और जमीन का चिंतन गंगा संसद में होने जा रहा है। इसमें केंद्र और प्रदेश के कई राजनीतिज्ञों के हिस्सा लेने की उम्मीद है। शायद इन्हीं में से कोई भागीरथ गंगा को मिल जाए।
गंगा संसद कार्यक्रम के कोआर्डिनेटर भारत भूषण गर्ग ने बताया कि गंगा सदन में विश्व स्तर के विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे, जो चार दिन मात्र चिंतन कर उसे असलीजामा पहनाने का काम करेंगे। जल पुरुष राजेन्द्र चौधरी का कहना है कि गंगा संसद का मामला गढ़ गंगा मेला तक सीमित नहीं रहेगा , यह संदेश सापेक्ष गति को प्राप्त होकर इलाहाबाद कुम्भ तक पहुंचेगा और गंगा को फिर से निर्मल तथा अविरल धारा में परिवर्तित कराया जाएगा।
गर्ग ने बताया कि गंगा संसद में प्रदेश मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी आएंगे, जिनसे जल पुरुष राजेन्द्र चौधरी की वार्ता हो गई है। तीन-चार दिन में मुख्यमंत्री का कार्यक्रम प्रशासन के पास आ जाएगा।
मेला मानचित्र पर आ सकता है मेला
भगवान कृष्ण के समय से लगने वाले कार्तिक पूर्णिमा गंगा स्नान मेले पर प्रदेश सरकार की नजरें इनायत र्हुइं तो शायद इस बार इसको मेला मानचित्र पर पहुंचने की स्वीकृति मिल सकती है।
डीएम भी दे गए संकेत
मेला मीटिंग में डीएम चक्रपाणि यादव ने बताया कि इस बार मेले में वीआईपी के अलावा वीवीआईपी कैंप भी लगाया जाए, क्योंकि प्रदेश और केन्द्र से कई मंत्री, सचिवों के आने की उम्मीद है।