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आज खत्म होगा पुल पर वन-वे
Hapur
Updated Thu, 03 May 2012 12:00 PM IST
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गढ़मुक्तेश्वर। ब्रजघाट के गंगापुल पर वन वे के कारण आजिज एनएच-24 के यात्रियों के लिए अच्छी खबर है। बृहस्पतिवार की सुबह से पुल पर वन वे खत्म कर दिया जाएगा। इससे पिछले तीन दिन से हाईवे पर सुस्त रफ्तार चल रहे वाहन फिर से फर्राटा भर सकेंगे।
वन के कारण स्याना चौपला एवं हापुड़ से किए गए रुट डायवर्जन ने दिल्ली से लखनऊ के बीच सफर करने वालों को दिक्कत खड़ी कर दी। मंगलवार की रात रूट डायवर्जन से स्याना चौपला से सिंभावली के बीच वाहनों की लम्बी कतार लगी रही। वहीं स्याना चौपला से ब्रजघाट के बीच इक्का दुक्का वाहन ही दिखे। ब्रिज कारपोरेशन के अफसरों के मुताबिक बुधवार की शाम तक गंगा पुल का क्षतिग्रस्त हिस्सा मरम्मत के बाद पूरी तरह से सूख गया है। अब पुल को दोनों ओर से वाहनों के आवागमन के लिए खोला जा सकता है। हालांकि पुलिस ने औपचारिक पुल को औपचारिक रूप से बृहस्पतिवार को खोला जाएगा लेकिन बुधवार की रात को भी कुछ वाहनों का आवागमन शुरू हो गया था।
पुराने पुल की जांच की मांग उठी
ब्रजघाट निवासी भागवत कथा वाचक गोपाल बाबा ने मंडलायुक्त को पत्र भेजकर मांग की है कि 1962 में बनाए गए गंगा पुल की क्षमता की जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि पुल में हुए छेद ने इसकी क्षमता की पोल खोल दी है। उन्होंने कहा कि जब पुल में छेद हो सकता है तो क्या गारंटी है कि दूसरे स्थान कोई क्षति नहीं होगी। उन्होंने कहा कि यात्रियों की जिंदगी से खिलवाड़ नहीं करना चाहिए। एनएचएआई को चाहिए कि वह गंगा पुल की बारीकी से जांच कराए।
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वन के कारण स्याना चौपला एवं हापुड़ से किए गए रुट डायवर्जन ने दिल्ली से लखनऊ के बीच सफर करने वालों को दिक्कत खड़ी कर दी। मंगलवार की रात रूट डायवर्जन से स्याना चौपला से सिंभावली के बीच वाहनों की लम्बी कतार लगी रही। वहीं स्याना चौपला से ब्रजघाट के बीच इक्का दुक्का वाहन ही दिखे। ब्रिज कारपोरेशन के अफसरों के मुताबिक बुधवार की शाम तक गंगा पुल का क्षतिग्रस्त हिस्सा मरम्मत के बाद पूरी तरह से सूख गया है। अब पुल को दोनों ओर से वाहनों के आवागमन के लिए खोला जा सकता है। हालांकि पुलिस ने औपचारिक पुल को औपचारिक रूप से बृहस्पतिवार को खोला जाएगा लेकिन बुधवार की रात को भी कुछ वाहनों का आवागमन शुरू हो गया था।
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पुराने पुल की जांच की मांग उठी
ब्रजघाट निवासी भागवत कथा वाचक गोपाल बाबा ने मंडलायुक्त को पत्र भेजकर मांग की है कि 1962 में बनाए गए गंगा पुल की क्षमता की जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि पुल में हुए छेद ने इसकी क्षमता की पोल खोल दी है। उन्होंने कहा कि जब पुल में छेद हो सकता है तो क्या गारंटी है कि दूसरे स्थान कोई क्षति नहीं होगी। उन्होंने कहा कि यात्रियों की जिंदगी से खिलवाड़ नहीं करना चाहिए। एनएचएआई को चाहिए कि वह गंगा पुल की बारीकी से जांच कराए।
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