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रिजेक्ट प्रजाति का गन्ना बोने वाले किसानों की अब खैर नहीं
Updated Thu, 04 Oct 2018 12:09 AM IST
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रिजेक्ट प्रजाति का गन्ना नहीं खरीदेंगी चीनी मिलें
गढ़मुक्तेश्वर। जिले में रिजेक्ट प्रजाति का गन्ना बोने वाले किसानों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। क्योंकि न तो इस बार चीनी मिलें ही इस तरह का गन्ना खरीदेंगी और न ही सरकार इस प्रजाति के गन्ने का समर्थन मूल्य घोषित करेगी। आंकड़ों के अनुसार जनपद में सैकड़ों बीघा फसल इसी प्रजाति की है, जिसके चलते किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
गन्ने की पैदावार बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार अगैती प्रजाति वाली फसल की बुआई को प्राथमिकता देती है, इसके लिए हर साल भारी भरकम धनराशि खर्च की जा रही है। लेकिन अधिकांश किसान इससे अंजान रह जाते हैं। जो पाबंदी वाले रिजेक्ट गन्ना बोकर खुद को नुकसान पहुंचा ही रहे हैं वहीं सरकारी योजनाओं की मंशा पर भी पानी फेर रहे हैं। पिछले कई सालों में सीओ 92423, सीओ 8102, सीओ 1148 और सीओ 91269 समेत कई गन्ना प्रजातियों को रिजेक्ट और बीमार घोषित कर दिया गया था, लेकिन किसानों ने इन प्रजातियों के गन्ने की सैकड़ों बीघा बुआई कर डाली है। लेकिन इस बार रिजेक्ट प्रजाति वाले गन्ने की बुआई करने वाले किसानों को कोई भी राहत नहीं मिल पाएगा। प्रदेश के गन्ना आयुक्त संजय भूसरेड्डी ने इस बार शुगर मिलों द्वारा रिजेक्ट प्रजाति के गन्ने की कोई भी खरीद न किए जाने का आदेश जारी किया है, तो वहीं सरकारी स्तर से भी रिजेक्ट प्रजाति के गन्ने का कोई समर्थन मूल्य घोषित नहीं करने का निर्णय लिया गया है।
किसानों समेत चीनी मिलों को भी होता है नुकसान
रिजेक्ट और बीमार प्रजाति वाले गन्ना का रेट अर्ली और लेट वैरायटी वाले गन्ने से करीब दस रुपये कुंतल कम होता है, जबकि इसकी पेराई भी करीब डेढ़ माह बादू चालू हो पाती है। जिससे इस अवधि में गन्ने का वजन घट जाता है। वहीं रिकवरी कम होने से शुगर लॉबी के लिए भी रिजेक्ट प्रजाति का गन्ना घाटे का सौदा रहता है।
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कोट--
सिंभावली गन्ना समिति चेयरमैन सरदार सुरेंद्र पाल सिंह कहते हैं कि आए साल किसानों को रिजेक्ट प्रजाति का गन्ना न बोने के लिए जागरूक करने की मुहिम चलाई जाती है
सिंभावली गन्ना विकास समिति सचिव राजीव सेठ का कहना है कि गन्ना आयुक्त की हिदायत पर रिजेक्ट प्रजाति वाले गन्ने की बुआई पर पूरी तरह रोक लगाने के मकसद से इस बार और भी व्यापक स्तर पर अभियान चलाकर किसानों को जागरूक किया जाएगा।
गढ़मुक्तेश्वर। जिले में रिजेक्ट प्रजाति का गन्ना बोने वाले किसानों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। क्योंकि न तो इस बार चीनी मिलें ही इस तरह का गन्ना खरीदेंगी और न ही सरकार इस प्रजाति के गन्ने का समर्थन मूल्य घोषित करेगी। आंकड़ों के अनुसार जनपद में सैकड़ों बीघा फसल इसी प्रजाति की है, जिसके चलते किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
गन्ने की पैदावार बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार अगैती प्रजाति वाली फसल की बुआई को प्राथमिकता देती है, इसके लिए हर साल भारी भरकम धनराशि खर्च की जा रही है। लेकिन अधिकांश किसान इससे अंजान रह जाते हैं। जो पाबंदी वाले रिजेक्ट गन्ना बोकर खुद को नुकसान पहुंचा ही रहे हैं वहीं सरकारी योजनाओं की मंशा पर भी पानी फेर रहे हैं। पिछले कई सालों में सीओ 92423, सीओ 8102, सीओ 1148 और सीओ 91269 समेत कई गन्ना प्रजातियों को रिजेक्ट और बीमार घोषित कर दिया गया था, लेकिन किसानों ने इन प्रजातियों के गन्ने की सैकड़ों बीघा बुआई कर डाली है। लेकिन इस बार रिजेक्ट प्रजाति वाले गन्ने की बुआई करने वाले किसानों को कोई भी राहत नहीं मिल पाएगा। प्रदेश के गन्ना आयुक्त संजय भूसरेड्डी ने इस बार शुगर मिलों द्वारा रिजेक्ट प्रजाति के गन्ने की कोई भी खरीद न किए जाने का आदेश जारी किया है, तो वहीं सरकारी स्तर से भी रिजेक्ट प्रजाति के गन्ने का कोई समर्थन मूल्य घोषित नहीं करने का निर्णय लिया गया है।
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किसानों समेत चीनी मिलों को भी होता है नुकसान
रिजेक्ट और बीमार प्रजाति वाले गन्ना का रेट अर्ली और लेट वैरायटी वाले गन्ने से करीब दस रुपये कुंतल कम होता है, जबकि इसकी पेराई भी करीब डेढ़ माह बादू चालू हो पाती है। जिससे इस अवधि में गन्ने का वजन घट जाता है। वहीं रिकवरी कम होने से शुगर लॉबी के लिए भी रिजेक्ट प्रजाति का गन्ना घाटे का सौदा रहता है।
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कोट--
सिंभावली गन्ना समिति चेयरमैन सरदार सुरेंद्र पाल सिंह कहते हैं कि आए साल किसानों को रिजेक्ट प्रजाति का गन्ना न बोने के लिए जागरूक करने की मुहिम चलाई जाती है
सिंभावली गन्ना विकास समिति सचिव राजीव सेठ का कहना है कि गन्ना आयुक्त की हिदायत पर रिजेक्ट प्रजाति वाले गन्ने की बुआई पर पूरी तरह रोक लगाने के मकसद से इस बार और भी व्यापक स्तर पर अभियान चलाकर किसानों को जागरूक किया जाएगा।