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Hapur News: जलस्तर में 86 सेंटीमीटर गिरावट, किसानों की चिंता बरकरार
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संवाद न्यूज एजेंसी
गढ़मुक्तेश्वर।
बिजनौर बैराज से डिस्चार्ज लगातार कम होने के चलते गंगा नदी के जलस्तर में कमी आने से खादर क्षेत्र के किसानों ने राहत की सांस ली है। वहीं जलस्तर में उतार चढ़ाव होने के कारण भू-कटान की समस्या बनी हुई है। जिससे गंगा तट से लगे खेतों में खड़ी फसल कटान के कारण गंगा में बह रही है। वहीं, मानसूनी बारिश के चलते जलस्तर में बढ़ोतरी की आशंका बनी हुई है।
पिछले दिनों पहाड़ों पर बारिश और बिजनौर बैराज से डिस्चार्ज के चलते गढ़ क्षेत्र में गंगा उफान की तरफ बढ़ रही थी, जिसे देखते हुए खादर क्षेत्र के एक दर्जन से भी अधिक गांवों के निवासियों को बाढ़ की आशंका सताने लगी थी। लेकिन दो दिनों से बिजनौर बैराज से डिस्चार्ज में अचानक से भारी कमी आई है। जिसके चलते गढ़ क्षेत्र में भी जलस्तर कम हो गया है। लेकिन इससे भी किसानों की परेशानी कम नहीं हुई है।
गांव मुकीमपुर निवासी सुरेंद्र सिंह ने बताया कि खादर क्षेत्र में जिन स्थानों पर गंगा से सटे खेतों मे फसल उगाई जा रही है। वहां पर पहले जल स्तर बढऩे के कारण फसल को नुकसान हो रहा था। वहीं अब जल स्तर में कमी आने के कारण भूकटान हो रहा है। जिससे गन्ने समेत धान की फसल कटान में आकर गंगा में समा रही है। बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अनुसार बुधवार की शाम तक ब्रजघाट गंगा का जलस्तर 198.50 मीटर था, लेकिन बृहस्पतिवार की शाम तक जल स्तर में 86 सेंटीमीटर की गिरावट दर्ज की गई है। जिससे जल स्तर में भारी गिरावट आने के कारण 197.64 मीटर (समुद्र तल से) पहुंच गया है। किसानों ने कहा कि जलस्तर कम होने से फिलहाल तो राहत है, लेकिन मानसून के चलते आगामी दिनों में होने वाली बारिश कभी भी जलस्तर में बढ़ोतरी का कारण बन सकती है।
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ब्रजघाट में सीढ़ियों से नीचे उतरा पानी
गंगा सभा आरती संचालक कपिल नागर ने बताया कि गंगा के उफान के चलते आरती स्थल की सीढ़ियां पानी में डूब गई थी, जिससे स्नानार्थियों को परेशानी हो रही थी लेकिन, अचानक जलस्तर में आई गिरावट से पानी काफी उतर गया है, जिससे लोगों की परेशानी कम हुई है।
एसडीएम अंकित वर्मा ने कहा कि
जलस्तर में गिरावट के चलते वर्तमान में बाढ़ की संभावना काफी कम हो गई है। इसके बावजूद भी जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। बाढ़ से बचाव के लिए सभी इंतजाम पूरे किए जा चुके हैं।
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गढ़मुक्तेश्वर।
बिजनौर बैराज से डिस्चार्ज लगातार कम होने के चलते गंगा नदी के जलस्तर में कमी आने से खादर क्षेत्र के किसानों ने राहत की सांस ली है। वहीं जलस्तर में उतार चढ़ाव होने के कारण भू-कटान की समस्या बनी हुई है। जिससे गंगा तट से लगे खेतों में खड़ी फसल कटान के कारण गंगा में बह रही है। वहीं, मानसूनी बारिश के चलते जलस्तर में बढ़ोतरी की आशंका बनी हुई है।
पिछले दिनों पहाड़ों पर बारिश और बिजनौर बैराज से डिस्चार्ज के चलते गढ़ क्षेत्र में गंगा उफान की तरफ बढ़ रही थी, जिसे देखते हुए खादर क्षेत्र के एक दर्जन से भी अधिक गांवों के निवासियों को बाढ़ की आशंका सताने लगी थी। लेकिन दो दिनों से बिजनौर बैराज से डिस्चार्ज में अचानक से भारी कमी आई है। जिसके चलते गढ़ क्षेत्र में भी जलस्तर कम हो गया है। लेकिन इससे भी किसानों की परेशानी कम नहीं हुई है।
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गांव मुकीमपुर निवासी सुरेंद्र सिंह ने बताया कि खादर क्षेत्र में जिन स्थानों पर गंगा से सटे खेतों मे फसल उगाई जा रही है। वहां पर पहले जल स्तर बढऩे के कारण फसल को नुकसान हो रहा था। वहीं अब जल स्तर में कमी आने के कारण भूकटान हो रहा है। जिससे गन्ने समेत धान की फसल कटान में आकर गंगा में समा रही है। बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अनुसार बुधवार की शाम तक ब्रजघाट गंगा का जलस्तर 198.50 मीटर था, लेकिन बृहस्पतिवार की शाम तक जल स्तर में 86 सेंटीमीटर की गिरावट दर्ज की गई है। जिससे जल स्तर में भारी गिरावट आने के कारण 197.64 मीटर (समुद्र तल से) पहुंच गया है। किसानों ने कहा कि जलस्तर कम होने से फिलहाल तो राहत है, लेकिन मानसून के चलते आगामी दिनों में होने वाली बारिश कभी भी जलस्तर में बढ़ोतरी का कारण बन सकती है।
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ब्रजघाट में सीढ़ियों से नीचे उतरा पानी
गंगा सभा आरती संचालक कपिल नागर ने बताया कि गंगा के उफान के चलते आरती स्थल की सीढ़ियां पानी में डूब गई थी, जिससे स्नानार्थियों को परेशानी हो रही थी लेकिन, अचानक जलस्तर में आई गिरावट से पानी काफी उतर गया है, जिससे लोगों की परेशानी कम हुई है।
एसडीएम अंकित वर्मा ने कहा कि
जलस्तर में गिरावट के चलते वर्तमान में बाढ़ की संभावना काफी कम हो गई है। इसके बावजूद भी जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। बाढ़ से बचाव के लिए सभी इंतजाम पूरे किए जा चुके हैं।