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रासायनिक खाद के अंधाधुंध इस्तेमाल पर रोक लगेगी
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रासायनिक खाद के अंधाधुंध इस्तेमाल पर लगेगी रोक
गढ़मुक्तेश्वर। रासायनिक खादों के अंधाधुंध इस्तेमाल पर रोक लगाकर मिट्टी की तेजी से क्षीण हो रही उर्वरता शक्ति को बरकरार रखने को जैविक खादों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। इसके लिए मिट्टी परीक्षण कराकर स्वास्थ्य कार्ड बनवाना भी जरूरी होगा, तभी किसानों को खाद मिल पाएगी।
रासायनिक खादों के अंधाधुंध इस्तेमाल से किसानों को फौरी तौर पर उन्नत पैदावार तो मिल रही है, लेकिन रासायनिक खादों के दुष्प्रभाव से मिट्टी की उपजाऊ कोख बड़ी तेजी के साथ बंजर और ऊसर में परिवर्तित होती जा रही है। जिसकी रोकथाम के लिए शासन स्तर से जैविक खादों को प्रोत्साहन देने के साथ ही रासायनिक खादों के इस्तेमाल को रोकने के लिए नई नीति लागू की गई है, जिसके तहत किसानों को उनकी भूमि के रकबे और उसमें बोई गई फसलों के आधार पर ही रासायनिक खाद मिल पाएगी। इसके अलावा भी किसानों को अपने खेतों की मिट्टी की जांच कराकर मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनवाना जरूरी हो जाएगा, क्योंकि इसी के आधार पर ही किसानों को निर्धारित अवधि पर निश्चित मात्रा में डीएपी, यूरिया और एनपीके जैसे रासायनिक खाद मिल सकेगी।
कृषि विभाग के प्राविधिक सहायक सतीश चंद्र शर्मा का कहना है कि रासायनिक खादों के अंधाधुंध इस्तेमाल से मिट्टी की उपजाऊ शक्ति तेजी से क्षीण हो रही है, जिसे रोकने को शासन स्तर से जैविक खादों को प्रोत्साहन देने वाली नई नीति तैयार की गई है। उन्होंने बताया कि इसी कड़ी में यूरिया के कट्टे का वजन भी 50 किलो की बजाए 45 किलो किया जाना है, जिससे दस प्रतिशत यूरिया की बचत होने के साथ ही किसानों का जैविक खादों की तरफ रुझान भी बढ़ेगा।
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गढ़मुक्तेश्वर। रासायनिक खादों के अंधाधुंध इस्तेमाल पर रोक लगाकर मिट्टी की तेजी से क्षीण हो रही उर्वरता शक्ति को बरकरार रखने को जैविक खादों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। इसके लिए मिट्टी परीक्षण कराकर स्वास्थ्य कार्ड बनवाना भी जरूरी होगा, तभी किसानों को खाद मिल पाएगी।
रासायनिक खादों के अंधाधुंध इस्तेमाल से किसानों को फौरी तौर पर उन्नत पैदावार तो मिल रही है, लेकिन रासायनिक खादों के दुष्प्रभाव से मिट्टी की उपजाऊ कोख बड़ी तेजी के साथ बंजर और ऊसर में परिवर्तित होती जा रही है। जिसकी रोकथाम के लिए शासन स्तर से जैविक खादों को प्रोत्साहन देने के साथ ही रासायनिक खादों के इस्तेमाल को रोकने के लिए नई नीति लागू की गई है, जिसके तहत किसानों को उनकी भूमि के रकबे और उसमें बोई गई फसलों के आधार पर ही रासायनिक खाद मिल पाएगी। इसके अलावा भी किसानों को अपने खेतों की मिट्टी की जांच कराकर मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनवाना जरूरी हो जाएगा, क्योंकि इसी के आधार पर ही किसानों को निर्धारित अवधि पर निश्चित मात्रा में डीएपी, यूरिया और एनपीके जैसे रासायनिक खाद मिल सकेगी।
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कृषि विभाग के प्राविधिक सहायक सतीश चंद्र शर्मा का कहना है कि रासायनिक खादों के अंधाधुंध इस्तेमाल से मिट्टी की उपजाऊ शक्ति तेजी से क्षीण हो रही है, जिसे रोकने को शासन स्तर से जैविक खादों को प्रोत्साहन देने वाली नई नीति तैयार की गई है। उन्होंने बताया कि इसी कड़ी में यूरिया के कट्टे का वजन भी 50 किलो की बजाए 45 किलो किया जाना है, जिससे दस प्रतिशत यूरिया की बचत होने के साथ ही किसानों का जैविक खादों की तरफ रुझान भी बढ़ेगा।
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