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गंगा जलस्तर में गिरावट के बाद भी लोगों को राहत नहीं
Updated Fri, 24 Aug 2018 12:35 AM IST
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गंगा का जलस्तर घटने के बाद भी खादर के लोगों को राहत नहीं
गढ़मुक्तेश्वर। गंगा का जलस्तर घटने के बाद भी खादर के लोगों की समस्या दूर नहीं हो पा रही हैं, क्योंकि निचले जंगल से जुड़े रास्तों पर पानी भरने से आवागमन प्रभावित हो गया है, वहीं फसल चौपट होने से मवेशियों के चारे का संकट भी गहरा गया है।
मानसूनी बारिश का सिलसिला जैसे-जैसे धीमा पड़ता जा रहा है, वैसे ही जलस्तर में गिरावट होने से गंगा नदी का उफान भी कम हो रहा है। पिछले तीन दिनों में गंगा के जलस्तर में करीब 20 सेंटीमीटर की गिरावट आई है, जिससे खादर क्षेत्र के करीब ढाई दर्जन गांवों में आने वाली बाढ़ का खतरा फिलहाल टल गया है। लेकिन ग्रामीणों की समस्या दूर नहीं हो पा रही हैं, चमन, मेवाराम, नौबत, शीशपाल, रामलाल का कहना है कि हजारों बीघा निचले जंगल और उससे जुड़े रास्तों पर जो पानी भर गया था वह बाहर न निकल पाया है, जिससे आवागमन में दिक्कत झेलनी पड़ रही हैं। जलभराव के चलते मौसमी बीमारी तेजी से पांव पसार रही हैं। फसलें भी पूरी तरह चौपट हो चुकी हैं, जिससे पशु पालन के सहारे जिंदगी बिताने वाले हजारों किसानों को मवेशियों के चारे की किल्लत से जूझना पड़ रहा है। केंद्रीय जल आयोग के सूत्रों का कहना है कि गंगा के जलस्तर में गिरावट होने से बृहस्पतिवार की शाम को जलस्तर घटकर 198.35 मीटर के निशान पर आ गया है।
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गढ़मुक्तेश्वर। गंगा का जलस्तर घटने के बाद भी खादर के लोगों की समस्या दूर नहीं हो पा रही हैं, क्योंकि निचले जंगल से जुड़े रास्तों पर पानी भरने से आवागमन प्रभावित हो गया है, वहीं फसल चौपट होने से मवेशियों के चारे का संकट भी गहरा गया है।
मानसूनी बारिश का सिलसिला जैसे-जैसे धीमा पड़ता जा रहा है, वैसे ही जलस्तर में गिरावट होने से गंगा नदी का उफान भी कम हो रहा है। पिछले तीन दिनों में गंगा के जलस्तर में करीब 20 सेंटीमीटर की गिरावट आई है, जिससे खादर क्षेत्र के करीब ढाई दर्जन गांवों में आने वाली बाढ़ का खतरा फिलहाल टल गया है। लेकिन ग्रामीणों की समस्या दूर नहीं हो पा रही हैं, चमन, मेवाराम, नौबत, शीशपाल, रामलाल का कहना है कि हजारों बीघा निचले जंगल और उससे जुड़े रास्तों पर जो पानी भर गया था वह बाहर न निकल पाया है, जिससे आवागमन में दिक्कत झेलनी पड़ रही हैं। जलभराव के चलते मौसमी बीमारी तेजी से पांव पसार रही हैं। फसलें भी पूरी तरह चौपट हो चुकी हैं, जिससे पशु पालन के सहारे जिंदगी बिताने वाले हजारों किसानों को मवेशियों के चारे की किल्लत से जूझना पड़ रहा है। केंद्रीय जल आयोग के सूत्रों का कहना है कि गंगा के जलस्तर में गिरावट होने से बृहस्पतिवार की शाम को जलस्तर घटकर 198.35 मीटर के निशान पर आ गया है।
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