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आलू बीज पर भी मंदी की मार
Updated Thu, 15 Nov 2018 11:57 PM IST
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आलू बीज पर भी मंदी की मार
हापुड़। उद्यान विभाग द्वारा उत्पादित आलू के जिस फाउंडेशन बीज को खरीदने के लिए बुवाई शुरू होने से पहले मारामारी थी, आज मंदी के चलते खरीदार नहीं मिल रहे हैं। परिणामस्वरूप जिले के लिए आवंटित 1500 क्विंटल में से करीब 700 क्विंटल बीज खराब होने की कगार पर पहुंच गया है।
इस वर्ष आलू पर चटकी के चलते उद्यान विभाग को उम्मीद थी कि किसान बड़े पैमाने पर आलू की बुवाई करेंगे। इसी के चलते विभाग की डिमांड पर शासन से जिले को ख्याति, कुफरी बाहर, चिपसोना, गरिमा आदि प्रजातियों का 1500 क्विंटल बीज आवंटित हुआ था। इसके दाम 2480 रुपये/क्विंटल यानि कि 1240 रुपये प्रति कट्टा रखा गया था।
शुरूआत में तो किसानों ने विभाग में आलू खरीद के लिए जमकर आवेदन किए। लेकिन खरीद के समय अधिकांश ने पैसा जमा नहीं किया। इसके चलते 1500 क्विंटल में से सिर्फ 800 क्विंटल बीज की बिक्री किया जा सका। अचानक आलू के रेट गिरने और आलू की बुवाई का समय लगभग खत्म हो चुका है। लेकिन विभाग में अभी भी 700 क्विंटल बीज बिक्री के लिए बचा हुआ है।
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मुख्य बात यह है कि फाउंडेशन बीज को लेकर भी किसान उत्सुकता नहीं दिखा रहे हैं। इसका मुख्य कारण यह भी बताया जा रहा है कि मंदी की मार के कारण शीतगृहों से किसानों को बहुत कम दाम पर बीज की बिक्री की गई। इसी के चलते किसानों ने उद्यान विभाग का महंगा बीज नहीं खरीदा। बहरहाल अब बीज खराब होने की कगार पर पहुंच गया है।
जिला उद्यान अधिकारी एसके शर्मा का कहना है कि किसानों की मांग के अनुरूप ही विभाग से बीज की बिक्री करायी गई थी। लेकिन अभी भी 700 क्विंटल बीज बिक्री के लिए रखा है। किसान अब बाबूगढ़ स्थित फार्म से भी आलू का बीज खरीद सकते हैं। बताया गया है कि शीतगृहों में आलू के बीज को अब कोई किसी भाव खरीदने को तैयार नहीं है।
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हापुड़। उद्यान विभाग द्वारा उत्पादित आलू के जिस फाउंडेशन बीज को खरीदने के लिए बुवाई शुरू होने से पहले मारामारी थी, आज मंदी के चलते खरीदार नहीं मिल रहे हैं। परिणामस्वरूप जिले के लिए आवंटित 1500 क्विंटल में से करीब 700 क्विंटल बीज खराब होने की कगार पर पहुंच गया है।
इस वर्ष आलू पर चटकी के चलते उद्यान विभाग को उम्मीद थी कि किसान बड़े पैमाने पर आलू की बुवाई करेंगे। इसी के चलते विभाग की डिमांड पर शासन से जिले को ख्याति, कुफरी बाहर, चिपसोना, गरिमा आदि प्रजातियों का 1500 क्विंटल बीज आवंटित हुआ था। इसके दाम 2480 रुपये/क्विंटल यानि कि 1240 रुपये प्रति कट्टा रखा गया था।
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शुरूआत में तो किसानों ने विभाग में आलू खरीद के लिए जमकर आवेदन किए। लेकिन खरीद के समय अधिकांश ने पैसा जमा नहीं किया। इसके चलते 1500 क्विंटल में से सिर्फ 800 क्विंटल बीज की बिक्री किया जा सका। अचानक आलू के रेट गिरने और आलू की बुवाई का समय लगभग खत्म हो चुका है। लेकिन विभाग में अभी भी 700 क्विंटल बीज बिक्री के लिए बचा हुआ है।
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मुख्य बात यह है कि फाउंडेशन बीज को लेकर भी किसान उत्सुकता नहीं दिखा रहे हैं। इसका मुख्य कारण यह भी बताया जा रहा है कि मंदी की मार के कारण शीतगृहों से किसानों को बहुत कम दाम पर बीज की बिक्री की गई। इसी के चलते किसानों ने उद्यान विभाग का महंगा बीज नहीं खरीदा। बहरहाल अब बीज खराब होने की कगार पर पहुंच गया है।
जिला उद्यान अधिकारी एसके शर्मा का कहना है कि किसानों की मांग के अनुरूप ही विभाग से बीज की बिक्री करायी गई थी। लेकिन अभी भी 700 क्विंटल बीज बिक्री के लिए रखा है। किसान अब बाबूगढ़ स्थित फार्म से भी आलू का बीज खरीद सकते हैं। बताया गया है कि शीतगृहों में आलू के बीज को अब कोई किसी भाव खरीदने को तैयार नहीं है।