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काली नदी पर बना अस्थाई लकड़ी का जर्जर पुल टूटा
Updated Wed, 11 Apr 2018 12:12 AM IST
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काली नदी पर बना अस्थाई
लकड़ी का जर्जर पुल टूटा
हापुड़। गांव गजालपुर के पास काली नदी पर ग्रामीणों द्वारा बनाया गया अस्थाई लकड़ी का पुल जर्जर होकर टूट गया है। ऐसे में आधा दर्जन गांवों के लोगों का अपने खेतों पर जाना भी मुश्किल हो गया है। साथ ही सब्जी मंडी व जिला मुख्यालय तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों को चार किलोमीटर के स्थान पर 14 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ रहा है। जिला पंचायत सदस्य ने प्रशासन से जल्द पुल निर्माण की मांग उठाई है।
गांव गजालपुर के निकट से होकर काली नदी बह रही है। गजालपुर समेत बिगास, कनिया कल्याणपुर, मलकपुर गांव के लोगों को शहर तक पहुंचने के लिए मुख्य मार्ग बाबूगढ़ कैंट से होकर जाता है। जहां अत्यधिक चेकिंग होने के कारण ग्रामीण परेशान रहते हैं। साथ ही जिला मुख्यालय या सब्जी मंडी तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों को करीब 14 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है।
इसके अलावा दूसरा मार्ग काली नदी पार कर ददायरा, जरोठी गांव होते हुए हापुड़ पहुंचता है। यह मार्ग बमुश्किल चार किलोमीटर दूरी का है। प्रशासन से मदद न मिलने के कारण करीब छह वर्ष पूर्व ग्रामीणों ने काली नदी पर लकड़ियों से अस्थाई पुल बनाया था। यह पुल अब टूट चुका है। आलम यह है कि इस मार्ग से ग्रामीणों का आवागमन प्रभावित हो रहा है। बता दें कि गजालपुर के अनेक ग्रामीणों की जमीन काली नदी के उस पार पड़ती हैं। ऐसे में पुल टूटने से ग्रामीणों का खेतों पर जाना भी मुश्किल हो गया है।
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- 2012 में 6 लोगों की रेल से कटकर हो गई थी मौत
वर्ष 2012 में गजालबपुर के छह किसान अपने खेतों तक पहुंचने के लिए रेल की पटरियों से होकर नदी पार कर रहे थे। उसी दौरान ट्रेन की चपेट में आकर सभी की मौके पर कटकर मौत हो गई थी। यह रेलवे ट्रैक वर्तमान में लकड़ी के अस्थाई पुल से महज 100 मीटर की दूरी पर है।
जिला पंचायत सदस्य कृष्णकांत हूण ने बताया कि अस्थाई पुल के टूटने से लोगों को काफी परेशानी हो रही है। मजबूरी में नदी पार करने के लिए ग्रामीणों को रेलवे की पटरियों का सहारा लेना पड़ रहा है। प्रशासन से काली नदी पर स्थाई पुल बनाने की मांग उठा चुके हैं। इस समस्या को वह सीएम तक पहुंचाएंगे।
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लकड़ी का जर्जर पुल टूटा
हापुड़। गांव गजालपुर के पास काली नदी पर ग्रामीणों द्वारा बनाया गया अस्थाई लकड़ी का पुल जर्जर होकर टूट गया है। ऐसे में आधा दर्जन गांवों के लोगों का अपने खेतों पर जाना भी मुश्किल हो गया है। साथ ही सब्जी मंडी व जिला मुख्यालय तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों को चार किलोमीटर के स्थान पर 14 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ रहा है। जिला पंचायत सदस्य ने प्रशासन से जल्द पुल निर्माण की मांग उठाई है।
गांव गजालपुर के निकट से होकर काली नदी बह रही है। गजालपुर समेत बिगास, कनिया कल्याणपुर, मलकपुर गांव के लोगों को शहर तक पहुंचने के लिए मुख्य मार्ग बाबूगढ़ कैंट से होकर जाता है। जहां अत्यधिक चेकिंग होने के कारण ग्रामीण परेशान रहते हैं। साथ ही जिला मुख्यालय या सब्जी मंडी तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों को करीब 14 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है।
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इसके अलावा दूसरा मार्ग काली नदी पार कर ददायरा, जरोठी गांव होते हुए हापुड़ पहुंचता है। यह मार्ग बमुश्किल चार किलोमीटर दूरी का है। प्रशासन से मदद न मिलने के कारण करीब छह वर्ष पूर्व ग्रामीणों ने काली नदी पर लकड़ियों से अस्थाई पुल बनाया था। यह पुल अब टूट चुका है। आलम यह है कि इस मार्ग से ग्रामीणों का आवागमन प्रभावित हो रहा है। बता दें कि गजालपुर के अनेक ग्रामीणों की जमीन काली नदी के उस पार पड़ती हैं। ऐसे में पुल टूटने से ग्रामीणों का खेतों पर जाना भी मुश्किल हो गया है।
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- 2012 में 6 लोगों की रेल से कटकर हो गई थी मौत
वर्ष 2012 में गजालबपुर के छह किसान अपने खेतों तक पहुंचने के लिए रेल की पटरियों से होकर नदी पार कर रहे थे। उसी दौरान ट्रेन की चपेट में आकर सभी की मौके पर कटकर मौत हो गई थी। यह रेलवे ट्रैक वर्तमान में लकड़ी के अस्थाई पुल से महज 100 मीटर की दूरी पर है।
जिला पंचायत सदस्य कृष्णकांत हूण ने बताया कि अस्थाई पुल के टूटने से लोगों को काफी परेशानी हो रही है। मजबूरी में नदी पार करने के लिए ग्रामीणों को रेलवे की पटरियों का सहारा लेना पड़ रहा है। प्रशासन से काली नदी पर स्थाई पुल बनाने की मांग उठा चुके हैं। इस समस्या को वह सीएम तक पहुंचाएंगे।