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गन्ना विभाग की लापरवाही जिले के हजारों किसानों पर पड़ रही भारी
Updated Sat, 10 Nov 2018 01:21 AM IST
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गन्ना विभाग की लापरवाही हजारों किसानों पर भारी
हापुड़। गन्ना विभाग की लापरवाही ने जिले के हजारों किसानों को परेशानी में डाल दिया है। पेराई सत्र शुरू होने के बाद भी अनेक किसान कैलेंडर से वंचित हैं। जिन्हें मिले हैं, उन्हें इसके सापेक्ष पर्चियां नहीं मिल रहीं। जो पर्चियों मिली भी हैं, उनमें से अनेक ऐसी हैं जिन पर सेंटर गलत अंकित किए गए हैैं। इसके चलते किसान गन्ना आपूर्ति भी नहीं कर पा रहे हैं।
जिले में बड़े पैमानें पर गन्ने की खेती की जाती है। किसान संगठनों के आंदोलन और किसानों की मांग पर जिले की दोनों शुगर मिल चालू तो की जा चुकी हैं, लेकिन गन्ना विभाग की लापरवाही से किसानों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। किसानों को गन्ना आपूर्ति के लिए पेराई सत्र शुरू होने से पहले ही कैलेंडर दिया जाता है। इसमें किसान के बांड के अनुसार कुल पर्चियां का ब्योरा होता है। इसके आधार पर किसान को पता चल जाता है कि उसकी पर्चियां कब आने वाली हैं, लेकिन किसानों को कैलेंडर के हिसाब से पर्चियां नहीं मिल पा रही हैं।
इतना ही नहीं बहुत से किसान अब भी कैलेंडर से वंचित हैं। सैकड़ों किसान ऐसे हैं, जिनकी पर्चियों पर गलत सेंटर अंकित कर दिए गए हैं। इसके चलते वह गन्ना की आपूर्ति भी नहीं कर पा रहे हैं। गन्ना विभाग की इस अनदेखी को सुधरवाने के लिए किसान गन्ना समितियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन वहां भी उन्हें टरका दिया जा रहा है।
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निजी कंपनी को मिला है टेंडर
इस बार जिले के किसानों को पर्चियां, कैलेंडर आदि जारी करने का टेंडर एक निजी कंपनी को दिया गया है। किसानों की मानें तो जब तक इस कार्य को सहकारी गन्ना समिति देखती थी, तब तक तो काफी हद तक कैलेंडर आदि सही मिलते थे, लेकिन इस बार कैलेंडर और पर्चियों में काफी त्रुटियां हैं।
बोले किसान: ज्यादातर पर्चियों में गड़बड़ी
रसूलपुर निवासी जतिन चौधरी ने बताया कि उनके गांव के 30 फीसदी किसानों के कैलेंडर और पर्चियों में त्रुटि है। अब तक सिर्फ एक ही पर्ची मिल सकी है, ऐसे में मिल जल्द शुरू होने का कोई फायदा नहीं हो रहा है।
भाकियू जिलाध्यक्ष धनवीर शास्त्री का कहना है कि गन्ना विभाग और निजी कंपनी की मिलीभगत से किसानों को परेशानी हो रही है। इस समस्या से जल्द किसानों को राहत नहीं दिलाई गई तो भाकियू आंदोलन करने को मजबूर होगी।
कोट
किसानों की इस समस्या का जल्द निस्तारण करा दिया जाएगा। इस तरह की खामियों से किसानों को परेशान नहीं होने दिया जाएगा।
- ओपी सिंह, जिला गन्ना अधिकारी
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हापुड़। गन्ना विभाग की लापरवाही ने जिले के हजारों किसानों को परेशानी में डाल दिया है। पेराई सत्र शुरू होने के बाद भी अनेक किसान कैलेंडर से वंचित हैं। जिन्हें मिले हैं, उन्हें इसके सापेक्ष पर्चियां नहीं मिल रहीं। जो पर्चियों मिली भी हैं, उनमें से अनेक ऐसी हैं जिन पर सेंटर गलत अंकित किए गए हैैं। इसके चलते किसान गन्ना आपूर्ति भी नहीं कर पा रहे हैं।
जिले में बड़े पैमानें पर गन्ने की खेती की जाती है। किसान संगठनों के आंदोलन और किसानों की मांग पर जिले की दोनों शुगर मिल चालू तो की जा चुकी हैं, लेकिन गन्ना विभाग की लापरवाही से किसानों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। किसानों को गन्ना आपूर्ति के लिए पेराई सत्र शुरू होने से पहले ही कैलेंडर दिया जाता है। इसमें किसान के बांड के अनुसार कुल पर्चियां का ब्योरा होता है। इसके आधार पर किसान को पता चल जाता है कि उसकी पर्चियां कब आने वाली हैं, लेकिन किसानों को कैलेंडर के हिसाब से पर्चियां नहीं मिल पा रही हैं।
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इतना ही नहीं बहुत से किसान अब भी कैलेंडर से वंचित हैं। सैकड़ों किसान ऐसे हैं, जिनकी पर्चियों पर गलत सेंटर अंकित कर दिए गए हैं। इसके चलते वह गन्ना की आपूर्ति भी नहीं कर पा रहे हैं। गन्ना विभाग की इस अनदेखी को सुधरवाने के लिए किसान गन्ना समितियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन वहां भी उन्हें टरका दिया जा रहा है।
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निजी कंपनी को मिला है टेंडर
इस बार जिले के किसानों को पर्चियां, कैलेंडर आदि जारी करने का टेंडर एक निजी कंपनी को दिया गया है। किसानों की मानें तो जब तक इस कार्य को सहकारी गन्ना समिति देखती थी, तब तक तो काफी हद तक कैलेंडर आदि सही मिलते थे, लेकिन इस बार कैलेंडर और पर्चियों में काफी त्रुटियां हैं।
बोले किसान: ज्यादातर पर्चियों में गड़बड़ी
रसूलपुर निवासी जतिन चौधरी ने बताया कि उनके गांव के 30 फीसदी किसानों के कैलेंडर और पर्चियों में त्रुटि है। अब तक सिर्फ एक ही पर्ची मिल सकी है, ऐसे में मिल जल्द शुरू होने का कोई फायदा नहीं हो रहा है।
भाकियू जिलाध्यक्ष धनवीर शास्त्री का कहना है कि गन्ना विभाग और निजी कंपनी की मिलीभगत से किसानों को परेशानी हो रही है। इस समस्या से जल्द किसानों को राहत नहीं दिलाई गई तो भाकियू आंदोलन करने को मजबूर होगी।
कोट
किसानों की इस समस्या का जल्द निस्तारण करा दिया जाएगा। इस तरह की खामियों से किसानों को परेशान नहीं होने दिया जाएगा।
- ओपी सिंह, जिला गन्ना अधिकारी