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गोमूत्र से भागेंगे मच्छर, गोबर से बनेगी अगरबती
Updated Sun, 08 Apr 2018 11:40 PM IST
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गोमूत्र से भागेंगे मच्छर, गोबर से बनेगी अगरबत्ती
हापुड़। गोशालाओं की दशा सुधारने व गो संरक्षण के लिए प्रदेश सरकार ने बड़े स्तर पर योजना तैयार की है। योजना के अनुसार पंजीकृत गोशालाओं में पल रहे गोवंश के लिए जहां अनुदान मिलेगा, वहीं आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए आयुर्वेदिक उत्पाद भी तैयार किए जाएंगे। सरकार ने योजनाएं लागू करने के निर्देश जारी किए हैं।
प्रदेश सरकार का गो प्रेम किसी से छिपा नहीं है। ऐसे में गोशालाओं की स्थिति में सुधार लाने और गोवंश के संरक्षण के लिए बड़े स्तर पर योजना तैयार की गई है। योजना को गो संरक्षण समिति के गठन और अनुदान प्लान के माध्यम से साकार किया जाएगा। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति गोशालाओं के उत्थान और विकास के लिए कार्य करेगी। विभिन्न विभागों के संयुक्त प्रयास से गोवंश के गोबर, गोमूत्र और दूध से आयुर्वेदिक उत्पाद तैयार किए जाएंगे। इनकी बाजार में बिक्री की जाएगी। प्राप्त धनराशि से गोवंश और गोशालाओं को आर्थिक रूप से मजबूत किया जाएगा। पंजीकृत गोशालाओं में पल रहे गोवंश को 30 रुपये प्रति दिन के हिसाब से अनुदान मिलेगा।
गोशालाओं को अपने संसाधनों के आधार पर ही समृद्ध किया जाएगा। पहले चरण में बायोगैस संयंत्र की स्थापना, कंपोस्ट खाद, साबुन, अगरबत्ती, मच्छर भगाने की कायल और गोनाइल बनाई जाएगी। योजना को धरातल पर उतरने के लिए गो संरक्षण समिति के साथ मिलकर पूरी तालमेल के साथ सभी विभाग इस कार्य में सहयोग प्रदान करेंगे। श्री पंचायती गोशाला के सचिव सुरेश गुप्ता का कहना है कि शासन की यह सराहनीय पहल है। इससे गोशालाएं स्वावलंबी बनेगी और इनकी दशा में सुधार होगा।
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डीएम प्रमोद कुमार उपाध्याय का कहना है कि सरकार की योजना को सफलता पूर्वक लागू करने के लिए संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
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हापुड़। गोशालाओं की दशा सुधारने व गो संरक्षण के लिए प्रदेश सरकार ने बड़े स्तर पर योजना तैयार की है। योजना के अनुसार पंजीकृत गोशालाओं में पल रहे गोवंश के लिए जहां अनुदान मिलेगा, वहीं आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए आयुर्वेदिक उत्पाद भी तैयार किए जाएंगे। सरकार ने योजनाएं लागू करने के निर्देश जारी किए हैं।
प्रदेश सरकार का गो प्रेम किसी से छिपा नहीं है। ऐसे में गोशालाओं की स्थिति में सुधार लाने और गोवंश के संरक्षण के लिए बड़े स्तर पर योजना तैयार की गई है। योजना को गो संरक्षण समिति के गठन और अनुदान प्लान के माध्यम से साकार किया जाएगा। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति गोशालाओं के उत्थान और विकास के लिए कार्य करेगी। विभिन्न विभागों के संयुक्त प्रयास से गोवंश के गोबर, गोमूत्र और दूध से आयुर्वेदिक उत्पाद तैयार किए जाएंगे। इनकी बाजार में बिक्री की जाएगी। प्राप्त धनराशि से गोवंश और गोशालाओं को आर्थिक रूप से मजबूत किया जाएगा। पंजीकृत गोशालाओं में पल रहे गोवंश को 30 रुपये प्रति दिन के हिसाब से अनुदान मिलेगा।
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गोशालाओं को अपने संसाधनों के आधार पर ही समृद्ध किया जाएगा। पहले चरण में बायोगैस संयंत्र की स्थापना, कंपोस्ट खाद, साबुन, अगरबत्ती, मच्छर भगाने की कायल और गोनाइल बनाई जाएगी। योजना को धरातल पर उतरने के लिए गो संरक्षण समिति के साथ मिलकर पूरी तालमेल के साथ सभी विभाग इस कार्य में सहयोग प्रदान करेंगे। श्री पंचायती गोशाला के सचिव सुरेश गुप्ता का कहना है कि शासन की यह सराहनीय पहल है। इससे गोशालाएं स्वावलंबी बनेगी और इनकी दशा में सुधार होगा।
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डीएम प्रमोद कुमार उपाध्याय का कहना है कि सरकार की योजना को सफलता पूर्वक लागू करने के लिए संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं।