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गन्ना किसानों के समर्थन में आगे नहीं आया एक भी राजनैतिक दल
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गन्ना किसानों के समर्थन में आगे नहीं आया कोई राजनैतिक दल
हापुड़। जिले के किसानों का दोनों चीनी मिलों पर नए पुराने सीजन का करीब 400 करोड़ रुपये बकाया हो गया है। किसान भुगतान कराने के लिये लगातार आंदोलन कर रहे हैं लेकिन अभी तक एक भी राजनैतिक दल किसानों के समर्थन में आगे नहीं आया है। इससे किसानों में आक्रोश है। यहां के हालात जानने के लिए मुख्यमंत्री से विधायकों का एक दल, हापुड़ भेजने की मांग की गयी है।
गन्ना भुगतान के मुद्दे को लेकर राजनैतिक दलों के प्रति किसानों में भारी गुस्सा है। गुस्साए किसान केन्द्र और प्रदेश में सत्ताधारी पार्टी भाजपा समेत सभी दलों को आगामी लोकसभा चुनावों में सबक सिखाने के मौके का इंतजार कर रहे हैं। दरअसल जब चुनाव आते हैं, तब सभी राजनैतिक दलों के नेता किसानों के मसीहा बनने का नाटक करते हैं। यह सच भी है कि बिना किसान का समर्थन मिले कोई भी पार्टी चुनाव नहीं जीत सकती क्योंकि देशभर में 80 प्रतिशत जनता कृषि पर आधारित है। आज हापुड़ जिले के गन्ना किसान पुराना बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं होने से आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। आश्चर्य की बात यह है कि हापुड़ जिले में चार संसदीय क्षेत्र लगते हैं जिन पर चारों सांसद भाजपा के हैं। जिले में तीन विधान सभा क्षेत्र हैं जिनमें से दो विधायक विजयपाल आढ़ती हापुड़ और गढ़मुक्तेश्वर से कमल सिंह मलिक भाजपा के हैं। जबकि धौलाना से विधायक असलम चौधरी बसपा से हैं। भाकियू के जिलाध्यक्ष धनवीर शास्त्री का कहना है कि आश्चर्य की बात यह है कि जब चुनाव आता है, तब यह सभी नेता ग्रामीण क्षेत्र में घूम घूमकर वायदों की मानों बरसात करते हैं लेकिन किसानों के बकाया गन्ना मू्ल्य पर चुप्पी साध लेते हैं। श्यामपुर के किसान नरेन्द्र सहवाग का कहना है कि गन्ना किसानों की आर्थिक दशा लगातार बिगड़ रही है। लेकिन जन प्रतिनिधियों को कोई चिंता नहीं है जबकि उनकी सुख सुविधाओं में कोई कमी नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि वह विधायकों का एक प्रतिनिधि मंडल हापुड़ जिले में भेजें ताकि उन्हें वास्तविकता की जानकारी हो सके।
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हापुड़। जिले के किसानों का दोनों चीनी मिलों पर नए पुराने सीजन का करीब 400 करोड़ रुपये बकाया हो गया है। किसान भुगतान कराने के लिये लगातार आंदोलन कर रहे हैं लेकिन अभी तक एक भी राजनैतिक दल किसानों के समर्थन में आगे नहीं आया है। इससे किसानों में आक्रोश है। यहां के हालात जानने के लिए मुख्यमंत्री से विधायकों का एक दल, हापुड़ भेजने की मांग की गयी है।
गन्ना भुगतान के मुद्दे को लेकर राजनैतिक दलों के प्रति किसानों में भारी गुस्सा है। गुस्साए किसान केन्द्र और प्रदेश में सत्ताधारी पार्टी भाजपा समेत सभी दलों को आगामी लोकसभा चुनावों में सबक सिखाने के मौके का इंतजार कर रहे हैं। दरअसल जब चुनाव आते हैं, तब सभी राजनैतिक दलों के नेता किसानों के मसीहा बनने का नाटक करते हैं। यह सच भी है कि बिना किसान का समर्थन मिले कोई भी पार्टी चुनाव नहीं जीत सकती क्योंकि देशभर में 80 प्रतिशत जनता कृषि पर आधारित है। आज हापुड़ जिले के गन्ना किसान पुराना बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं होने से आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। आश्चर्य की बात यह है कि हापुड़ जिले में चार संसदीय क्षेत्र लगते हैं जिन पर चारों सांसद भाजपा के हैं। जिले में तीन विधान सभा क्षेत्र हैं जिनमें से दो विधायक विजयपाल आढ़ती हापुड़ और गढ़मुक्तेश्वर से कमल सिंह मलिक भाजपा के हैं। जबकि धौलाना से विधायक असलम चौधरी बसपा से हैं। भाकियू के जिलाध्यक्ष धनवीर शास्त्री का कहना है कि आश्चर्य की बात यह है कि जब चुनाव आता है, तब यह सभी नेता ग्रामीण क्षेत्र में घूम घूमकर वायदों की मानों बरसात करते हैं लेकिन किसानों के बकाया गन्ना मू्ल्य पर चुप्पी साध लेते हैं। श्यामपुर के किसान नरेन्द्र सहवाग का कहना है कि गन्ना किसानों की आर्थिक दशा लगातार बिगड़ रही है। लेकिन जन प्रतिनिधियों को कोई चिंता नहीं है जबकि उनकी सुख सुविधाओं में कोई कमी नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि वह विधायकों का एक प्रतिनिधि मंडल हापुड़ जिले में भेजें ताकि उन्हें वास्तविकता की जानकारी हो सके।
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