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विश्व की सभी भाषाएं कर रही संस्कृत का अनुकरण-वाचस्पति
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विश्व की सभी भाषाएं कर रही संस्कृत का अनुकरण : वाचस्पति
हापुड़। संस्कृत संस्थान के अध्यक्ष डा. वाचस्पति मिश्र ने कहा कि संस्कृत सभी भाषाओं का उद्गम है। विश्व की सभी भाषाओं ने संस्कृत का अनुकरण किया है। यह देवों की भाषा है, संस्कारों की जननी है। वर्तमान परिवेश में सम्यक जीवन यापन करने के लिए संस्कृत का ज्ञान होना परमावश्यक है।
डा. वाचस्पति बृहस्पतिवार को जिला शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान डायट में चल रहे संस्कृत वाग्व्यवहार कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को संस्कृत भाषा का पूर्ण ज्ञान होना चाहिए। संस्कृत के बल पर ही हमारा देश जगत गुरू रहा है।
डायट के प्राचार्य दिनेश सिंह ने कहा कि व्यक्तित्व परिष्कार एवं जीवन के वास्तविक अर्थ को यदि जानना है तो संस्कृत को जानना होगा।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद के सदस्य आचार्य कुशलदेव ने कहा कि राज्य सरकार की संस्कृत भाषा के प्रति प्रचार प्रसार की भावना से समस्त उत्तर प्रदेश में संस्कृत की कार्यशालाएं चल रही हैं। जिसके फलस्वरूप आने वाला कल संस्कृत का होगा।
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गुुरुकुल महाविद्यालय ततारपुर के आचार्य ज्ञान सिंह पंवार ने संस्कृत भाषा को धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष का साधन बताया। मौके पर प्रदीप कुमार शास्त्री, मीना ढक्कर, धीरज, राहुल कुमार, ओमश्री, गुलशन, नसीम आदि ने भाग लिया।
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हापुड़। संस्कृत संस्थान के अध्यक्ष डा. वाचस्पति मिश्र ने कहा कि संस्कृत सभी भाषाओं का उद्गम है। विश्व की सभी भाषाओं ने संस्कृत का अनुकरण किया है। यह देवों की भाषा है, संस्कारों की जननी है। वर्तमान परिवेश में सम्यक जीवन यापन करने के लिए संस्कृत का ज्ञान होना परमावश्यक है।
डा. वाचस्पति बृहस्पतिवार को जिला शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान डायट में चल रहे संस्कृत वाग्व्यवहार कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को संस्कृत भाषा का पूर्ण ज्ञान होना चाहिए। संस्कृत के बल पर ही हमारा देश जगत गुरू रहा है।
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डायट के प्राचार्य दिनेश सिंह ने कहा कि व्यक्तित्व परिष्कार एवं जीवन के वास्तविक अर्थ को यदि जानना है तो संस्कृत को जानना होगा।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद के सदस्य आचार्य कुशलदेव ने कहा कि राज्य सरकार की संस्कृत भाषा के प्रति प्रचार प्रसार की भावना से समस्त उत्तर प्रदेश में संस्कृत की कार्यशालाएं चल रही हैं। जिसके फलस्वरूप आने वाला कल संस्कृत का होगा।
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गुुरुकुल महाविद्यालय ततारपुर के आचार्य ज्ञान सिंह पंवार ने संस्कृत भाषा को धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष का साधन बताया। मौके पर प्रदीप कुमार शास्त्री, मीना ढक्कर, धीरज, राहुल कुमार, ओमश्री, गुलशन, नसीम आदि ने भाग लिया।